शिशु

बच्चे के कान छिदवाना: क्या सुरक्षित है और क्या नहीं?

कुछ मातापिता अपने बच्चे के कान में चमकते हुए हीरे के बूंदें देखना पसंद करते हैं जबकि बाकियों को यह विचार बेहद हैरान कर सकता है। अपने बच्चे के कान छिदवाना एक व्यक्तिगत पसंद है।

मातापिता अपने बच्चों के कान छिदवाना क्यों पसंद करते हैं?

अधिकांश मातापिता अलगअलग कारणों से अपने बच्चे के कान छिदवाना पसंद करते हैं। अक्सर यह माना जाता है कि बढ़ती उम्र से बेहतर है कम उम्र में अपने छोटे बच्चे के कान छिदवाना क्योंकि इस समय उसे कम दर्द और परेशानी होती है। दूसरी ओर, कुछ मातापिता अपने सांस्कृतिक या पारंपरिक मूल्यों के कारण अपने बच्चे के कान छिदवाना पसंद कर सकते हैं। जबकि अन्य मातापिता इसे एक बहुत ही अलग कारण से करवाते हैं और यह है छोटे बच्चे के लिंग की पहचान के लिए। ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि कान में बूँदें या बाली पहने हुए बच्चे को गलती से भी लड़का समझा जाए!

कारण जो भी हो, दुनिया भर में कई मातापिता अपने बच्चों के लिए कान छिदवाना पसंद करते हैं।

जन्म के तुरंत बाद बच्चे के कान छिदवाना: क्या यह उचित है?

कुछ परंपराओं में बच्चे के जन्म के समय कान छिदवाए जाते हैं या मातापिता अन्य कारणों से भी यह करवा सकते हैं। यदि आपके बच्चे का स्वास्थ्य ठीक है और कोई अन्य जटिलताएँ नहीं हैं, तो आप अपने डॉक्टर से इस बारे में चर्चा कर सकते हैं।

बच्चे के कान छिदवाना कब सुरक्षित है?

आपके बच्चे के कान छिदवाना उसके लिए हानिकारक हो सकता है; इसलिए, कई मातापिता यह जानना चाहते हैं कि यह करवाने की सही उम्र क्या होती है? खैर, जब भी आप अपने बच्चे के कान छिदवाते है, तो संक्रमण का खतरा होता है क्योंकि आपके बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली अभी भी विकसित हो रही होती है, इसलिए थोड़ी देर इंतजार करना अच्छा होगा। विशेषज्ञ सुझाव दे सकते हैं कि आप अपने बच्चे के कान छिदवाने के लिए कम से कम छह महीने तक प्रतीक्षा करें। लेकिन आप चाहें तो कुछ देर और इंतज़ार कर उन्हें यह निर्णय खुद लेने दे सकते हैं।

अपने बच्चे के कान किस से छिदवाएं ?

पहले के समय में, मातापिता अपने बच्चे के कान किसी भी स्थानीय या अपने पारिवारिक जौहरी से छिदवाते थे। आप चाहें तो इसके लिए अपने बाल रोग विशेषज्ञ या उसके त्वचा विशेषज्ञ से भी संपर्क कर सकते हैं। आप अपने करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों से भी यह जानने की सलाह ले सकते हैं कि उन्होंने अपने बच्चे के कान किस से छिदवाए थे।

डॉक्टर के क्लिनिक, बॉडी पियर्सिंग पार्लर या किसी विशेषज्ञ द्वारा एक स्वच्छ जगह से अपने बच्चे के कान को छिदवाना सबसे अच्छा है।

उचित कान के बूँदें या बाली कैसे चुनें?

परंपरागत रूप से लोग बच्चे के छिदे हुए कानों में नीम की तिल्लियों का इस्तेमाल करते थे क्योंकि इसमें रोगाणुनाशक गुण होते हैं। कुछ माताएँ अब भी नीम की तिल्ली डालना पसंद करती हैं।

यदि आप धातु की बालियों का चयन कर रहे हैं, तो यह सुझाव दिया जाता है कि आप अपने बच्चे के लिए सोने या चांदी की बालियाँ खरीदें।

अपने बच्चे के लिए सही प्रकार की बाली चुनना बहुत महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे के लिए चुनी गई बाली छोटी, सपाट और गोल हो। कान की बाली में कोई तेज किनारे नहीं होनेचाहिए , और ध्यान रखें कि उसका पेंच कान को पीछे से ढक रहा हो। लम्बे और लटकते हुए झुमके नहीं खरीदने चाहिए। आपका बच्चा इसे खींचने की कोशिश कर सकता है और यह उसे चोट पहँचा सकता है। संभव है कि वह उन्हें मुँह में ले ले। इस से उसके श्वसन मार्ग में अवरोध बन सकता है और यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

कान छिदवाने के लिए खुद को और बच्चे को किस तरह से तैयार करें?

तो आपने आखिरकार अपने बच्चे के कान छिदवाने का फैसला कर ही लिया है। सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात जिस पर आपको विचार करना है, वह है आपके शिशु का स्वास्थ्य। यह आवश्यक है कि जब आप बच्चे के कान छिदवाने जाएँ तो वह अच्छे स्वास्थ्य में हो। अपने बच्चे के कान छिदवाने से पहले आप अपने डॉक्टर से भी सलाह ले सकते हैं। डॉक्टर दर्द को कम करने के लिए कुछ दर्द निवारक दवाओं को लिख सकता है। डॉक्टर कान पर कुछ मरहम लगा सकते हैं जो चारों ओर से त्वचा को सुन्न कर देगा।

आपको अपने बच्चे को आरामदायक कपड़े पहनाने चाहिए, जिन्हें बटन खोलकर उतारा जा सके और जो आपके बच्चे के कानों को चोट पहुँचाए बिना आसानी से बदले जा पाए। अपने बच्चे का ध्यान भटकाने के लिए आप उसका पसंदीदा खिलौना अपने साथ ले जा सकते हैं। यदि आपका शिशु ठोस भोजन खाने जितना बड़ा हो गया है, तो आप उसका मन बहलाने के लिए उसका पसंदीदा खाना ले जा सकते हैं।

कान छेदना कैसे किया जाना चाहिए और क्या यह दर्दनाक है?

कान छेदना आमतौर पर एक सुई द्वारा किया जाता है जो एक पुरानी पारंपरिक विधि है, या एक कान छेदने वाली खास बंदूक से, जो कि एक आधुनिक विधि है। आप कान छिदवाने की कोई भी विधि चुन सकते हैं लेकिन जो सबसे महत्वपूर्ण है वह यह है कि छेदने वाले उपकरण अच्छी तरह से विसंक्रमित किए गए हों। इससे आपके बच्चे के कान में संक्रमण होने की संभावना कम हो जाती है।

विशेषज्ञ छेद की जगह पर पेन अथवा मार्कर से निशान बना सकते हैं। इससे यह प्रक्रिया आसान और सटीक हो जाती है। निशान बनाने के लिए डाई इस्तेमाल ना करें, इस से बच्चे की त्वचा को जलन महसूस हो सकती है। सर्जिकल दस्ताने पहनने के बाद, विशेषज्ञ एक एंटीसेप्टिक लोशन का उपयोग कर आपके बच्चे के कान को साफ करेंगे। आपको प्रक्रिया के दौरान अपने बच्चे के सिर को मजबूती से पकड़ना होगा ताकि बच्चा ज्यादा ना हिले। छेदने की प्रक्रिया को ज़्यादा समय नहीं लगता लेकिन बच्चे को शांत करने में वक़्त लग सकता है। दूसरे कान को छेदने से पहले अपने बच्चे को शांत करने की कोशिश करें।

कान छेदना दर्दनाक होता है, और इसके बाद वह रो भी सकता है। दर्द केवल प्रक्रिया पूरी होने तक सीमित नहीं होता है; इसे पूरी तरह से ठीक होने में कुछ और दिन लग सकते हैं। हालांकि कुछ क्रीम और मलहम का उपयोग कर कान को सुन्न किया जा सकता है, कोई भी तरीका बिल्कुल भी दर्द ना होने का आश्वासन नहीं देता।

संभावित जटिलताएँ

कान छिदवाने के कारण उत्पन्न होने वाली कुछ जटिलताएँ निम्नलिखित हैं:

  • संक्रमण : आपके बच्चे के कान में संक्रमण हो सकता है यदि उपकरण विसंक्रमित ना हों, या फिर यदि बाली बहुत ही कसी हुई या मैली हो। यदि आपके बच्चे के कान लाल और सूजे ह्ए हो जाए या उसे बुखार हो, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

  • केलॉइड का निर्माण : कान छिदवाने से हुए दर्द से उभरने के लिए आपके बच्चे का शरीर उसे प्राकृतिक रूप से ठीक करने की कोशिश करता है, लेकिन संभव है कि कई बार यह ऊतक असाधारण रूप से फ़ैल जाता है; इस से एक ठोस निशान ऊतक बन जाता है, जिसे केलॉइड कहा जाता है । केलॉइड्स को अक्सर चिकित्सा संबंधी सहायता की ज़रूरत हो सकती है।

  • एलर्जी प्रतिक्रियाएं : कभीकभी आपके बच्चे के कान की बाली में इस्तेमाल होने वाली धातु के कारण एलर्जी की प्रतिक्रिया हो सकती है। इसलिए आपके बच्चे की बालियों के लिए सोने, चांदी या सर्जिकल स्टील धातु का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है। अन्य धातुओं, जैसे गिलट (निकेल ), से बनी बालियों से संक्रमण हो सकता है।

  • घुटन का खतरा खतरा: यह जरूरी है कि आप ऐसी बाली चुनें जो आसानी से निकल ना आए । ढीली बाली की वजह से आपके बच्चे को घुटसंबंधी घटनाएँ होने की संभावना होती है। बाली का छोटा हिस्सा आपके बच्चे के कान के अंदर भी गिर सकता है और जटिलताओं का कारण बन सकता है।

  • कान की लोलकी फट सकती है: यदि आप अपने बच्चे को झुमकियाँ या मनके वाली बालियाँ पहनाते हैं, तो वह इसे खींच सकता है या फिर ये उसके खिलौनों में फस सकती हैं और वह खुद को चोट पहुँचा सकता है। इस स्थिति के कारण आपके बच्चे के कान की लोलकी फट सकती है।

सुरक्षा के तरीके

यहाँ कुछ सुरक्षा के तरीके दिए गए हैं, जिनका पालन आप अपने बच्चे के कान छिदवाने के समय कर सकते हैं:

  • सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे के कानों को छेदने वाला व्यक्ति प्रशिक्षित है या इस काम का विशेषज्ञ हो।

  • सुनिश्चित करें कि उपकरण विसंक्रमित हो।

  • बाली के सही आकार का चयन सुनिश्चित करें (झूलते हुए, लटकते हुए या या मनके वाली बालियाँ ना पहनाएं )

  • बाली के लिए सही धातु (सोना, चांदी या विसंक्रमित स्टील) का चयन सुनिश्चित करें।

क्या कान छिदवाना बहुत दर्दनाक है?

जी हाँ, कान छिदवाना आपके बच्चे के लिए दर्दनाक होता है। आप अपने बच्चे के कान छिदवाने के लिए कान छेदने वाली बंदूक या सुई का चुनाव कर सकते हैं, लेकिन दोनों ही तरीकों से आपके बच्चे को दर्द होगा। सुई का दर्द एक इंजेक्शन लगाने जितना होगा; हालांकि , बंदूक से कान पर स्टेपलर लगाने जैसा दर्द होगा।

कान छिदवाने के बाद होने वाली जटिलताओं को कैसे रोकें?

आपके बच्चे के कान छिदवाने के बाद वे लाल और सूजे हुए हो जायेंगे। कान छिदवाने के बाद किसी भी जटिलता को रोकने के लिए आप ये सुझाव ले सकते हैं:

  • अपने बच्चे की लोलकी को एंटीसेप्टिक लोशन, एंटीबायोटिक लोशन या अल्कोहल से दिन में दो बार साफ़ करें। आप अपने बच्चे की बाली को धीरे से घुमा सकते हैं।

  • यह सलाह दी जाती है कि कान छिदवाने की प्रक्रिया के कम से कम छह सप्ताह तक अपने बच्चे की बालियों को न बदलें।

  • यदि आप किसी भी मवाद, सूजन या बुखार को महसूस करते हैं, तो आपको तत्काल चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए क्योंकि यह किसी संक्रमण के कारण हो सकता है।

यदि आप अपने बच्चे के कान छिदवाना पसंद करते हैं, तो ज़रूर करवा सकते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया से पहले और बाद में बहुत सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है। यदि आपको संक्रमण का कोई भी संकेत दिखे, तो आपको चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिये।

जया कुमारी

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