बच्चों को उल्टी होना

बच्चों को उल्टी होना

अपने बच्चे को अक्सर उल्टी करते हुए देखना किसी भी माता-पिता के लिए निस्संदेह चिंताजनक होता है। यह चिंता और भी तेजी से बढ़ती है यदि आप ये देखें कि आपका बच्चा लगातार उल्टियां कर रहा है और आप इसके कारण की पहचान नहीं कर पा रहे हैं। हो सकता है कि आप शुरुआत में उल्टी का कारण समझने में सक्षम न हों, लेकिन ध्यान से निरीक्षण करने पर इसकी वजह का पता लग सकता है।

कारण

कारण

बच्चों का शरीर संवेदनशील होता है और अभी उनकी इम्युनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता तैयार हो रही होती है इसलिए विभिन्न कारणों से उन्हें मतली महसूस हो सकती है जिससे अंततः वे उल्टी कर सकते हैं। बच्चों को उल्टी होने के कुछ कारण यहाँ दिए गए हैं।

  • पेट का संक्रमण: पेट का फ्लू या विषाणुजनित गैस्ट्रोएंटेराइटिस पेट के सबसे आम संक्रमणों में से एक है जिसकी वजह से बच्चों को उल्टी की समस्या हो सकती है। पेट की यह संक्रामक बीमारी उदर गुहा में दर्दनाक ऐंठन का कारण बन सकती है जिसकी वजह से आपके छोटे से बच्चे को मतली और उल्टी हो सकती है। पेट में संक्रमण के कारण होने वाली उल्टी के साथ दस्त, पेट में मरोड़, मतली और बुखार हो सकता है। दस्त से डिहाइड्रेशन के कारण हल्का सिरदर्द भी हो सकता है।
  • आंतों का संक्रमण: साल्मोनेला और स्टेफिलोकोकस जैसे रोगजनक और बैक्टीरिया संक्रमण पैदा कर सकते हैं जो आपके बच्चे की उल्टी का कारण बन सकते हैं। आंतों के संक्रमण के कारण पेट में ऐंठन, बुखार और दस्त जैसे लक्षण हो सकते हैं।
  • बच्चों में हर्निया: जब छोटी या बड़ी आंत उदर-गुहा से बाहर फिसल जाती है, तो इस कारण हर्निया होता है। इससे परेशानी हो सकती है और यहाँ तक कि संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। बच्चों में दो प्रकार का हर्निया, इनगुइनल हर्निया और अम्बिलिकल (गर्भनाल) हर्निया होने की संभावना होती है। यदि आंतें इनगुइनल गुहा में स्थानांतरित हो जाती हैं, तो यह श्रोणि के पास बड़ा उभार पैदा कर सकती है, जिसे इनगुइनल हर्निया कहते हैं। गर्भनाल हर्निया तब होता है, जब छोटी आंत नाभि के पीछे पेट की किसी क्षतिग्रस्त दीवार से फिसल जाती है। ये हर्निया पेट की गुहा पर दबाव डालते हैं जिसके कारण बच्चे को उल्टी हो सकती है।
  • विषाक्त पदार्थ खा लेना: चूंकि बच्चों को मुँह में चीजें डालने की एक सामान्य आदत होती है, इसलिए संभव है कि वे गंदे या विषाक्त पदार्थों को खा लें। यह उनके पेट की परत में जलन पैदा कर सकता है और मांसपेशियों को सिकोड़ सकता है, जिससे आपका बच्चा उल्टी कर सकता है। इसके परिणामस्वरूप उसे मतली हो सकती है या पेट में दर्द का अनुभव भी हो सकता है।
  • खाद्य पदार्थ से एलर्जी: यदि आपका बच्चा किसी विशेष भोजन को खाने के बाद उल्टी करता है, तो यह एलर्जी के कारण हो सकता है। उल्टी खाद्य पदार्थों से एलर्जी के कई लक्षणों में से एक है। अन्य लक्षणों में होठों और पलकों के पास की त्वचा में सूजन, पेट में दर्द, त्वचा पर रैशेज, खुजली आदि शामिल हो सकते हैं। यदि आपके बच्चे की उल्टी में दूध भी गिरता है, तो हो सकता है कि वह लैक्टोज इंटॉलरेंट हो। यह तब होता है जब शरीर दूध को पचाने के लिए पर्याप्त लेक्टेज एंजाइम नहीं बनाता है।
  • अम्ल और पित्त प्रतिक्रिया: जब पेट को अन्न नली से अलग करने वाली अन्न नली अवरोधिनी खुल जाती है, तो इसके कारण पेट में उपस्थित भोजन अम्ल के साथ अन्न नली में चला जाता है। इसे एसिड रिफ्लक्स कहते हैं। इसकी वजह से जलन के कारण उल्टी और मतली हो सकती है। दूसरी ओर, जब पाइलोरिक वाल्व, जो छोटी आंत और पेट के बीच होता है, वह ठीक से काम नहीं करता है, तो पित्त छोटी आंत से पेट में चला जाता है। यह बच्चे के पेट की परत में जलन पैदा करता है, जिसकी वजह से उसमें सिकुड़न पैदा होती है और पित्त निकलता है, जो कि उल्टी के जैसा एक हरा-पीला तरल पदार्थ होता है।
  • हवा निगल लेना और अधिक खा लेना: यदि आपके बच्चे ने अपने पेट की क्षमता से अधिक खा लिया हो या वह दूध पीने के दौरान हवा निगल गया हो, तो वह उल्टी कर सकता है क्योंकि उसका पेट पूरी तरह भरा हुआ है। हवा का निगलना, मुँह में निप्पल की गलत स्थिति का परिणाम हो सकता है।
  • अपचन: यदि आपके बच्चे का भोजन अच्छी तरह से नहीं पच पाया है, तो वह बिना पचे हुए भोजन, जो कि उसके पेट में इकठ्ठा हो गया है, उसे उल्टी द्वारा बाहर निकल सकता है। अधिक खाने, बहुत जल्दी-जल्दी खाने, मसालेदार या चिकनाईयुक्त आहार खाने के कारण पाचन क्रिया खराब हो सकती है।
  • दवा: कुछ दवाओं के सेवन से आपके बच्चे को उल्टी हो सकती है, विशेषतः यदि दवा खाली पेट ली गई हो।
  • मोशन सिकनेस: शारीरिक संतुलन में एक निरंतर बदलाव के कारण आपके बच्चे के आंतरिक संतुलन में दिशाहीनता आ सकती है। रोलर कोस्टर की सवारी के बाद यह देखा जा सकता है। कान का अंदरूनी हिस्सा, जो शरीर के संतुलन का प्रबंधन करता है, संतुलन में इस बदलाव के कारण मस्तिष्क को असामान्य कष्ट के संकेत भेज सकता है। आगे चलकर मस्तिष्क पेट की मांसपेशियों को तंत्रिका कष्ट के संकेत भेजता है जिसके कारण आपका बच्चा उल्टी करता है। चक्कर आना और सिरदर्द भी वैसा ही प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
  • कान का संक्रमण: लेबिरिंथाइटिस जैसे कान के संक्रमणों की वजह से कान का अंदरूनी हिस्सा मस्तिष्क को असामान्य कष्ट के संकेत भेज सकता है, जैसा कि दस्त की बीमारी और चक्कर आने पर होता है। आपके बच्चे को चक्कर आ सकता है, संतुलन बनाने में परेशानी हो सकती है और मतली की गंभीर समस्या हो सकती है।
  • निमोनिया: बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण फेफड़ों में एल्वियोली को उत्तेजित कर देते हैं जिससे निमोनिया हो जाता है। सांस लेने में कठिनाई और खांसी इसके सामान्य लक्षण हैं, लेकिन लगातार खांसने की वजह से बच्चे को उल्टी भी हो सकती है। संक्रमण के कारण भूख कम लगने से संभव है कि बच्चा जब भी कुछ खाए तो वह उल्टी कर दे।
  • अन्य संक्रमण और बीमारियां: उल्टी कई संक्रमणों और बीमारियों का लक्षण है जिसमें सेप्टिसीमिया और मस्तिष्क ज्वर (मैनिंजाइटिस) के साथ-साथ बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द जैसे अन्य लक्षण शामिल हैं।
  • रुमिनेशन सिंड्रोम (जुगाली): यह एक दुर्लभ मामला है जब भोजन किसी भी परेशानी या दर्द के बिना मुँह में वापस आ जाता है। बच्चे को इस दौरान कोई असुविधा या जलन नहीं होगी। यह देखना भी दिलचस्प है कि इस दौरान जो भोजन मुँह में वापस आता है वह ताजा होता है और आमतौर पर बच्चा उसे चबाकर वापस निगल लेता है।
  • अपेंडिक्स: अपेंडिक्स छोटे बच्चों में दुर्लभ है और आमतौर पर 10 से 20 वर्ष की आयु के बच्चों में होता है। अपेंडिक्स में संक्रमण मतली का कारण बन सकता है जिस वजह से उल्टी हो सकती है। यह पेट में अत्यधिक दर्द, हल्के बुखार और भूख की कमी का कारण भी बन सकता है। चूंकि संक्रमण के कारण पेट की गुहा में दर्द होता है, इसलिए पेट की मांसपेशियों की चाल एक असामान्य तरीके से होने लगती है। इससे मतली और उल्टी हो सकती है।

यदि आप देखते हैं कि आपके बच्चे को रात में उल्टी होती है, तो यह इन कारणों और रात के खाने के तुरंत बाद सोने, साइनस की समस्या, अत्यधिक खांसी या रात में पेट में म्यूकस के जमा होने आदि जैसे अन्य कारणों से हो सकता है। दुर्लभ मामलों में, यह एक ट्यूमर का भी संकेत हो सकता है। इसलिए अगर यह समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से परामर्श करना उचित है।

सूखी उल्टी क्या होती है

सूखी उल्टी तब होती है जब आपके बच्चे को जिस तरह उल्टी आती है वैसे पेट में मांसपेशियां और मुँह सिकुड़ने का अनुभव होता है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि उल्टी हो ही। इसे उबकाई के रूप में भी जाना जाता है और यह एकाध उल्टी हो जाने के बाद हो सकता है या जब आपके बच्चे को जी मिचलाने जैसा महसूस हो तब हो सकता है। यह तनाव और परेशानी का संकेत भी हो सकता है।

क्या उल्टी के बाद बच्चों को दवाएं देना ठीक है?

जब तक कि किसी डॉक्टर ने इसकी सलाह न दी हो, तब तक अपने मन से बच्चे को कोई नुस्खे वाली या कोई और दवा न दें। अपने बच्चे को एस्पिरिन युक्त दवा न दें क्योंकि इससे रेये सिंड्रोम हो सकता है जो कि बच्चे के मस्तिष्क, हृदय और यकृत को प्रभावित करता है।

अपने बच्चे को बेहतर महसूस कैसे कराएं

यदि आपके बच्चे को मतली आती है और उल्टी जैसा महसूस होता है, तो यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं जिनसे आप उसे बेहतर महसूस करने और बेचैनी को कम करने में मदद कर सकते हैं।

. खाने के लिए मजबूर न करें: यदि आपका बच्चा लगातार उल्टी होने के बाद कुछ भी नहीं खाना चाहता है, तो उसे खाने के लिए मजबूर न करें। अगर पेट को शांत करने के लिए वह एक समय का भोजन छोड़ देता है, तो इसमें कोई समस्या नहीं है। इसके अलावा, उसे ठोस आहार खिलाने से उसका पेट खराब हो सकता है और उसे बैचेनी हो सकती है।

२. खूब सारे तरल पदार्थ दें: उल्टी के कारण शरीर का डिहाइड्रेशन तेजी से हो सकता है, अगर साथ में दस्त हो रहे हों तो और भी तेज । उल्टी के कारण उसके शरीर ने सोडियम और पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भी खो दिए होंगे। उसे रिहाइड्रेट करने के लिए आपको उसे पानी में घुलने वाले ओ.आर.एस. के छोटे-छोटे घूंट देने की आवश्यकता होगी। यह उसे तब तक पर्याप्त कैलोरी भी प्रदान करेगा जब तक वह ठोस भोजन नहीं खा सकता। उसे बिल्कुल भी दूध या जूस न दें क्योंकि इसे पचाना मुश्किल हो सकता है।

. आराम करने दें: लगातार उल्टी की वजह से आपके बच्चे को थकान महसूस हो सकती है और उसे अपनी ऊर्जा वापस पाने के लिए पर्याप्त आराम की आवश्यकता होती है। उचित आराम से उसके शरीर को उस संक्रमण से लड़ने का समय भी मिल सकेगा, जिसकी वजह से उसे उल्टी हुई होगी।

. डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं के नियम का पालन करें: डॉक्टर ने बच्चे के लिए विभिन्न दवाओं का एक नियम बनाकर दिया होगा। ये सुनिश्चित करने के लिए कि संक्रमण वापस न हो, दिए गए नुस्खे का पालन करें।

उल्टी होने के बाद बच्चे को क्या खिलाना चाहिए

उल्टी करने के बाद आपके बच्चे के शरीर से वे पोषक तत्व बाहर निकल गए होंगे जो उसने खाए थे। हो सकता है कि उल्टी करने के तुरंत बाद उस बुरे अनुभव के कारण वह कुछ खाने को तैयार न हो। आपके बच्चे के शरीर में से ऊर्जा पूरी तरह से निकल न जाए, यह सुनिश्चित करने के लिए यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं।

१. पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन कराएं: बच्चे को उल्टी होने के बाद, कुछ घंटों के लिए आपको उसे पर्याप्त तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स देने की आवश्यकता होगी। उसे कोई ठोस आहार न दें क्योंकि इससे उसकी स्थिति और भी खराब हो सकती है।

२. तरल आहार शुरू करें: एक बार बेहतर महसूस करने के बाद अपने बच्चे को तरल आहार देना शुरू करना सर्वोत्तम है। आप उसे थोड़े नमक और बिना मसालों के साथ सब्जी या चिकन का थोड़ा सूप दे सकते हैं। चावल का पानी भी एक अच्छा विकल्प है। हालांकि, दाल के पानी से बचें क्योंकि कुछ दालें पचने में भारी होती हैं। आप उसे कच्चे नारियल का थोड़ा पानी भी दे सकते हैं क्योंकि इसमें भरपूर अमीनो एसिड और खनिज होते हैं।

३. बिना मसाले का ठोस आहार दें: एक बार जब आपका बच्चा थोड़ा और ठीक हो जाए तो उसको सादे मसले हुए चावल और सब्जी या चिकन का सूप दिया जा सकता है। सुनिश्चित करें कि आप उसे कोई बहुत अधिक रेशेदार सब्जियां न दें, जो पचाने में कठिन हों। आप सब्जियों को एक साथ मिला कर और उन्हें छान कर भी बच्चे के लिए सूप बना सकते हैं जो कि पचने में आसान और हल्का हो। अपने बच्चे को ठोस आहार देना शुरू करने के लिए, उल्टी होने के बाद आठ घंटे तक इंतजार करें।

४. उसे सामान्य भोजन दें: आपका बच्चा पूरी तरह से ठीक होने के बाद या उसकी अंतिम उल्टी के 24 घंटे बाद, आप उसे नियमित भोजन दे सकते हैं। आप उसे ब्रेड या अन्य खाद्य पदार्थों के साथ थोड़ी मात्रा में दूध दे सकते हैं। यदि वह खाने के बाद ठीक रहता है तो आप उसे सामान्य भोजन देना जारी रख सकते हैं।

बच्चों के लिए उल्टी के घरेलू उपचार

नीचे कुछ घरेलू उपचार दिए गए हैं जो उल्टी के बाद आपके बच्चे को आराम पहुँचाने में मदद कर सकते हैं।

  • सूप या पानी जैसा विशुद्ध तरल पदार्थ आपके बच्चे का पुनर्जलीकरण करने का एक बढ़िया विकल्प हो सकता है। ओ.आर.एस. जैसा इलेक्ट्रोलाइट घोल भी खोए हुए पोषक तत्वों की पूर्ति में सहायक हो सकता है। झाग निकल जाने के बाद, अदरक-युक्त झागदार तरल या गुनगुना सोडा थोड़ी मात्रा में दिया जा सकता है। बुलबुलों को खत्म करने के लिए आपको इसे हिलाने की आवश्यकता होगी क्योंकि कार्बनीकरण से स्थिति खराब हो सकती है।
  • कच्चे नारियल का पानी पोषक तत्वों से भरपूर होता है और तरल आहार पर रहते हुए आपके बच्चे को पोषण देने में सक्षम है।
  • कैमोमाइल या पुदीने की चाय पेट को आराम दे सकती है। अगर आपका बच्चा पचा सकता है, तो आप उसे दो या तीन बार थोड़ी मात्रा में गुनगुनी गर्माहट वाली चाय पिला सकते हैं।
  • एक बार जब आपका बच्चा सफलतापूर्वक अपने तरल आहार को पचा लेगा, तो आप उसे कुछ टोस्ट या कुरकुरा खाने को दे सकते हैं। जब वह ठीक हो जाए, तब आप उसे कुछ बिना मसाले के, आसानी से पचने वाला भोजन जैसे कि वेज सूप और मसला हुआ चावल देना शुरू कर सकते हैं। एक बार जब वह पूरी तरह से ठीक हो जाए तो धीरे-धीरे उसे फिर से सामान्य भोजन देना शुरू करें।

बच्चा फिर से ठोस आहार का सेवन कब कर सकता है

अधिकांश लोग कहते हैं कि आप अपने बच्चे को ठोस आहार देने के लिए उल्टी करने के बाद कम से कम 24 घंटे तक इंतजार करें। यदि आपका बच्चा इस बीच में उल्टी नहीं करता है और तरल आहार के प्रति अच्छी प्रतिक्रिया देता है, तो आप धीरे-धीरे उसे सुपाच्य ठोस भोजन दे सकते हैं।

उल्टी से बचाव के लिए सावधानियां

बाहरी कारणों की वजह से अपने बच्चे को उल्टी न हो इसके लिए आप कुछ सावधानियों का पालन कर सकते हैं।

१. सुनिश्चित करें कि खाना स्वच्छ और स्वास्थ्यकर है: अपने रसोईघर को साफ रखें। अपने बच्चे का भोजन तैयार करने और परोसने के लिए उपयोग किए जाने वाले बर्तनों को कीटाणुरहित (स्टरलाइज) करें। यह संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया और वायरस को रोकने का एक तरीका है।

२. अपचन पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ कम दें: चॉकलेट, खट्टे फल और संसाधित खाद्य पदार्थ जैसे कुछ आहार आपके बच्चे में एसिड रिफ्लक्स पैदा कर सकते हैं। यदि आपका बच्चा पहले इसका अनुभव कर चुका है, तो इन खाद्य पदार्थों से दूर ही रहना सबसे अच्छा है। इसके अलावा, अपचन से बचने के लिए अपने बच्चे को धीरे-धीरे खाना और भोजन को ठीक से चबाकर निगलना सिखाएं।

३. दवाओं के दुष्परिणाम जानें: यदि आपका बच्चा दवाएं ले रहा है, तो आपको इन दवाओं के कारण होने वाले किसी भी दुष्परिणाम के बारे में जांच करनी होगी। कुछ दवाओं के सेवन से उल्टी हो सकती है, खासकर अगर खाली पेट ली जाएं।

४. अपने बच्चे को होने वाली एलर्जी पर ध्यान दें: यदि अपने बच्चे को होने वाली किसी भी खाद्य एलर्जी के बारे में आप जानते हैं, तो उसे उस विशेष आहार को खाने से रोकने के लिए सभी आवश्यक उपाय करें। इसके अलावा, सभी डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों की सामग्रियों की जांच करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसमें कोई भी ऐसी सामग्री नहीं है जिससे आपके बच्चे को एलर्जी हो।

५. उन स्थितियों से दूर रहें जिनसे मोशन सिकनेस हो सकता है: यदि आपके बच्चे को मोशन सिकनेस होता है, तो उसे रोलर कोस्टर की सवारी कराने या तेज मोड़ वाली जगहों पर यात्रा करने आदि से बचें, जिसकी वजह से उसको चक्कर आ सकता है और वह उल्टी कर सकता है।

६. अपने बच्चे को हाइड्रेट रखें: दस्त के साथ होने वाली उल्टी शरीर में पानी की मात्रा को कम कर सकती है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप उसे हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ पिलाते रहें।

बच्चे के किसी विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लेने पर क्या करें

यदि बच्चे में कोई विषाक्त पदार्थ खा लिया और उसके बाद वह उल्टी करना शुरू कर देता है तो सर्वोत्तम उपाय जानने के लिए आपको डॉक्टर को तुरंत फोन करना होगा। यदि आप पहचान सकें कि उसने क्या खाया है, तो इसे अच्छी तरह याद रखें और डॉक्टर को उसकी ठीक-ठीक जानकारी दें। डॉक्टर खाए हुए पदार्थ के आधार पर आपको बता पाएंगे कि आपको क्या करने की जरूरत है।

डॉक्टर से परामर्श कब करें

उल्टी किसी संभावित गंभीर समस्या की सूचक हो सकती है। निम्नलिखित मामलों में, अपने बच्चे के लिए सही उपचार प्राप्त करने के लिए हमेशा डॉक्टर से परामर्श करें।

  • उल्टी में खून: आपके बच्चे की उल्टी में खून आना बहुत सारी गंभीर समस्याओं की ओर इशारा कर सकता है जैसे कि पेट में संक्रमण, एसिड रिफ्लक्स के कारण अन्न नली की परत का फटना या उसमें खरोंच आना, छोटी आंत में सूजन इत्यादि। ऐसे मामलों में, आपको अपने बच्चे को जल्द से जल्द डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
  • उल्टी के साथ अत्यधिक दस्त और तेज बुखार: उल्टी के साथ होने वाला दस्त आपके बच्चे का डिहाइड्रेशन बड़ी तीव्रता से कर सकता है। यदि बच्चे को तेज बुखार है तो स्थिति और खराब हो जाती है। आगे की किसी भी तरह की जटिलताओं को रोकने के लिए डॉक्टर के पास जाना आवश्यक है।
  • हरे या काले रंग की उल्टी: पित्त प्रतिक्रिया के कारण आपके बच्चे की उल्टी हरे रंग की दिखाई दे सकती है। यह आपके बच्चे को आंत में अल्सर या गम्भीर संक्रमण होने का संकेत भी दे सकता है। दूसरी ओर, गहरे भूरे या काले रंग की उल्टी, आंतरिक रक्तस्राव के कारण बनने वाले रक्त के थक्कों की ओर इंगित कर सकती है। यह विटामिन के की कमी या दूध की एलर्जी के कारण हो सकता है।
  • पेट में सूजन: यदि आपके बच्चे के पेट में सूजन है, तो यह एक गंभीर संक्रमण या द्रव प्रतिधारण (फ्लूड रिटेंशन) की ओर संकेत कर सकता है। दोनों ही मामलों में डॉक्टर से परामर्श की आवश्यकता होती है।
  • कमजोर नाड़ी और थकान: यदि आपका बच्चा दिशाहीन लगता है और दिन में कम पेशाब करता है तो यह पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स के नुकसान के कारण डिहाइड्रेट होने का संकेत हो सकता है।

उचित स्वच्छता और स्वस्थ भोजन बच्चों में उल्टी के खतरे को कम करने का एक अच्छा तरीका है। हालांकि यदि अन्य स्थितियां अक्सर आपके बच्चे की उल्टी का कारण बनती हैं, तो यह सलाह दी जाती है कि आप डॉक्टर से परामर्श करें।