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शिशुओं के लिए एंटीबायोटिक – फायदे और साइड इफेक्ट्स

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एंटीबायोटिक जीवन को सुरक्षित रखने की दवा होती है और 20वीं सदी में खोजी गई सभी दवाओं में यह सबसे महत्वपूर्ण है। इसका उपयोग कई खतरनाक बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है। चूंकि शिशु का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है इसलिए यदि उसे बैक्टीरियल इंफेक्शन हुआ है तो डॉक्टर एंटीबायोटिक प्रिस्क्राइब करते हैं। हालांकि इसका बहुत ज्यादा उपयोग करने से प्रभाव कम हो जाते हैं। इसलिए पेरेंट्स को एंटीबायोटिक के बारे में सबसे पहले यह जानना चाहिए कि यदि बच्चे को एंटीबायोटिक देने की सलाह दी गई है तो इसके साइड इफेक्ट्स क्या होंगे? खैर इस आर्टिकल में बच्चों के लिए एंटीबायोटिक के फायदे और साइड इफेक्ट्स के अलावा कई अन्य जानकारियां दी गई हैं जानने के लिए आगे पढ़ें।

एंटीबायोटिक क्या है?

एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग उन बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए किया जाता है जिनसे रोग और इंफेक्शन हो सकते हैं। ये बैक्टीरिया के पनपने और बढ़ने की क्षमता पर असर करते हैं और अंततः उन्हें नष्ट कर देती हैं। एंटीबायोटिक्स सिर्फ बैक्टीरिया के लिए ही प्रभावी हैं और इनका उपयोग किसी भी अन्य ऑर्गेनिज्म जैसे, वायरस और फंगी के लिए नहीं किया जा सकता है। 

एंटीबायोटिक के प्रकार

अलग-अलग प्रकार के एंटीबायोटिक बैक्टीरिया पर अलग तरीके से काम करते हैं। इसलिए छोटे से छोटे इंफेक्शन से लेकर बड़े रोगों को ठीक करने के लिए 150 से भी ज्यादा एंटीबायोटिक मौजूद हैं। एंटीबायोटिक को निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा गया है, जैसे 

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  • सेफालोस्पोरिन
  • फ्लोरोक्विनोलोन
  • एमोक्सिसिलिन
  • पेनिसिलिन
  • एरिथ्रोमाइसिन
  • पॉलीपेप्टाइड्स
  • टेट्रासाइक्लिन
  • एमिनोग्लाइकोसाइड्स
  • स्ट्रेप्टोग्रामिंस
  • सल्फोनामाइड
  • जेंटामाइसिन

इनमें से सबसे ज्यादा पेनिसिलिन, एमोक्सिसिलिन, एरिथ्रोमाइसिन, सेफालोस्पोरिन और जेंटामाइसिन का उपयोग किया जाता है। आपके बेबी के लिए यह कितना सही है, आइए जानें। 

क्या छोटे बच्चों के लिए एंटीबायोटिक सेफ है?

बेबी को एंटीबायोटिक देने से कई खतरनाक इंफेक्शन से बचाव होता है, जैसे मेनिन्जाइटिस, निमोनिया, यूरिनरी इंफेक्शन (यूटीआई – मूत्रमार्ग में इंफेक्शन) और खून में इंफेक्शन। इसे सुरक्षित तरीके से दिया जा सकता है पर कई दवाओं की तरह ही एंटीबायोटिक के भी साइड इफेक्ट्स होते हैं। इसलिए इसका उपयोग जरूरत होने पर ही करना चाहिए। 

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जीवन की सुरक्षा के लिए भी एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग हर समय नहीं करना चाहिए। बच्चे को इसकी जरूरत कब पड़ती है और कब नहीं, यह जानने के लिए आगे पढ़ें। 

छोटे बच्चों को एंटीबायोटिक की जरूरत कब पड़ती है?

यदि बच्चों को निम्नलिखित समस्याएं होती हैं तो उन्हें एंटीबायोटिक देने की जरूरत पड़ती है, आइए जानें;

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1. तेज बुखार के लिए

बुखार आने का मतलब ही यही है कि शरीर किसी इंफेक्शन से लड़ रहा है। बेबी को 100 – 102 डिग्री फेरनाइट बुखार हो सकता है। यह अक्सर गंभीर रूप से बैक्टीरियल इंफेक्शन होने का संकेत है। इन मामलों में डॉक्टर अक्सर एमोक्सिसिलिन, एम्पीसिलीन या पेनिसिलिन देने की सलाह देते हैं भले ही यह पूरी तरह से सुनिश्चित न हुआ हो कि यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है। 

2. कान में इंफेक्शन के लिए

यदि बड़े बच्चों को कान का इंफेक्शन होता है तो इसे खुद से ठीक होने के लिए 1 – 2 सप्ताह का इंतजार किया जाता है। बेबीज की बात अलग है और वे कान के इंफेक्शन के कारण हुए दर्द व तकलीफ को दिखा नहीं सकते हैं और इसलिए उन्हें एमोक्सीसिलिन नामक एंटीबायोटिक देना जरूरी होता है। कान में गंभीर रूप से इंफेक्शन होने के लक्षण हैं, बहुत ज्यादा रोना, सोने में कठिनाई, इरिटेशन होना, तेज बुखार और कान में खुजली या बच्चे द्वारा कान खींचना। 

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3. निमोनिया के लिए

छोटे बच्चों में निमोनिया वायरस की वजह से होता है या बैक्टीरिया की वजह से यह बता पाना कठिन है। रेस्पिरेटरी सिस्टम के ऊपरी ट्रैक्ट में वायरल होने के लक्षण भी समान ही होते हैं, जैसे खांसी, सांस लेने में दिक्कत, बुखार या उल्टी। चूंकि बच्चों में निमोनिया से होने वाले कॉम्प्लिकेशंस अक्सर खतरनाक हो सकते हैं इसलिए डॉक्टर माइक्रोब्स का पता न लगने पर एंटीबायोटिक प्रिस्क्राइब करते हैं। 

4. सूखी खांसी के लिए

यदि बच्चों में खांसी और बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं तो बच्चों को एंटीबायोटिक देने से पहले सप्ताह में ही काफी प्रभाव दिखाई देने लगता है। आमतौर पर डॉक्टर एजिथ्रोमाइसिन, एरिथ्रोमाइसिन और क्लेरिथ्रोमाइसिन।

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5. यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के लिए

मूत्र मार्ग में इंफेक्शन यानी यूटीआई तब होता है जब पॉटी या अन्य अन्य जगहों से बैक्टीरिया ब्लैडर या किडनी में आ जाते हैं। यूटीआई के लक्षण चिड़चिड़ापन, डायरिया, बुखार और उल्टी हैं और यूरिन रूटीन माइक्रोस्कोपी व यूरिन कल्चर टेस्ट के परिणामों का उपयोग करके इसका डायग्नोसिस किया जा सकता है।

6. अन्य इंफेक्शन के लिए

अन्य बैक्टीरियल इंफेक्शन को ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक प्रिस्क्राइब की जाती है, जैसे गले में इंफेक्शन या साइनस इंफेक्शन। इसके आम लक्षण हैं तेज बुखार, जुकाम और कभी-कभी सिर में दर्द। 

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छोटे बच्चों को एंटीबायोटिक की जरूरत कब नहीं होती है?

जैसा पहले भी बताया है कि एंटीबायोटिक सिर्फ बैक्टीरियल इंफेक्शन को ठीक करने के लिए है। कई दूसरी बीमारियां हैं जिनके लिए बच्चे को एंटीबायोटिक देने की जरूरत नहीं पड़ती है। बहुत सारे वायरल इंफेक्शन, जैसे फ्लू, ब्रोंकाइटिस, क्रुप, जिसमें आम सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं लेकिन इन्हें एंटीबायोटिक से ठीक नहीं किया जा सकता। 

एंटीबायोटिक कितनी जल्दी काम करना शुरू कर देते हैं?

ट्रीटमेंट शुरू होने के बाद ही ज्यादातर बच्चे 48 से 72 घंटों में ठीक हो जाते हैं। वैसे तो यह याद रखना जरूरी है कि अच्छा महसूस करने का मतलब पूरी तरह से रिकवर होना नहीं है। एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा होना जरूरी है ताकि सभी बैक्टीरिया को नष्ट किया जा सके। सही होने के शुरुआती संकेतों के साथ या बीच में ही यह कोर्स बंद करने से माइक्रोब एंटीबायोटिक का प्रतिरोधी बनाने लगता है और बच्चा थोड़े दिनों के बाद दोबारा बीमार पड़ सकता है जिसके लिए उसे अधिक स्ट्रॉन्ग एंटीबायोटिक्स देने पड़ सकते हैं। 

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अब तक आपको पता होना चाहिए कि एंटीबायोटिक का उपयोग सिर्फ बैक्टीरियल इंफेक्शन को ठीक करने के लिए किया जाता है। यहाँ इसके कुछ फायदे भी बताए गए हैं, जानने के लिए आगे पढ़ें। 

छोटे बच्चों के लिए एंटीबायोटिक के फायदे

  1. सबसे पहली एंटीबायोटिक दवा पेनिसिलिन की खोज और 1940 से इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू होने के बाद से कई एंटीबायोटिक ट्यूबरक्लोसिस (टीबी), निमोनिया और मेनिन्जाइटिस जैसी घातक बीमारियों को ठीक करने के लिए उपयोग की जाती रही हैं।
  2. पिछले 79 से अधिक सालों में एंटीबायोटिक दवाओं ने लाखों लोगों के जान बचाई है। वास्तव में पेनिसिलिन की खोज होने से पहले हर 10 में से 1 बच्चे की बैक्टीरियल इंफेक्शन से मृत्यु होती थी।
  3. एंटीबायोटिक दवाएं कम उम्र में ही बीमारियों को खत्म कर देती हैं और यह इन बीमारियों से होने वाले दूरगामी प्रभावों और विकलांगताओं से भी बचाती हैं।

इन फायदों के साथ हम आपको एंटीबायोटिक से होने वाले साइड इफेक्ट्स भी बताना चाहेंगे। हाँ, अन्य दवाओं के जैसे ही एंटीबायोटिक से कई साइड इफेक्ट्स होते हैं, जानने के लिए आगे पढ़ें। 

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छोटे बच्चों के लिए एंटीबायोटिक के साइड इफेक्ट्स

यद्यपि एंटीबायोटिक लेने से काफी फायदा होता है पर इसके कई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। शिशुओं में इससे होने वाले कुछ साइड इफेक्ट्स के बारे में जानने के लिए आगे पढ़ें;

1. लक्षण संबंधी प्रभाव

एंटीबायोटिक लेने से बच्चों को कुछ लक्षण युक्त साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे रैशेस, एलर्जी, मतली, उल्टी, डायरिया, पेट में दर्द, हल्का सा सिर भारी होना या सिर में दर्द। अन्य एंटीबायोटिक सुनने और संतुलित रहने की नर्व्स को डैमेज कर सकते हैं और साथ ही इससे चक्कर, मतली व कान में घंटी की आवाज आने जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। 

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2. एंटीबायोटिक से अच्छे बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाते हैं

6 महीने से कम उम्र के बेबीज के लिए एंटीबायोटिक का उपयोग सावधानी से करना चाहिए क्योंकि यह इंफेक्शन के साथ आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया को भी नष्ट कर देता है। आंतों में मौजूद ये उपयोगी बैक्टीरिया पाचन ठीक रखने में मदद करते हैं और अन्य इंफेक्शन से लड़ते हैं। अच्छे बैक्टीरिया शरीर में प्राकृतिक रूप से होने वाले यीस्ट इंफेक्शन, जैसे कैंडिडा पर भी नजर रखते हैं। इसलिए यीस्ट इंफेक्शन एंटीबायोटिक लेने से होने वाला एक आम साइड इफेक्ट है। 

3. इम्यून सिस्टम डैमेज हो जाता है

एंटीबायोटिक रोगों का एक प्रभावी उपचार है पर इसका उपयोग ठीक से न करने पर यह बच्चों के लिए हानिकारक भी हो सकता है। जैसा पहले भी बताया गया है कि एंटीबायोटिक आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को खत्म कर देता है। यह आंतों में मौजूद कॉमेन्सल बैक्टीरिया के विकास में बाधा भी बन सकता है। इसके परिणामस्वरूप इम्यून सिस्टम लंबे समय के लिए कमजोर हो जाता है क्योंकि पाचन तंत्र में मौजूद बैक्टीरिया इम्यून सिस्टम को बनाने में मदद करते हैं। 

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4. एलर्जिक रिएक्शन

पेनिसिलिन या सल्फामाइड परिवार से संबंधित एंटीबायोटिक लेने पर एलर्जी होना अधिक आम है। यदि बच्चे को एलर्जी है और उसे यह एंटीबायोटिक दी गई है तो इसके तुरंत बाद या कुछ दिन के बाद उसे पित्ती (हाइव्स), खुजलीदार दाने, सांस लेने में कठिनाई और सूजन का अनुभव होगा।

5. एंटीबायोटिक प्रतिरोध

जीवित ऑर्गेनिज्म, जैसे बैक्टीरिया समय के साथ एंटीबायोटिक के लिए बाधा बन सकते हैं। यह बाधा बहुत ज्यादा एंटीबायोटिक लेने या वायरल इंफेक्शन के लिए भी एंटीबायोटिक का उपयोग करने से भी होती है। एंटीबायोटिक का बहुत ज्यादा उपयोग करने के साइड इफेक्ट्स के बारे में आगे बताया गया है। एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस या एंटीबायोटिक में बाधा तभी आती है जब इंफेक्शन को ठीक करने के लिए इसका उपयोग सही से न किया गया हो या डॉक्टर द्वारा इसका प्रिस्क्राइब कोर्स पूरा न किया गया हो। 

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6. सुपरबग्स

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से कुछ ऐसे बैक्टीरिया बनते हैं जिन्हें कोई भी एंटीबायोटिक टैबलेट नष्ट नहीं कर सकती है। इस प्रकार के बैक्टीरिया को सुपरबग्स कहा जाता है और ऐसे में इंफेक्शन पूरी तरह से ठीक नहीं होता है इसलिए बच्चों को वास्तव में इससे काफी खतरा हो सकता है। 

बहुत ज्यादा एंटीबायोटिक का उपयोग करने से संबंधित जोखिम

एंटीबायोटिक का बहुत ज्यादा उपयोग करना एक मुख्य समस्या है क्योंकि ज्यादातर पेरेंट्स सेफ्टी के लिए इसकी मांग करते हैं ताकि सामान्य समस्याओं, जैसे सर्दी या फ्लू से बचा जा सके। डॉक्टर के लिए समय लेकर पेरेंट्स को एंटीबायोटिक का उपयोग क्यों नहीं करना चाहिए यह बताने से ज्यादा आसान एक एंटीबायोटिक प्रिस्क्राइब करना है। 

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एंटीबायोटिक सीधे मेडिकल स्टोर  खरीदी जा सकती हैं और अक्सर लोग खुद से ही यह दवा ले लेते हैं। कुछ पेरेंट्स बच्चे के बीमार पड़ने पर भी उसे एंटीबायोटिक देते हैं। भविष्य में मेडिकल कॉम्प्लिकेशंस से बचने के लिए यह बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। 

कृषि विभाग और एनिमल फार्मिंग में भी उपज को बढ़ाने और रोगों से लड़ने के लिए एंटीबायोटिक का उपयोग बहुत ज्यादा किया जाता है। एंटीबायोटिक का उपयोग बहुत अधिक करने से बैक्टीरिया उत्पन्न होते हैं और हमारा इम्यून सिस्टम इनसे लड़ने के लिए प्राकृतिक रूप से उतना मजबूत नहीं होता है इसलिए कई खतरनाक बीमारियां होने की संभावना हो सकती है। 

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यदि आप और डॉक्टर 100% यह मानते हैं कि बच्चे को एंटीबायोटिक की जरूरत है तो बिना साइड इफेक्ट्स के उसे जल्दी ठीक होने में मदद के लिए कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें। 

एंटीबायोटिक का सही से उपयोग कैसे करें

एंटीबायोटिक आजकल बहुत आम हैं और शायद इसलिए हम भूल जाते हैं कि यह वह महत्वपूर्ण ड्रग्स है जिसके कई परिणाम होते हैं। इसलिए यदि आप बच्चे को सही समय पर और सही तरीके से यह दवा देती हैं तो उसे इसके कई फायदे मिलते हैं। बेबी को एंटीबायोटिक देने से पहले निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें; 

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  • बच्चा एंटीबायोटिक्स ले भी रहा हो तब भी हाइजीन बनाए रखें। हर एक्टिविटी करने के बाद व पहले विशेषकर खाना खाने से पहले बच्चे के हाथ जरूर धुलवाएं। यदि बच्चा दूध पीता है तो उसके लिए उपयोग किए जाने वाले हर एक बर्तन को स्टरलाइज करें।
  • वायरल इंफेक्शन, जैसे सर्दी या जुकाम होने पर बच्चे को बच्चे को एंटीबायोटिक न दें।
  • एंटीबायोटिक डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही देने चाहिए।
  • बच्चे की तबीयत ठीक होने के बाद भी एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स करना जरूरी है।
  • बाद के लिए खुद से एंटीबायोटिक या किसी भी दवा का उपयोग न करें।
  • इसे नाली या गार्बेज में न फेंकें।

यद्यपि यह काफी प्रभावी है पर इसका सही से उपयोग करने से बच्चे को सुरक्षा मिलती है और यह काफी सेफ भी है। बच्चे को एंटीबायोटिक प्रिस्क्राइब करने से पहले डॉक्टर उसका डायग्नोसिस करेंगे। आप डॉक्टर से एंटीबायोटिक से संबंधित सवाल पूछने से न घबराएं और इसके साइड इफेक्ट्स का सामना करने के लिए भी तैयार रहें। 

स्रोत 1: Health.Harvard
स्रोत 2: Healthychildren
स्रोत 3: Fatherly

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यह भी पढ़ें: 

शिशुओं के लिए प्रोबायोटिक्स – एक कंप्लीट गाइड
शिशुओं के लिए ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस)
बच्चों के लिए नेजल ड्रॉप्स – फायदे और साइड इफेक्ट्स

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