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इससे पहले कि आपके बच्चे का पहला दांत निकलना शुरू हो, उसे मसूड़ों की सुरक्षा और मुंह की सही देखभाल की जरूरत होती है। इसके लिए आप धीरे-धीरे मसूड़ों की सफाई से शुरुआत करें और जब बच्चे के दांत निकलने लगे, तो उनकी भी सही तरह से केयर करना जरूरी है। बेबी के गले में दर्द, लालिमा और खिंचाव महसूस होना आदि के लिए थ्रोट एग्जामिनेशन करना भी जरूरी होता है।
चाहे आपके बच्चे के दांत निकलना शुरू हो गए हो या न हुए हों, फिर भी बेहतर ओरल केयर का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। जन्म के तुरंत बाद, उसके मसूड़े, जीभ और तालू सही से विकसित हो जाते हैं और मसूड़ों की समस्या से बचने के लिए नियमित रूप से आपको उसके मसूड़ों की सफाई करनी चाहिए। जब बच्चे के दांत आने शुरू हो जाते हैं, तब और भी ज्यादा ठीक से डेंटल केयर की जरूरत होती है। किसी भी बैक्टीरियल ग्रोथ का पता लगाने के लिए आपको उसके मुंह की जांच करते रहना होगा और रूटीन के साथ ओरल हाइजीन बनाए रखना होगा।
जब बच्चे का पहला दांत मसूड़े से बाहर आने लगता है, तो उसे को दर्द और बेचैनी होती है। जिससे वो रोता है, परेशान करता है और चिड़चिड़ा हो जाता है। दर्द से राहत देने के लिए आप अपनी अंगुली से धीरे-धीरे उसके मसूड़ों पर मसाज करें या आप उसे चबाने के लिए भी कुछ दे सकती हैं, जैसे कि फ्रिज में रखी हुई चुसनी। हालांकि, अगर बेबी को बुखार है और बीमारी के कोई अन्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो इस विषय को लेकर डॉक्टर से सलाह लें।
बच्चे का पहला दांत आमतौर पर 6 महीने के बाद मसूड़ों से निकलना शुरू होता है और सभी दूध के दांत 6 महीने से तीन साल की उम्र के बीच निकल आते हैं। जैसे ही बच्चे के दांत निकलना शुरू होते हैं, आप उसके मुंह को साफ करने के लिए एक सॉफ्ट ब्रश वाला बेबी टूथब्रश यूज करें। बेबी के दांतों को दिन में दो बार सिर्फ पानी से या हर बार दूध पिलाने के बाद ब्रश करना चाहिए।
एक बार जब शिशु इतना बड़ा हो जाता है कि दूध के अलावा कोई अन्य तरल पदार्थ ले सकता है, तो दूध के बाद पानी सबसे अच्छा ऑप्शन माना जाता है। हाई शुगर ड्रिंक देने से बच्चे के दांतो में सड़न पैदा होती है, इसलिए इनसे बचना ही बेहतर रहेगा। साथ ही, आपको समय-समय पर उसे डेंटिस्ट के पास ले जाना चाहिए।
बच्चे चार से पांच साल की उम्र में अपने आप चूसने की आदत छोड़ देते हैं। यदि वे ऐसा करते हैं, तो उनके जबड़े का शेप प्रभावित नहीं होता है, लेकिन अगर वो इसे जारी रखते हैं, जैसे पैसिफायर या अंगूठा चूसना, तो यह समस्या पैदा कर सकता है जैसे:
इसके अलावा, बेबी की चूसने की आदत उसके बड़े हो जाने के बाद आपके लिए भी शर्मनाक हो सकती है। बेहतर होगा कि आप उसे ऐसा न करने दें और नजर रखें, इससे पहले कि वह इसका आदी हो जाए।
जब बच्चा सर्दी, फ्लू, मीजल्स, चिकन पॉक्स और क्रुप जैसी समस्या से पीड़ित होता है, तो उसके गले में दर्द या खिंचाव होता है। इससे बच्चे को असहज महसूस होता है और चिड़चिड़ापन, नींद न आना, भूख न लगना, मतली, नेक ग्लैंड में सूजन, बुखार, टॉन्सिल जैसी समस्याएं पैदा होती हैं और गंभीर मामलों में नाक से गाढ़ा खून भी आ सकता है। ऐसे केस में माता-पिता को तुरंत बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
अपने बेबी की ओरल हेल्थ का खयाल आपको उसके जन्म के बाद से शुरू कर देना चाहिए, ताकि आगे चलकर उसे दांतों और मसूड़ों से संबंधित कोई परेशानी न हो। आप शिशु को जो भी ओरल हाइजीन सिखाएंगी, वो आगे चलकर उसी को फॉलो करेगा।
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