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छोटे बच्चों में क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट

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जन्म के समय कभी-कभी कुछ बच्चों का ऊपरी होंठ दो भागों में बंटा हुआ होता है, इसे क्लेफ्ट लिप या कटे होंठ के नाम से जाना जाता है। जहां कुछ बच्चों के होंठ पर केवल एक छोटा सा निशान होता है, वहीं कुछ बच्चों में यह बड़ा और स्पष्ट दिख सकता है। आइए देखते हैं, कि छोटे बच्चों में क्लेफ्ट लिप के क्या कारण होते हैं और इसका इलाज कैसे किया जा सकता है। 

बच्चों में क्लेफ्ट लिप या क्लेफ्ट पैलेट का कोई निश्चित कारण नहीं है। शोधकर्ता कहते हैं कि इसके लिए वंशानुगत कारण और पर्यावरण की परिस्थितियां, दोनों ही जिम्मेदार हो सकती हैं। इसलिए बच्चा या तो परिवार के किसी सदस्य से विरासत में क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट पा सकता है या फिर यह गर्भावस्था के दौरान कुछ खास दवाओं के इस्तेमाल के कारण हो सकता है। 

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साथ ही, जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान शराब पीती हैं या स्मोक करती हैं या ड्रग्स लेती हैं, उनके बच्चों में क्लेफ्ट लिप जैसे जन्म दोषों का खतरा ज्यादा होता है। 

बच्चों में क्लेफ्ट लिप या क्लेफ्ट पैलेट के दोष का विकास, मां के गर्भ में ही हो जाता है। ऐसा भी माना जाता है, कि जब मां के गर्भ में विकास के दौरान सिर, चेहरे और खोपड़ी के कुछ हिस्से ठीक तरह से जुड़ नहीं पाते हैं, तब क्लेफ्ट लिप या पैलेट बन जाते हैं।

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क्लेफ्ट लिप या पैलेट की पहचान जन्म के बाद तुरंत ही हो जाती है। कुछ मामलों में यह गर्भावस्था के 18वें या 20वें सप्ताह में किए गए सेकंड लेवल स्कैन में भी दिख जाता है। 

कभी-कभी नवजात बच्चों में क्लेफ्ट पैलेट का पता बिल्कुल भी नहीं चल पाता है। यह तालू से ढका हुआ होता है। इसे सब-म्यूकस क्लेफ्ट पैलेट कहते हैं। जब बच्चा 3 से 5 साल का हो जाता है, तब जाकर ही इसका पता चल पाता है। ऐसे बच्चे जब बोलते हैं, तब उनकी आवाज नाक से निकली आवाज जैसी लगती है। ऐसे बच्चे मोमबत्ती बुझाने या स्ट्रॉ से पी पाने में भी सक्षम नहीं होते हैं। 

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क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट को केवल सर्जरी से ही ठीक किया जा सकता है। अगर आपके बच्चे को क्लेफ्ट लिप है, तो 2 से 3 महीने की उम्र में उसकी सर्जरी हो जानी चाहिए। अगर आपके बच्चे को क्लेफ्ट पैलेट है, तो उसकी सर्जरी 6 से 9 महीने की उम्र में होनी चाहिए। अगर आपके बच्चे को ये दोनों ही हैं, तो उसकी पहली सर्जरी 3 महीने की उम्र में और दूसरी सर्जरी 9 महीने की उम्र में होगी। इसके इलाज के लिए एक खास क्लेफ्ट टीम काम करेगी। इस टीम में, आमतौर पर क्लेफ्ट सर्जन, क्लेफ्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर और नर्स, स्पीच थैरेपिस्ट, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, बच्चों के डेंटिस्ट, हियरिंग स्पेशलिस्ट और पीडियाट्रिक ईएनटी सर्जन मौजूद होते हैं। 

अगर आपके बच्चे के मसूड़ों में भी क्लेफ्ट है, तो 9 से 11 साल की उम्र में उसे एक छोटे से ग्राफ्ट ऑपरेशन से गुजरना पड़ेगा। 

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क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट कैसे दिखते हैं?

जिस बच्चे को क्लेफ्ट लिप होता है, उसके ऊपरी होंठ में एक स्प्लिट (विभाजन) होता है। कुछ बच्चों में यह केवल एक छोटे से निशान के जैसा ही होता है, वहीं कुछ में यह एक बड़े से कट के समान दिखता है। 

वहीं दूसरी ओर क्लेफ्ट पैलेट में तालू पर एक स्प्लिट होता है। क्लेफ्ट पैलेट आमतौर पर तालू में एक छोटा सा गैप होता है, लेकिन अगर स्थिति गंभीर हो, तो तालू पूरी तरह से अलग हो सकती है। 

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क्लेफ्ट पैलेट क्लेफ्ट लिप के बिना भी स्वतंत्र रूप से हो सकता है। 

क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट किन्हें हो सकता है?

यह स्थिति हर साल लगभग 700 बच्चों को प्रभावित करती है। यह यूएस में बच्चों में होने वाली चौथी सबसे आम जन्मजात समस्या है। क्लेफ्ट की समस्या आमतौर पर एशियाई, लैटिन या नेटिव अमेरिकी वंश से आने वाले बच्चों में देखी जाती है। क्लेफ्ट लिप अधिकतर लड़कों में क्लेफ्ट पैलेट के बिना होता है, वहीं क्लेफ्ट पैलेट ज्यादातर लड़कियों में क्लेफ्ट लिप के बिना देखा जाता है। 

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क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट कैसे बनते हैं?

क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट गर्भावस्था के शुरुआती 6 से 8 सप्ताह के दौरान बनते हैं। इस दौरान बच्चे के ऊपरी जबड़े और मुंह की हड्डियां और टिशू एक साथ मिल जाते हैं और बच्चे के तालू और ऊपरी होंठ का निर्माण करते हैं। अगर ये हिस्से सामान्य रूप से नहीं मिल पाते हैं, तो क्लेफ्ट लिप या पैलेट बन जाता है। 

क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट का आकार अलग-अलग हो सकता है। जहां कुछ बच्चों में यह लगभग गायब होता है, वही कुछ बच्चों में यह बड़ा होता है और इससे दिक्कतें आ सकती हैं। 

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इसके कारण क्या होते हैं?

क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट के निश्चित कारणों की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसा माना जाता है, कि क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट, जींस में होने वाले बदलाव या जींस के कॉन्बिनेशन के कारण हो सकते हैं। न्यूबॉर्न बच्चों में क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट बनने में जो अन्य फैक्टर जिम्मेदार हो सकते हैं, वे इस प्रकार हैं:

  • गर्भावस्था के दौरान स्मोकिंग
  • गर्भधारण से पहले महिला में डायबिटीज की पहचान
  • गर्भवती होने के दौरान कुछ खास दवाओं का इस्तेमाल, खासकर एपिलेप्सी का इलाज करने वाली दवाएं

क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट के शिकार बच्चों को होने वाली समस्याएं

क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट से जुड़े लक्षण इस प्रकार हैं: 

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  • जिस बच्चे के तालू या होंठ में विभाजन होता है, उसे खाने में समस्याएं आती हैं। खाना और तरल पदार्थ मुंह से नाक में चले जाते हैं। बाजार में विशेष रूप से बनाए गए बॉटल और निप्पल उपलब्ध होते हैं, जो आपके बच्चे को खाने में मदद करते हैं। जिन बच्चों के तालू में विभाजन होता है, उन्हें बेहतर तरीके से खाने और पीने में मदद के लिए मानव निर्मित तालु पहनना पड़ सकता है।
  • क्लेफ्ट पैलेट के शिकार बच्चों को सुनने में भी दिक्कतें आ सकती हैं।
  • बोलने के दौरान नाक की आवाज भी क्लेफ्ट पैलेट के लक्षणों में से एक है।
  • क्लेफ्ट पैलेट के शिकार बच्चों में कैविटी और गलत तरीके और गलत जगह पर दांतों के उगने की समस्या भी देखी जा सकती है।

जांच और पहचान

जैसा कि पहले बताया गया है, गर्भावस्था के 18वें या 20वें सप्ताह में किए गए सेकंड लेवल के अल्ट्रासाउंड में क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट की पहचान हो सकती है या फिर इसकी पहचान बच्चे के जन्म के बाद भी हो सकती है। इसलिए इसका पता या तो स्कैन के समय चल जाता है, जो कि दुर्लभ है, या फिर जन्म के बाद तुरंत दिख जाता है। 

छोटे बच्चों में क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट के विकास की संभावना को बढ़ाने वाले खतरे

बच्चे में क्लेफ्ट लिप या क्लेफ्ट पैलेट के खतरे को बढ़ाने वाले कुछ फैक्टर इस प्रकार हैं: 

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  • गर्भावस्था के दौरान जिन मांओं को स्मोकिंग, ड्रिंकिंग या नशीली दवाओं के सेवन की आदत होती है, उनके बच्चे आमतौर पर क्लेफ्ट के साथ ही जन्म लेते हैं। ये आदतें आमतौर पर प्रेगनेंसी के पहले या दूसरे सप्ताह के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंचाती हैं।
  • साथ ही जो मांएं प्रेगनेंसी के दौरान सीजर/एंटीकनवल्जेट, एक्यूटेन और मैथोट्रेक्जेट युक्त एक्ने की दवाएं या कैंसर, अर्थराइटिस और सोरायसिस का इलाज करने वाली दवाएं लेती हैं, उनके बच्चों में क्लेफ्ट होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है।

क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट के साथ जटिलताएं

जिन बच्चों में क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट की समस्या होती है, उनमें कुछ कॉम्प्लिकेशन भी हो सकते हैं और सही इलाज के द्वारा इसका ध्यान रखा जा सकता है। क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट से होने वाली समस्याएं, हर बच्चे में अलग-अलग हो सकती है। इनमें से सबसे आम समस्याएं इस प्रकार हैं:

  • क्लेफ्ट पैलेट होने से सुनने में गंभीर दिक्कतें आ सकती हैं। अगर इस समस्या का इलाज समय पर न किया जाए, तो क्लेफ्ट पैलेट के कारण कान में संक्रमण हो सकता है, जिससे सुनने की क्षमता जा सकती है।
  • क्लेफ्ट लिप या पैलेट से ग्रस्त बच्चों में बोलने से संबंधित समस्याएं भी देखी जाती है। उनकी बात को समझना मुश्किल होता है और कुछ मामलों में उनकी आवाज नाक से निकली आवाज सुनाई देती है।
  • क्लेफ्ट से ग्रस्त बच्चों में दूसरे बच्चों की तुलना में कैविटी की समस्या बहुत अधिक होती है। कुछ बच्चों में दांतों का कम होना, दांतों का अधिक होना, दांतों की बनावट में खराबी या गलत जगह पर दांतो के उगने की समस्याएं भी देखी जाती है। क्लेफ्ट पैलेट से ग्रस्त बच्चों में दांतों की गंभीर दिक्कतें भी देखी जाती हैं। उन्हें अल्वेओलर रिज डिफेक्ट हो सकता है। अल्वेओलर रिज डिफेक्ट से ग्रस्त बच्चों में गलत जगह पर दांत, नुकीले या आड़े-टेढ़े परमानेंट दांतों की समस्या हो सकती है। इससे परमानेंट दांत आने में या अलवेओलस नामक ऊपरी मसूड़े के बनने में रुकावट आ सकती है।

क्लेफ्ट का इलाज कौन कर सकता है?

ऐसी एक खास और डेडिकेटेड मेडिकल टीम होती है, जो कि क्लेफ्ट का इलाज करने के लिए विशेष रूप से काम करती है 

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  • एक क्लेफ्ट सर्जन, जो होंठ और तालू की जरूरी सर्जरी करते हैं।
  • खास क्लेफ्ट डॉक्टर और नर्स जो कि समस्या को खत्म करने में मदद करते हैं।
  • आंख-नाक-गले के डॉक्टर जो कि सुनने संबंधित समस्या की जांच करते हैं या इलाज करते हैं।
  • एक ओरल सर्जन, जो कि ऊपरी जबड़े का ऑपरेशन करते हैं और मसूड़ों के स्प्लिट को ठीक करते हैं।
  • एक ऑर्थोडॉन्टिस्ट जो दांतों की पोजीशन को ठीक करते हैं।
  • एक प्रोस्थोडॉन्टिस्ट जो नकली दांत और दांत की दूसरी एक्सेसरीज बनाते हैं, ताकि वह अच्छी तरह से  काम कर सके।
  • एक स्पीच थैरेपिस्ट, जो कि बोलने और खाने संबंधी समस्याओं पर काम करते हैं।
  • एक हियरिंग स्पेशलिस्ट या ऑडियोलॉजिस्ट, जो कि सुनने की शक्ति को मॉनिटर करते हैं।
  • एक क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, जो बच्चे और परिवार को काउंसलिंग की मदद से इसकी गंभीरताओं से बाहर निकलने में मदद करते हैं।

क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट का इलाज

क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट का इलाज केवल सर्जरी द्वारा ही हो सकता है। क्लेफ्ट लिप के इलाज के लिए दो बार सर्जरी करनी पड़ती है। पहली सर्जरी बहुत ही हल्के एनेस्थीसिया के साथ बच्चे के 3 महीने के होने पर की जाती है। दूसरी सर्जरी तब की जाती है, जब बच्चा 9 से 12 महीने का हो जाता है। 

क्लेफ्ट पैलेट का इलाज 18 साल की उम्र तक किया जा सकता है, जिसमें कई सर्जरी शामिल होती हैं और अल्ट्रासाउंड समय-समय पर किया जाता है, ताकि अगले कदम का निर्धारण किया जा सके। एक फंक्शनल पैलेट बनाने के लिए पहली सर्जरी आमतौर पर तब की जाती है, जब बच्चा 6 से 12 महीने का होता है। यह सर्जरी मिडल ईयर को संक्रमित होने से भी बचाती है और दांतों और हड्डियों के सही विकास में मदद करती है। क्लेफ्ट पैलेट की दूसरी सर्जरी लगभग 8 साल की उम्र के दौरान होती है। इसे ऊपर के मसूड़े को भरने के लिए किया जाता है, ताकि परमानेंट दांत के स्ट्रक्चर को सपोर्ट मिल सके। एक बार जब परमानेंट दांत बन जाते हैं, तो उन्हें सीधा करने के लिए ब्रेसेस लगाए जाते हैं। 

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क्लेफ्ट लिप से ग्रस्त बच्चों के अन्य ऑपरेशन होठों और नाक की बनावट, नाक और मुंह के बीच की छोटी ओपनिंग, और जबड़ों की कतार को ठीक करने के लिए किए जा सकते हैं। इन शुरुआती सर्जरी से होने वाले निशानों को हटाने के लिए किशोरावस्था के दौरान एक आखिरी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। 

क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट से ग्रस्त बच्चे के लिए दांतों की देखभाल

जैसा कि ऊपर बताया गया है, जिन बच्चों को क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट की समस्या होती है, उनमें दांतों से संबंधित समस्याएं भी देखी जाती हैं, जिसमें अत्यधिक देखभाल और करीबी देखरेख की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन दांतों से जुड़ी देखभाल की मुख्य आदतें दूसरे बच्चों की तरह ही होती हैं। 

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दांतों की देखभाल की शुरुआती आदतों में स्वस्थ दांतों के लिए सही सफाई, अच्छे पोषण और फ्लोराइड ट्रीटमेंट शामिल होते हैं। क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट से ग्रस्त बच्चों को आमतौर पर एक टूथेट के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है। यह एक ऐसा माउथवॉश होता है, जिसके हैंडल पर एक स्पंज लगा होता है। इसका इस्तेमाल दांतों को साफ करने के लिए किया जाता है, क्योंकि क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट से ग्रस्त बच्चों के दांतों का आकार अनियमित होने के कारण सामान्य मुलायम ब्रश क्लेफ्ट से ग्रस्त बच्चों के लिए काम नहीं कर सकते हैं। 

ऐसे बच्चों को परमानेंट दांतों की सही कतारों और जबड़े के उचित विकास के लिए ऑर्थोडॉन्टिक इलाज से गुजरना पड़ता है। 

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ऐसे बच्चों के लिए प्रोस्थोडॉन्टिक कंसल्टेशन भी जरूरी होता है। बच्चे की जरूरतों को समझने के लिए और बच्चे की समस्या के अनुसार डेंटल ब्रिज, स्पीच बल्ब या पैलेट लिफ्ट्स बनाने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है। प्रोस्थोडॉन्टिस्ट एक ओरल सर्जन, प्लास्टिक सर्जन और स्पीच पैथोलॉजिस्ट के साथ मिलकर समस्या को ठीक करते हैं। 

क्लेफ्ट लिप और क्लेफ्ट पैलेट से ग्रस्त बच्चे को ब्रेस्टफीड कैसे कराना चाहिए?

जहां क्लेफ्ट लिप से ग्रस्त बच्चों को सर्जरी के पहले भी ब्रेस्टफीड कराया जा सकता है, वहीं क्लेफ्ट पैलेट से ग्रस्त बच्चों को ब्रेस्टफीडिंग में दिक्कतें आती हैं और उन्हें क्लेफ्ट से ग्रस्त बच्चों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए बोतल और निप्पल की जरूरत पड़ सकती है, जो कि आजकल बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं। ऐसे में आपको ब्रेस्टमिल्क निकाल कर बोतल में डालकर बच्चे को देना पड़ेगा। 

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क्लेफ्ट से ग्रस्त बच्चों को ब्रेस्टफीड कराने के लिए माँओं को विभिन्न ब्रेस्टफीडिंग पोजीशन आजमाने की जरूरत पड़ेगी, जहां यह पोजीशन क्लेफ्ट लिप से ग्रस्त बच्चों पर काम करेगी, वहीं क्लेफ्ट पैलेट से ग्रस्त बच्चों पर यह काम नहीं करेगी। आगे चलकर डॉक्टर आपके बच्चे को बेहतर रूप से खाने के लिए मानव निर्मित तालू पहनने की सलाह दे सकते हैं। 

क्या इससे बचने का कोई तरीका संभव है ?

गर्भावस्था के दौरान एक स्वस्थ जीवन शैली और खानपान की अच्छी आदतों को अपनाने से बच्चों में क्लेफ्ट लिप की समस्या से बचा जा सकता है। गर्भवती होने पर किसी भी तरह की दवाओं, शराब, सिगरेट और ड्रग्स के इस्तेमाल से बचें। गर्भावस्था के दौरान सावधानी के केवल यही मापदंड संभव हैं। 

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अपने बच्चे की मदद कैसे करें?

जिन बच्चों को क्लेफ्ट की समस्या होती है, उनकी छवि के कारण कभी-कभी उन्हें टीजिंग या बुलिंग का सामना करना पड़ता है। अपने बच्चे को आत्मविश्वास से भरे रहने के लिए प्रोत्साहित करें। इस बात का ध्यान रखें कि घर पर मौजूद हर व्यक्ति सपोर्टिव हो, बच्चे के साथ अच्छा व्यवहार करे और सच्चाई को अपनाए। अपने बच्चे को खेलकूद, संगीत, और दूसरी एक्टिविटीज में शामिल करें। आप चाहें, तो उसके टीचर से भी बात कर सकते हैं और उसके क्लासमेट के साथ एक सेशन कर सकते हैं, जिसमें आप क्लेफ्ट और इसके साथ आने वाली चुनौतियों के बारे में संक्षेप में बता सकते हैं। ऐसा करने के दौरान एक मेडिकल प्रैक्टिशनर की मदद भी लें। 

कई सर्जरी और डॉक्टर्स के साथ नियमित परामर्श के कारण, क्लेफ्ट से ग्रस्त बच्चे बार-बार स्कूल मिस कर देते हैं और अच्छी तरह से पढ़ाई कर पाने में कठिनाई महसूस करते हैं। पर याद रखें, क्लेफ्ट से ग्रस्त बच्चे भी स्वस्थ और खुश वयस्क बन सकते हैं। उन्हें केवल आपके प्यार, सहयोग और अपनेपन की जरूरत है। 

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पूजा ठाकुर

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