डिलीवरी के बाद पेट में दर्द – कारण और उपचार

गर्भावस्था के बाद पेट दर्द

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गर्भावस्था के दौरान तरह-तरह के दर्द से पीड़ित सभी महिलाएं यह सोच कर निश्चिंत हो जाती हैं कि गर्भावस्था पूर्ण होने के बाद उन्हें कोई भी दर्द नहीं होगा। तथापि कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के बाद भी पेट में दर्द होता है। यदि उन महिलाओं में आप भी शामिल हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गर्भावस्था के बाद पेट का दर्द शरीर के वापस सामान्य स्थिति में आने का संकेत है। फिर भी आपको गर्भावस्था के बाद पेट में दर्द की पूरी जानकारी होना आवश्यक है, प्रसव के बाद पेट में दर्द के कारण, उपचार आदि जानने के लिए इस लेख को पढ़ें।

प्रसव के बाद पेट में दर्द के कारण

गर्भावस्था के दौरान महिलाएं कई असुविधाओं का अनुभव करती हैं परन्तु कुछ महिलाओं को प्रसव के बाद भी दर्द सहना पड़ सकता है। गर्भावस्था के बाद पेट में दर्द के निम्नलिखित कारण हैं;

1. प्रसवोत्तर दर्द

प्रसव के ठीक बाद गर्भाशय खाली हो जाने से सिकुड़ कर अपने पहले के आकार में आने लगता है। ऐसा होने से महिला के पेट में ऐंठन महसूस होती है जिसे प्रसवोत्तर दर्द कहा जाता है। यह दर्द शिशु के जन्म के ठीक बाद शुरू होता है और अगले कुछ दिनों तक बना रहता है क्योंकि गर्भाशय को अपने मूल आकार में वापस आने में लगभग 6 सप्ताह लग जाते हैं। शिशु को स्तनपान कराने से इस दर्द में अधिक वृद्धि होने की संभावना हो सकती है। जो माएं पहली बार बच्चे को जन्म दे रही हैं, उन्हें अन्य मांओं की तुलना में इस दौरान कम दर्द होता है क्योंकि उनके गर्भाशय की मांसपेशियां अभी तक मजबूत होती हैं जब कि पहले जन्म दे चुकी मांओं में ऐसा नहीं होता है।

2. कब्ज के कारण पेट में दर्द

कई महिलाओं को प्रसव के बाद कब्ज की समस्या हो जाती है। पेट की मांसपेशियों की अत्यधिक गतिविधियों से पीड़ा होती है, पेट साफ होने में तकलीफ और कब्ज की समस्या के साथ-साथ पेट अत्यधिक भरा हुआ लगता है। महिलाओं में इस स्थिति के कारण भी उनके पेट में दर्द होता है।

गर्भावस्था के बाद पेट में दर्द प्रोजेस्ट्रोन के स्तर में वृद्धि, पाइल्स की समस्या, योनि (वजाइना) के फटने, प्रसव के बाद कोई शारीरिक गतिविधि न होने के कारण होता है। अनेस्थेटिक, हाईड्रोकोडोने और अन्य दवाएं कब्ज को ठीक करने में मदद कर सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान कब्ज होने की तुलना में यह कम समय के लिए होता है।

3. सी-सेक्शन के ठीक होने की प्रक्रिया के दौरान दर्द

सिजेरियन प्रसव भी अपने साथ दर्द लेकर आता है, जिसमें आमतौर पर ठीक होने की प्रक्रिया के दौरान चीरे और आंतरिक घावों के आसपास दर्द होता है। डॉक्टर द्वारा दी हुई सलाह अनुसार नियमित दवाएं लेने और अधिक आराम करने से यह दर्द जल्द ही ठीक हो सकता है।

प्रसव के बाद पेट दर्द कब तक रहता है

प्रसव के बाद का दर्द इस बात पर निर्भर करता है कि गर्भवती महिला ने किस प्रकार के प्रसव द्वारा शिशु को जन्म दिया है। यदि महिला का प्रसव सामान्य होता है, तो प्रसव होने के कुछ हफ्तों बाद इसके कारण होने वाले ज्यादातर दर्द ठीक हो जाते हैं। श्रोणि में दर्द के साथ-साथ अत्यधिक दबाव महसूस होता है और ऐसा लगता है कि गर्भाशय बाहर ही आ जाएगा किंतु निश्चिंत रहें ऐसा कुछ भी नहीं होगा।

प्रसव के बाद पेट दर्द कब तक रहता हैमहिला ने यदि सिजेरियन प्रसव करवाया है, तो भी दर्द कुछ हफ्तों के भीतर दूर हो जाता है। हालांकि कुछ दर्द या बेचैनी इसके बाद भी रह सकती है। इस दौरान महिला का स्वास्थ्य इतिहास इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जैसे पहले किए गए सिजेरियन की संख्या, लंबी प्रसव प्रक्रिया या प्रसव में जटिलताएं। थोड़ी सी पीड़ा भी अत्यधिक दर्द का अनुभव देती है इसलिए विभिन्न महिलाओं की अलग-अलग क्षमताओं के अनुसार ही इस दर्द को ठीक होने में समय लगता है।

प्रसव के बाद होने वाले पेट दर्द का उपचार

प्रसव के बाद महिला के पेट में दर्द ज्यादातर उसके शारीरिक बदलाव, वजन और आंतरिक बदलाव व गतिविधियों के कारण होता है जो समय के अनुसार ठीक हो सकता है। यह दर्द जब तक ठीक नहीं हो जाता है आप इसके उपचार के लिए दर्द निवारक गोलियां, जैसे आइबुप्रोफेन या पैरासिटामॉल ले सकती हैं। पेट के दर्द में आराम के लिए आप नर्म रजाई का उपयोग या गर्म सिकाई कर सकती हैं। किसी भी प्रकार की दवाई का उपयोग डॉक्टर की सलाह अनुसार ही करें। यह मुख्य रूप से इसलिए है क्योंकि इस दौरान माँ जिस भी चीज का सेवन करती है वह शिशु द्वारा स्तनपान के दौरान उसके शरीर में भी जा सकता है। कई महिलाएं इस दर्द से राहत पाने के लिए प्राणायाम और आरामदायक व्यायाम करती हैं जिसे प्रसव के दौरान भी करने की सलाह दी जाती है।

प्रसव के बाद पेट में दर्द के घरेलू उपचार

प्रसव के बाद पेट में दर्द होने के कुछ उपचार नीचे दिए हुए हैं, आइए जानते हैं;

1. ताजा पुदीना

पेट में दर्द और ऐंठन तकलीफदेह हो सकती है और आपको अधिक पीड़ा का अनुभव हो सकता है। यदि आपके पेट की मांसपेशियों या आंतों में दर्द होता है, तो पुदीना आपकी समस्या को हल करने में मदद कर सकता है। पुदीने में मौजूद दर्द निवारक गुण आपके दर्द को कम करने के साथ-साथ कब्ज की संभावना को भी कम कर सकते हैं। पुदीने की पत्तियों को पानी में उबालें और इसमें कुछ बूंदें नींबू के रस की मिलाएं। इस मिश्रण को दिन में दो बार पीने से पेट के दर्द में राहत मिलती है।

2. शहद

कई बार संक्रमण के कारण पेट में अत्यधिक ऐंठन हो सकती है और यदि इसके साथ पेट में सूजन व योनि से रक्त स्राव होता है तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने की आवश्यकता है। इसमें कुछ समय के लिए राहत हेतु आप शहद का सेवन कर सकती हैं, शहद के एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण आपकी मदद कर सकते हैं। शहद और नींबू के रस की कुछ बूंदों को गुनगुने पानी में डालकर अच्छी तरह से मिलाएं और पी लें, इससे आपका पेट शांत रहने में मदद मिलती है।

3. नींबू

प्रसव के बाद महिलाओं का शरीर कमजोर हो जाता है और उनके इम्यून सिस्टम के दोबारा निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसके साथ ही पाचन तंत्र भी सभी परिवर्तनों के साथ वापस साधारण स्थिति में आना शुरू कर देता है। दर्द को कम करने और वापस सामान्य स्थिति में आने के लिए संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार लाना आवश्यक है।इसके उपचार के लिए आप अपने आहार में ज्यादा से ज्यादा विटामिन ‘सी’ का सेवन करके सभी प्रणालियों का सुधार कर सकती हैं। इसके उपचार के लिए गुनगुने पानी में नींबू की कुछ बूंदें मिलाकर पीने से पेट में आराम मिलने के साथ-साथ दर्द से उबरने के लिए आवश्यक मिनरल भी मिलते हैं।

4. गुनगुने पानी से स्नान

गर्भाशय और पेट के आसपास दर्द में गर्म सिकाई से अत्यधिक आराम मिलता है। किंतु यदि पेट में दर्द के उपचार के लिए आप गुनगुने पानी से स्नान करती हैं तो आपके पूर्ण शरीर के दर्द में राहत मिलने के साथ-साथ आपको आंतरिक सुकून मिलता है। दिनभर में लगभग 2 बार आप शरीर को कुछ देर के लिए गुनगुने पानी में डुबाकर रखें इससे आपको भरपूर आराम मिल सकता है।

गुनगुने पानी से स्नान

5. हल्दी वाला दूध

माँ के कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण प्रसव के बाद संक्रमण की संभावना हमेशा उच्च स्तर पर होती है। इस तरह के संक्रमण के परिणामस्वरूप पेट में दर्द भी हो सकता है । इस समस्या का इलाज करके संक्रमण और पेट दर्द दोनों का उपचार करना अनिवार्य है। महिलाओं में इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए प्राकृतिक एंटीबायोटिक एक बेहतर विकल्प है। घर में सरलता से पाए जाने वाले प्राकृतिक एंटीबायोटिक के रूप में आप हल्दी का उपयोग कर सकती हैं। एक चम्मच हल्दी पाउडर को एक गिलास गुनगुने दूध में मिलाकर पीने से शारीरिक संक्रमण को खत्म करने में मदद मिलती है साथ ही पेट के दर्द में राहत भी मिलती है।

6. सौंफ

प्रसव के बाद शारीरिक परिवर्तन के कारण अक्सर महिलाओं को उनके कूल्हों में दर्द और सूजन की शिकायत होती है। सौंफ में मौजूद एनॉलजेसिक गुणों के कारण सूजन को कम करने में मदद मिलती है। कई महिलाएं गर्भवस्था के बाद मतली और उल्टी के लिए भी सौंफ खाना पसंद करती हैं। सौंफ को पानी में उबालें और छानकर, शहद मिलाकर दिनभर में चाय की तरह 2 बार पिएं, इससे आपको दर्द में राहत मिल सकती है।

7. अदरक

आयुर्वेद में उपयोग की जाने वाली हर एक सामग्री पेट के विकारों को ठीक करने में सक्षम है। इनमें से एक अदरक भी है। एंटीसेप्टिक गुणों वाली अदरक दर्द में आराम देने के साथ-साथ, आपकी भावनात्मक स्थिरता और मनोदशा में सुधार लाने में मदद करती है। अदरक को कद्दूकस करके पानी में उबाल लें और इसमें अजमोद (पार्सले) की पत्तियां पीसकर डालें और थोड़ा सा शहद भी मिला लें। औषधीय गुणों वाला यह पेय आपके स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन है। इससे पेट की ऐंठन, दर्द तो खत्म होती ही है और साथ ही यह स्वादिष्ट भी होता है।

8. चावल का पानी

चावल पका लेने के बाद बचा हुआ पानी पेट की समस्याओं के लिए कमाल का उपचार है। यह पेट की आंतरिक परतों पर एक चिकना आवरण बना देता है जिससे पेट का दर्द बेहद कम हो जाता है। यह महिलाओं में पाचनशक्ति को बेहतर बनाता है और कब्ज के साथ-साथ मूत्र में रक्त स्राव को भी कम करता है। चावल पकाते समय भरपूर पानी डालें ताकि आप पर्याप्त मात्रा में उसका पका हुआ पानी पी सकें।

9. गर्म सेंक (वार्म कंप्रेस)

प्रसव के बाद पेट की मांसपेशियों में फैलाव व संकुचन के कारण अत्यधिक ऐंठन होती है। ऐसे में पेट की संवेदनशीलता बढ़ती है और निचले हिस्से में दर्द भी होता है। पेट में दर्द के लिए वार्म कंप्रेस का उपयोग करने से महिलाओं को राहत मिलती है। सिकाई की गर्माहट रक्त प्रवाह में वृद्धि करती है जिससे गर्भाशय में हल्कापन महसूस होता है। जब भी आपको पेट में तेज दर्द होता है तो एक कपड़े को लपेटकर हल्का गर्म करें या फिर गर्म पानी की थैली का उपयोग करके अपने पेट की सिकाई करें।

गर्म सेंक

प्रसव के बाद पेट दर्द में आराम के लिए कुछ सुझाव

1. बार-बार पेशाब करें

पेशाब को अधिक देरी तक न रोकें और थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल में अपना मूत्राशय खाली करती रहें। जितना ज्यादा हो सके उतना ज्यादा पेशाब करने जाएं। भरे हुए मूत्राशय से आपको अत्यधिक असुविधा हो सकती है और आपके पेट की ऐंठन बढ़ सकती है। लगातार पेशाब जाने से आपको दर्द और ऐंठन से राहत मिल सकती है।

2. तेल से मालिश करें

नारियल तेल या बादाम के तेल से अपने पेट की मालिश करें। पेट पर हल्का दबाव दर्द और ऐंठन में आराम देता है। आप इस तेल में लैवेंडर या पुदीना का एसेंशियल ऑइल भी मिला सकती हैं जो अपने दर्द निवारक गुणों के लिए जाने जाते हैं।

3. पेट के बल सोएं

गर्भावस्था के दौरान पेट के बल न सोने की सलाह दी जाती है किंतु गर्भावस्था के बाद ऐसा करने में कोई हानि नहीं होगी। पेट के बल सोने से आपको पेट के दर्द में आराम मिल सकता है। दबाव को बढ़ाने के लिए पेट के बल लेटकर निचली तरफ तकिया लगा लें, इससे भी ऐंठन में आराम मिलता है।

4. ध्यान और गहरी सांसों का अभ्यास करें

गर्भावस्था के बाद पेट में दर्द को कम करने में ध्यान (मेडिटेशन) और गहरी सांस लेने का अभ्यास बेहतर उपचार हो सकता है। खुद को शांत रखने के लिए ध्यान और दर्द से मुक्ति के लिए गहरे श्वसन का अभ्यास करें।

डॉक्टर से सलाह कब लें

  • सी-सेक्शन के बाद टाँकों के आसपास का क्षेत्र लाल होने पर।
  • बुखार होने और दर्द बढ़ने पर।
  • योनि से रक्तस्राव में वृद्धि और रक्त का रंग गाढ़ा लाल होने पर।
  • यदि आपके पेट और कमर, दोनों ही हिस्सों में अत्यधिक संवेदनशीलता महसूस होती है।
  • गंभीर रूप से मतली और उल्टी होने पर।

ज्यादातर महिलाएं प्रसव के बाद पेट के निचले हिस्से में दर्द का अनुभव करती हैं, उन्हें अपने स्वास्थ्य के लिए सही उपचार और कुछ सावधानियां बरतने की आवश्यकता होती है। यह जानना आवश्यक है कि आमतौर पर प्रसव के बाद शरीर सामान्य स्थिति में वापस आने पर कुछ हफ्तों में पेट का दर्द खत्म हो जाता है।