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हाइपरलैक्टेशन – कारण, लक्षण और उपचार

एक नई माँ के लिए स्तनपान यानी ब्रेस्टफीडिंग कराना सबसे बड़ी खुशी में से एक होता है। अब जब आपने मातृत्व को स्वीकार कर लिया है, तो आपको अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए उत्सुकता और घबराहट दोनों ही जरूर होगी। आप अपने बच्चे को हर चीज सबसे बेस्ट देना चाहती हैं और सबसे अच्छी शुरुआत माँ के दूध से होती है। लेकिन स्तनपान और माँ के दूध का उत्पादन आसान नहीं होता है। ऐसे में कुछ महिलाओं को बच्चे के लिए पर्याप्त दूध का उत्पादन करने में कठिनाई होती है, वहीं कुछ ऐसी महिलाएं भी हैं जो बहुत अधिक उत्पादन कर सकती हैं। इस स्थिति को हाइपरलैक्टेशन कहा जाता है। यदि माँ के दूध का उत्पादन जरूरत से ज्यादा है, तो इसके कारणों और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है, यह जानने के लिए इस आर्टिकल को आगे पढ़ें। 

हाइपरलैक्टेशन सिंड्रोम क्या है?

हाइपरलैक्टेशन सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसके कारण महिला के शरीर में ब्रेस्ट मिल्क का अधिक उत्पादन होता है। जिसकी वजह से महिला का ब्रेस्ट मिल्क बहुत तेजी से और बड़ी मात्रा में निकलता है। कभी-कभी, ब्रेस्ट में दूध जितना होना चाहिए उससे अधिक होने पर बाहर रिसना शुरू कर देता है। यह समस्या बेबी को ठीक से ब्रेस्टफीड कराने में मुश्किलें पैदा कर देती है।

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ब्रेस्ट मिल्क का उत्पादन और दूध पिलाने का एक सही लेवल माँ और बच्चे दोनों के लिए यह जानने का एक अच्छा संकेत है कि बच्चे को पर्याप्त दूध मिल रहा है और माँ का शरीर भी सही मात्रा में दूध का उत्पादन कर रहा है। अत्यधिक उत्पादन से आपको यह विश्वास हो सकता है कि आपके बच्चे को पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं मिल रहा है या दूध के तेज उछाल से आपके बच्चा स्तनपान करने से भी मना कर सकता है।

ओवर सप्लाई सिंड्रोम के कारण क्या हैं?

सभी महिलाओं को हाइपरलैक्टेशन सिंड्रोम जैसी कंडीशन का सामना नहीं करना पड़ता है, लेकिन जो लोग करती हैं उनको अलग-अलग कारकों के कारण इसका अनुभव करना पड़ता हैं। ओवरसप्लाई सिंड्रोम होने के लिए जिम्मेदार कुछ संभावित कारक(पोटेंशियल फैक्टर) हैं:

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1. हार्मोन का असंतुलन

दूध का उत्पादन होना हार्मोन का ही एक परिणाम है जो आपके स्तनों में दूध के उत्पादन के लिए आवश्यक ग्रंथियों को उत्तेजित करता है। इन हार्मोन के स्तर में किसी भी तरह के बदलाव से दूध का अधिक उत्पादन होता है। कुछ मामलों में, यह दवाओं का एक साइड इफेक्ट भी हो सकता है, जो हार्मोन के स्तर को प्रभावित करती हैं। साथ ही पिट्यूटरी ग्लैंड आवश्यकता से अधिक हार्मोन छुपा सकती है, जिससे हाइपरलैक्टेशन की स्थिति पैदा हो जाती है।

2. दूध की अधिक मांग

स्तनपान की प्रक्रिया काफी हद तक बाहरी परिस्थितियों से मिलने वाले फीडबैक पर निर्भर करती है। जैसे ही स्तनपान शुरू होता है और न्यूबॉर्न बेबी चूसना शुरू करता है, उससे महिला का शरीर दूध की मांग को समझने लगता है और उस मात्रा में दूध का उत्पादन करता है जितनी जरूरत होती है।

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हालांकि, यदि आप अपने ब्रेस्ट मिल्क को बोतल के जरिए रात में या जब आप काम पर हों, पंप करके निकालना चाहती हैं, तो इससे आपका शरीर भ्रमित हो जाता है कि बच्चे को कितने दूध की आवश्यकता है। दूध की बढ़ती मांग को देखते हुए, शरीर हाई गियर में बदल जाता है और जरूरत से ज्यादा दूध का उत्पादन करने लगता है, जिससे हाइपरलैक्टेशन जैसी समस्या पैदा हो जाती है।

3. एल्वियोली ग्रंथियों की संख्या

वे ग्रंथियां जो ब्रेस्ट में दूध का उत्पादन करती हैं और उसे निप्पल तक ले जाने से पहले और बेबी तक पहुंचने से पहले स्टोर करती हैं, उन्हें एल्वियोली ग्लैंड्स या ग्रंथियां कहा जाता है। ब्रेस्टफीड कराने वाली महिला में एल्वियोली ग्रंथियों की औसत संख्या लगभग 1 लाख या उससे अधिक होती है। हाइपरलैक्टेशन सिंड्रोम से पीड़ित महिलाओं के लिए ये ग्रंथियां 3 लाख तक पहुंच जाती हैं, जिसके कारण अधिक दूध का उत्पादन होता है।

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4. गैलेक्टागोग का अधिक प्रयोग

गैलेक्टागोग एक प्रकार का खाद्य पदार्थ या दवाएं हैं जो माँ के दूध को बढ़ाने में मदद करती हैं। यदि आप ब्रेस्ट मिल्क उत्पादन को स्टिम्युलेट करने और दूध की आपूर्ति बढ़ाने के लिए गैलेक्टागॉग ले रही हैं क्योंकि आप इससे पहले कठिनाइयों का सामना कर रही थी, तो वे निश्चित रूप से ब्रेस्ट मिल्क उत्पादन’ से संबंधित चिंताओं को हल करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन यदि आप इसे ज्यादा इस्तेमाल करती हैं, तो इसके अधिक सेवन से हाइपरलैक्टेशन होता है।

हाइपरलैक्टेशन के लक्षण

यह समझने के लिए कि क्या आप हाइपरलैक्टेशन सिंड्रोम से पीड़ित हैं, तो ऐसे में आप दूध के अधिक होने के लक्षणों की अच्छे से जांच करें, जो आपको किसी सही निष्कर्ष पर पहुंचने में मदद करते हैं। ये लक्षण माँ और बच्चे दोनों में देखे जाते हैं।

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1. माँ में हाइपरलैक्टेशन के लक्षण

  • माँ के लिए, पहला और सबसे स्पष्ट लक्षण अत्यधिक भरे हुए और भारी ब्रेस्ट होते हैं। यहां तक ​​कि इससे मैस्टाइटिस या डक्ट ब्लॉक होने की संभावना भी हो सकती है।
  • ऐसे में महिला के स्तनों में सूजन होती है, जिसके थोड़ी देर बाद दर्द शुरू हो जाता है, जिसके कारण दूध बाहर निकलने लगता है और ब्रा गीली हो जाती है। एक स्तन से दूध पिलाते समय, दूसरे स्तन से भी दूध का रिसाव शुरू हो जाता है।
  • आमतौर पर दूध उत्पादन और बच्चे की मांग का यह बेमेल ज्यादातर माओं में पहले कुछ हफ्तों में या शायद एक और सप्ताह में देखा जाता है। उसके बाद अधिकतर महिलाएं अपने दूध की आपूर्ति को सही स्तर पर नियंत्रित कर पाती हैं।

2. बच्चे में हाइपरलैक्टेशन के लक्षण

  • ज्यादातर बच्चे दूध के अतिरिक्त फ्लो पर शायद ही कभी प्रतिक्रिया देते हैं क्योंकि उन्हें इसकी जरूरत हो सकती है। लेकिन अगर दूध बहुत तेजी से निकलने लगे, तो बच्चा अपने मुंह को दूर करता है या फिर ब्रेस्ट से दूर हो जाता है। कुछ बच्चे फ्लो को रोकने के लिए निप्पल को चबाने के लिए अपने मसूड़ों का उपयोग करते हैं, जिससे निप्पल में दर्द होता है।
  • माँ को हाइपरलैक्टेशन सिंड्रोम होने की स्थिति में बच्चा आमतौर पर भ्रमित होता है। जिसके कारण दोहराए जाने वाले नर्सिंग साइकिल होते हैं जहां बच्चा ब्रेस्ट को पकड़ेगा लेकिन फिर थोड़ी देर बाद मना कर देगा, बाद में भूख लगने पर चिड़चिड़ाने लगेगा। यदि फ्लो बहुत तेज हो तो बच्चा दूध पीते समय उसे थूक सकता है। यह बच्चे को बाद में आने वाला अच्छा मलाईदार दूध पीने से रोकता है।
  • बच्चे का वजन या तो कम होगा या स्वस्थ वजन की तुलना में बहुत अधिक हो जाएगा।

ब्रेस्ट मिल्क की ओवर सप्लाई आपके छोटे बच्चे को कैसे प्रभावित करती है?

बड़ी मात्रा में दूध की सप्लाई की वजह से बच्चा एक बार में बहुत सारा दूध निगल लेता है और जिसके साथ हवा भी अंदर चली जाती है। इससे बच्चे के पेट में गैस बनती है, जिससे वह परेशान और चिड़चिड़ा हो जाता है। ऐसे में आपको उसे डकार दिलानी होगी ताकि वह अतिरिक्त दूध को बाहर निकाल सके। वह सामान्य से अधिक बार गैस भी पास कर सकता है।

हाइपरलैक्टेशन का इलाज कैसे करें

यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं जिनका पालन करके आप ब्रेस्ट मिल्क की अधिक सप्लाई को कम कर सकती हैं।

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  • दूध पिलाने के ठीक बाद पंप करने से बचें।
  • अपने बच्चे को दूध पिलाने की तकनीक अपनाएं, जो सप्लाई को ठीक से नियंत्रित करने में मदद करती है और मैस्टाइटिस की संभावना को कम करती है।
  • ब्लॉक फीडिंग के विकल्प को चुनें। ब्लॉक फीडिंग में बच्चे को केवल एक स्तन से कुछ घंटों या अधिक समय तक दूध पिलाया जाता है। दूध की आपूर्ति को कम करने में ब्लॉक फीडिंग बहुत प्रभावी है लेकिन इस मेथड को एक स्तनपान कंसलटेंट के मार्गदर्शन में ही आजमाया जाना चाहिए।
  • अपने ब्रेस्ट के नीचे कपड़े का एक टुकड़ा (ठंडा) रखें ताकि आपको सूजन से राहत मिल सके।
  • पत्ता गोभी के पत्तों को अपनी ब्रा के अंदर रखने से भी दूध का रिसाव दूर होता है।

क्या आप हाइपरलैक्टेशन सिंड्रोम के साथ ब्रेस्टफीडिंग जारी रख सकती हैं?

जी हां, बिल्कुल। सही तरीके से दूध पिलाने से ही आपके के दूध का उत्पादन नियंत्रित होगा और हाइपरलैक्टेशन भी कम होगा। इस बात का ध्यान रखें कि आप जितना संभव हो एक फिक्स शेड्यूल और मात्रा रखने का प्रयास करें।

कम दूध की समस्या वाली महिलाओं के लिए हाइपरलैक्टेशन एक वरदान की तरह काम करता है, लेकिन याद रखें कि अतिरिक्त दूध की सप्लाई माँ या बच्चे के लिए फायदेमंद नहीं है। कुछ घरेलू उपचार और दूध पिलाने और स्टोर करने की सही तकनीकों के साथ, आपका शरीर बच्चे की मांगों को सीखना शुरू कर देता है और कुछ ही समय में दूध की सप्लाई वापस नॉर्मल हो जाती है।

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यह भी पढ़ें:

शिशु और माँ के लिए स्तनपान के फायदे
स्तनपान के दौरान होने वाली आम समस्याएं और उनका समाधान
ब्रेस्टमिल्क (माँ के दूध) का रंग – क्या नार्मल है और क्या नहीं

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समर नक़वी

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