सामान्य प्रसव बनाम सिजेरियन – लाभ और नुकसान

सामान्य प्रसव बनाम सिजेरियन - लाभ और नुकसान

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क्या आप गर्भवती है और उस बड़े दिन का इंतजार कर रही है? सभी महिलाओं को इस सवाल का सामना करना पड़ता है कि क्या वहीं पुराने जमाने के पारंपरिक तरीकों को अपनाया जाए या हाल ही में हुए लोकप्रिय सिजेरियन या सीसेक्शन से बच्चे को जन्म दिया जाए।

सामान्य प्रसव की तुलना में सीसेक्शन डिलीवरी

माताएं उस शुरुआती समय से ही जन्म दे रही हैं जब कोई अल्ट्रासाउंड मशीन या अस्पताल नहीं थे। अब प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ ही माताओं के पास प्रसव के दूसरे तरीके को चुनने और लंबे और दर्दनाक प्रसव पीड़ा में जाने से बचने का विकल्प मिल गया है। सीसेक्शन और सामान्य डिलीवरी की तुलना, मातापिता को प्रसव के लिए उनके विकल्पों में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।

योनि द्वारा जन्म (सामान्य प्रसव)

सामान्य प्रसव या योनि जन्म का प्राकृतिक तरीका हमेशा अनुशंसित होता है। कहा जाता है कि इस पारंपरिक तरीके से बच्चा पैदा करने से माँ और बच्चे दोनों को कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। आप अपना विकल्प निर्धारित करने से पहले कुछ बिंदुओं पर विचार कर सकती हैं:

1. योनि प्रसव के फायदे

प्राकृतिक तरीका होने के नाते यह एक बेहतर विकल्प है और इसके कई फ़ायदे हैं जिसका आपको माँ और बच्चे दोनों के लिए विचार करना चाहिए।

माँ के लिए

  • माँ को इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का मौका मिलता है, जिससे उसे अधिक सकारात्मक और सशक्त अनुभव मिलता है।
  • प्रक्रिया के दौरान त्वचा से त्वचा का संपर्क शिशु और माँ के बीच बेहतर संबंध सुनिश्चित करता है।
  • सेहत में बहुत तेज़ी से सुधार होता है और आमतौर पर माताएं उसी दिन बिना किसी दर्द के खड़े होने व चलने में समर्थ हो पाती है, इसकी तुलना में टांके वाली विधी से बच्चे को जन्म देने के बाद कम से कम माँ को एक दिन के आराम की आवश्यकता होती है। योनि जन्म प्रक्रिया में माँ माँ की सेहत आमतौर पर एक सप्ताह के अंदर पूरी तरह से ठीक हो जाती है।
  • ना ही टांके लगाने की कोई जरूरत होती है और ना ही निशान पड़ते है । इसके अलावा, अस्पताल के चक्कर भी कम लगाने पड़ते है ।
  • प्राकृतिक रूप से प्रसव चुनने से आपको कभीकभी अस्पताल के बजाय घर पर भी प्रसव करने का मौका मिल सकता है। यह केवल अपने डॉक्टर से उचित परामर्श लेने के बाद ही विचार करना चाहिए।

बच्चे के लिए

  • जब आप योनि द्वारा जन्म प्रक्रिया चुनती है तो बच्चा भी गर्भ से बाहर आने के लिए तैयार रहता है।
  • योनि से बाहर धकेलने की प्रक्रिया के दौरान बच्चे के फेफड़े उनमें भरे हुए एमनियोटिक द्रव को बाहर निकाल देते हैं, जिससे सामान्य श्वास प्रक्रिया में मदद मिलती है और श्वसन समस्याएं कम हो जाती हैं।
  • जो बच्चे योनि प्रसव के माध्यम से पैदा होते है उन्हें कम परेशानियों से होकर गुजरना पड़ता है। एलर्जी के भी कम मामलें देखने को मिलते हैं और स्तनपान भी जल्दी शुरू कर सकते है।
  • गर्भ से बाहर आने पर बच्चा अच्छे बैक्टीरिया को अवशोषित करता है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत करने में मदद करता है।

2. योनि प्रसव के नुकसान

हालांकि उपरोक्त सभी लाभ दिए गए हैं, फिर भी योनि प्रसव में कुछ जोखिम अभी भी बने हुए हैं जिन्हें जानना जरूरी है :

माँ के लिए

  • प्राकृतिक प्रसव में प्रसव का समय अनिश्चित रहता है और इसे निर्धारित करने का कोई तरीका नहीं है। डिलीवरी पूरी तरह से माँ के शरीर पर निर्भर है।
  • प्रसव काल के दौरान दर्द और तनाव बना रहता है। प्रसव काल की कोई निश्चित अवधि नहीं होती है। यह कुछ समय के लिए या फिर कुछ घंटों तक भी रह सकता है। हालांकि, कुछ दवाएं हैं जो प्रसव काल के दौरान मदद कर सकती हैं, और यह डॉक्टर के निर्णय के अनुसार दी जाती हैं।
  • कभीकभी ऐसी जटिलताएं भी सामने आती है जो बच्चे की हृदय गति में गिरावट का कारण बन सकती हैं। ऐसी स्थितियों में माँ को एनेस्थीसिया दी जाती है और आपातकाल स्थिति में सीसेक्शन के लिए लाया जाता है ।
  • योनि प्रसव के बाद, संभवतः प्रसव के दौरान लगी चोटों के कारण माँ को कुछ यौन समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

बच्चे के लिए

  • कभीकभी जब बच्चे का आकार बड़ा होता है तो सक्शन कप या फॉरसेप्स की मदद से प्रसव कराया जाता है।
  • योनि प्रसव के दौरान किसी भी तरह की चोट से पीड़ित बच्चे के बहुत कम उदाहरण हैं।

सीजेरियन सेक्शन

सिजेरियन या सीसेक्शन डिलीवरी बच्चे के जन्म के लिए एक सर्जिकल विधि है। पेट पर एक छोटा सा चीरा लगाया जाता है जिसमें बच्चे को गर्भाशय से बाहर निकाला जाता है डॉक्टर के परामर्श के बाद ही सीसेक्शन की योजना बनाई जा सकती है, जो कि माँ के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। जब माँ में अस्वास्थ्य की स्थिति जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह या एचआईवी जैसे संक्रमण होते हैं, तो सीसेक्शन बच्चे के जन्म का मुख्य विकल्प है। साथ ही अगर प्राकृतिक प्रसव के दौरान कुछ समस्याएं हों जैसे कि शिशु को ऑक्सीजन नहीं मिलना या बहुत अधिक समय तक प्रसव नहीं होना, तो आपातकालीन सीसेक्शन किया जाता है।

1. सीसेक्शन के फायदे

सिजेरियन अपने कुछ फायदों के कारण एक लोकप्रिय विकल्प बन गया है। यह सीसेक्शन से जन्मे बच्चे के फायदे हैं:

माँ के लिए

  • जब यह एक नियोजित प्रक्रिया होती है, तो यह मातापिता को जन्म की योजना बनाने का लाभ देती है।
  • सीसेक्शन का चुनाव करके माँ लंबे समय तक होने वाले प्रसव पीड़ा से छुटकारा पा सकती है यह माँ को सभी प्रकार के तनाव और प्रसव पीड़ा से बचाता है।
  • सीसेक्शन द्वारा जन्म के बाद माँ को किसी भी प्रकार के यौन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है।

बच्चे के लिए

  • माँ द्वारा किसी भी संक्रमण से बच्चे के प्रभावित होने की संभावना कम होती है।
  • जन्म के दौरान बच्चे के घायल होने की संभावना कम होती है।

2. सीसेक्शन का नुकसान

  • ऊपर दिए गए सूचीबद्ध लाभों के अलावा, ऐसे कुछ नुकसान भी हैं जिनका मूल्यांकन किया जाना चाहिए:

माँ के लिए

  • किसी भी अन्य प्रमुख सर्जरी की तरह, सीसेक्शन में भी कुछ जोखिम है।
  • एनेस्थीसिया का उपयोग जटिलताओं और जोखिम को बढ़ाता है।
  • खून का नुकसान भी अधिक होता है।
  • इसके अलावा संक्रमण के जोखिम भी हैं। इसलिए घाव की देखभाल चिकित्सा की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए सुनिश्चित की जानी चाहिए। नियमित जांच के लिए अस्पताल में कई बार जाना।
  • पुनर्प्राप्ति अवधि प्राकृतिक बच्चे के जन्म की तुलना में लंबी है।
  • स्तनपान की प्रक्रिया में देरी हो सकती है। इससे माँ और बच्चे के बीच की संबंध पर असर पड़ सकता है।
  • सीसेक्शन में शिशुओं और माँ दोनों की मृत्यु दर अधिक होती है एनेस्थीसिया के तहत रखा जाना इन जोखिमों को बढ़ाता है।

बच्चे के लिए

  • चूंकि यह एक प्राकृतिक जन्म नहीं है, बल्कि सर्जन और मातापिता द्वारा तय किया जाता है, और बच्चा भी शायद माँ के गर्भ से बाहर आने के लिए तैयार नहीं होता है।
  • कुछ मामलों में बच्चा पैदा होने के बाद सांस की समस्याओं का सामना करता है।

सिजेरियन जन्म से बचने के लिए अनुशंसित तरीके

  • अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता को सावधानी से चुनें। यह डॉक्टर द्वारा सीसेक्शन के सांख्यिकी आंकड़ों को जानने में मदद करता है, योनि और सीसेक्शन प्रसव दोनों पर उनके विचार साथ ही साथ मृत्यु दर भी और ये सभी विवरण सही विकल्प बनाने में मदद कर सकते हैं।
  • दाई की नियुक्ति करना जो गर्भावस्था और प्रसव पेशेवर होती हैं, और गर्भावस्था के दौरान आपकी अतिरिक्त सहायता कर सकती हैं साथ ही साथ आपको कम से कम समस्याओं के साथ प्रसव प्रेरित कर मार्गदर्शन भी दे सकती हैं।
  • बर्थिंग क्लासेस जाना जहाँ सांस लेने के व्यायाम सिखाते हैं और बिना किसी दवा के प्राकृतिक तरीके से प्रसव प्रक्रिया में प्रवेश करना सीखना एक अच्छा विचार है।
  • एक स्वस्थ संतुलित आहार और नियमित व्यायाम आपके लिए प्राकृतिक प्रसव के मौके बढ़ा देती है।

प्रसव के इन तरीकों के लाभ और हानि दोनों है, और इन्हे विकल्प बनाने से पहले, मातापिता को सभी कारकों पर विचार कर लेना चाहिए और अपने डॉक्टर से परामर्श भी करना चाहिए। हालांकि प्राकृतिक जन्म उतना जोखिम भरा नहीं होता है और यह एक पारंपरिक तरीका है, प्रसव काल में जाना एक दर्दनाक और तनावपूर्ण प्रक्रिया हो सकती है। योनि प्रसव चयन के बाद भी चीजों का योजना अनुसार नहीं होने की संभावना रहती है और डॉक्टर को आपातकालीन सीसेक्शन करना पड़ सकता है। प्राकृतिक प्रसव और सीसेक्शन दोनों ही तकनीकें अच्छी तरह से आज़माए और परखे हुए है अंततः सभी पहलुओं का मूल्यांकन करने के बाद अंतिम निर्णय मातापिता का ही होता है।