In this Article
हमारे शरीर को नॉर्मली काम करने और अच्छी सेहत के लिए सही पोषक तत्वों की जरूरत होती है। गर्भावस्था एक ऐसी समय जब आपको नुट्रिएंट्स का सेवन करना सबसे ज्यादा जरूरी होता है, क्योंकि गर्भ में पल रहे बच्चे को विकास करने के लिए पोषण की जरूरत होती है। बच्चे के साथ साथ माँ को भी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है जो उसके शरीर को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली मुश्किलों का सामना करने मदद करते हैं।
कुपोषण तब होता है जब शरीर को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिलते हैं जो आपके शरीर के नॉर्मली काम करने के लिए बहुत जरूरी है। पोषक तत्वों को मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फैट), माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (विटामिन और मिनरल) और पानी में वर्गीकृत किया गया है। इसकी कमी से हम गंभीर बीमारी का शिकार हो सकते हैं, जो आप और आपके बच्चे को प्रभावित कर सकता हैं।
पोषक तत्वों के महत्व के बारे में ठीक से न समझने और इसकी जरूरत को पर्याप्त रूप से न पूरा कर पाने की वजह से कुपोषण हो सकता है, क्योंकि आप हेल्दी और बैलेंस डाइट नहीं ले रही होती हैं।
दस्त और उल्टी के कारण आपको ठीक से पोषण नहीं मिल पता है। बीमारियां, इन्फेक्शन और मानसिक बीमारियां जैसे डिप्रेशन वाले इंसान को पौष्टिक भोजन को खाने और उसे पचाने की क्षमता भी प्रभावित होती है। ये आपकी भूख में कमी पैदा कर सकता है और पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है।
जिन परिवारों में फाइइनेंशियल रिसोर्स की कमी होती है उन्हें ठीक से हेल्दी फूड नहीं मिल पता है। इससे लोगों में कुपोषण हो सकता है।
दाँतों की समस्या आपको काफी परेशान कर सकती है और इससे आपको मसूड़ों की बीमारियां भी हो सकती है, जिस वजह से आप पौष्टिक भोजन का सेवन नहीं कर पाती हैं।
कुछ दवाएं ऐसी भी होती हैं जिससे आपका शरीर पोषक तत्वों को अब्सोर्ब नहीं कर पता है, जिससे कुपोषण हो सकता है।
गर्भावस्था के दौरान गंभीर रूप से मॉर्निंग सिकनेस की प्रॉब्लम होने से उन्हें हेल्दी फूड खाने में बहुत परेशानी होती है, जिससे उन्हें कुपोषण होने का खतरा होता है।
गर्भावस्था के दौरान, एक महिला को एक दिन में लगभग 300 एक्स्ट्रा कैलोरी की आवश्यकता होती है। अगर महिला पर्याप्त मात्रा में हेल्दी फूड का सेवन नहीं करती है, तो इससे उसे कुपोषण हो सकता है।
गर्भावस्था के दौरान कुपोषण माँ और उसके बढ़ते बच्चे दोनों की ही हेल्थ पर बहुत बुरा प्रभाव डाल सकता है और उनके लिए कई हेल्थ प्रॉब्लम पैदा कर सकता है। यहाँ गर्भावस्था के दौरान कुपोषण होने के कुछ जोखिम बताए गए हैं:
गर्भावस्था के दौरान कुपोषण होने से बच्चे पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है यह आपको नीचे बताया गया है –
बैलेंस डाइट लेने से जिसमें, फल, सब्जियां, पानी, डाइट्री फाइबर, प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट शामिल होने चाहिए, ताकि कुपोषण को दूर किया जा सके। गर्भावस्था में कुपोषण के लक्षण और संकेतों में थकान, एनीमिया, लो प्रेगनेंसी वेट, हाई ब्लड प्रेशर, बालों का झड़ना, शुष्क त्वचा, डेंटल प्रॉब्लम और इम्युनिटी का कमजोर हो जाना शामिल है।
कुपोषण से बचाव करने के लिए, जो महिलाएं गर्भधारण की प्लानिंग कर रही हैं, उन्हें प्रीनेटल विटामिन लेने चाहिए, हेल्दी फूड का सेवन करना चाहिए और नियमित रूप से एक्सरसाइज करना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान, उन्हें पौष्टिक भोजन खाना चाहिए और अपनी प्रेगनेंसी विटामिन को लेना जारी रखना चाहिए। इससे माँ और गर्भ में पल रहा बच्चा सुरक्षित और हेल्दी रहता है।
यह भी पढ़ें:
आज के समय में माता-पिता अपने बच्चों के लिए कुछ अलग और दूसरों से बेहतर…
लगभग हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि उनके बच्चे का नाम सबसे अलग और…
एक अच्छा और सच्चा साथी जिसे मिल जाए उसका जीवन आसान हो जाता है। कहते…
माँ वह इंसान होती है, जिसका हमारे जीवन में स्थान सबसे ऊपर होता है। माँ…
यह बात हर कोई जानता है कि बेटियों से घर की रौनक होती है। चाहे…
माता-पिता बनना किसी भी शादीशुदा जोड़े की जिंदगी में एक बेहद यादगार और अनमोल पल…