गर्भावस्था

गर्भावस्था के दौरान यूरिन टेस्ट और यूरिन कल्चर

गर्भावस्था, एक बहुत ही खूबसूरत और अद्भुत समय होता है क्योंकि यह दुनिया में एक नया जीवन लाने की प्रक्रिया होती है। सिर्फ यह पुष्टि करने के लिए कि मां स्वस्थ है, डॉक्टर कुछ सावधानियां बरतते हैं। इन्हीं में से एक होता है यूरिन टेस्ट यानी पेशाब की जांच। इस लेख में आप गर्भावस्था के समय किए जाने वाले यूरिन टेस्ट से जुड़ी हर तरह की जानकारी को जान सकेंगी। 

गर्भावस्था के दौरान यूरिन टेस्ट क्यों किया जाता है?

आप अपने पेशाब में कुछ पदार्थों की मौजूदगी के कारण शरीर में होने वाले बदलावों से प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षणों का पता लगा सकती हैं। ये मेडिकल स्थितियां आपके बच्चे और आपके लिए कुछ समस्याएं पैदा कर सकती हैं। इसलिए गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर यूरिन टेस्ट करवाते रहना चाहिए। यूरिन के एक सैंपल से शरीर में मौजूद प्रोटीन, शुगर, बैक्टीरिया या किसी अन्य पदार्थ के स्तर में वृद्धि या कमी होने के कारण गर्भवती महिला को डायबिटीज, किडनी की बीमारी या यूरिन इंफेक्शन होने के खतरे का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

यह टेस्ट कब किया जाता है?

यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट, आमतौर पर डॉक्टर से पहली बार मिलने पर किया जाता है। डॉक्टर यह जांच खुद करते हैं और डिलीवरी डेट आने से पहले कई बार आपको अलग-अलग समय पर यूरिन टेस्ट करवाने के लिए भी कह सकते हैं। डिलीवरी डेट आने से पहले डॉक्टर हर मीटिंग पर मूत्र की जांच करवा सकते हैं।

गर्भावस्था में यूरिन टेस्ट कैसे किया जाता है?

इसके लिए सबसे पहले एक स्टरलाइज प्लास्टिक कंटेनर में, साफ पेशाब का सैंपल लिया जाता है, फिर कुछ बीमारियों की जांच के लिए, टेस्ट स्ट्रिप्स जिनमें कुछ केमिकल लगे होते हैं, उन्हें यूरिन सैंपल में डुबोया जाता है। इसके बाद एक अन्य स्टरलाइज कंटेनर का उपयोग किया जाता है, ताकि कोई भी बैक्टीरिया या कोई अन्य स्राव यूरिन सैंपल को दूषित न कर सके और टेस्ट रिजल्ट गलत न हो जाए। 

अगर आपके डॉक्टर को किसी भी तरह के इंफेक्शन का संदेह होता है तो वह आपसे यूरिन के एक से ज्यादा सैंपल मांग सकते हैं ताकि लैब में डिटेल से जांच की जा सके।

गर्भवती महिलाओं को कितनी बार यूरिन टेस्ट करवाना चाहिए?

हर डॉक्टर आपको यूरिन टेस्ट करवाने के लिए अलग अलग तरीके बता सकते हैं। कुछ डॉक्टर आपके यूरिन सैंपल को लैब में भेजकर सभी तरह के टेस्ट करवाते हैं। तो कुछ डॉक्टर हर मीटिंग पर यूरिन सैंपल की मांग कर सकते हैं या प्रेगनेंसी को जानने के लिए यूरिन डिपस्टिक टेस्ट क्लिनिक में कर सकते हैं। कुछ डॉक्टर तिमाही में केवल एक बार ही यूरिन सैंपल देने को कह सकते हैं। जबकि कुछ डॉक्टर एक भी यूरिन सैंपल की मांग नहीं करते हैं जब तक आपमें गर्भावस्था संंबंधी लक्षण न दिख रहे हों या जिसके लिए यूरिन टेस्ट की जरूरत हो। 

यूरिन टेस्ट के रिजल्ट से क्या पता चलता है?

यहां चार प्रमुख बातें बताई गई हैं जिनका इस टेस्ट से पता लगाया जा सकता है।

शुगर

  • आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान यूरिन में शुगर का स्तर सामान्य पाया जाता है, लेकिन अगर आपके शरीर का ब्लड शुगर लेवल बहुत ज्यादा है, तो ऐसे में आपके यूरिन टेस्ट में भी शुगर की मात्रा ज्यादा आएगी।
  • यह जेस्टेशनल डायबिटीज के साथ देखा जाता है। यह डायबिटीज का एक प्रकार है जो गर्भावस्था के दौरान होना सामान्य होता है।
  • यह स्थिति तब होती है जब प्रेगनेंसी हार्मोन्स शरीर में इंसुलिन को बनने से रोकने लगते हैं।
  • अगर आपके परिवार में डायबिटीज का इतिहास है और डॉक्टर को किसी तरह का संदेह हो, तो इसके लिए वो आपको ब्लड टेस्ट करवाने के लिए कह सकते हैं।
  • यह ज्यादातर गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के दौरान होता है। प्रेगनेंसी के समय अनियंत्रित ब्लड शुगर लेवल की वजह से दिल और रीढ़ की हड्डी की समस्याओं और बच्चे की किडनी के खराब होने का खतरा बढ़ सकता है।

बैक्टीरिया

  • आपके पेशाब में बैक्टीरिया की मौजदूगी होना यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का संकेत माना जाता है। कई महिलाओं में यूटीआई होने पर भी इसके लक्षण दिखाई नहीं देते।
  • इंफेक्शन किडनी में भी फैल सकता है जिससे बच्चे को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • यूटीआई का सही और जल्दी इलाज नही होने पर यह समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चे या कम वजन के बच्चे की जिंदगी के खतरे को भी बढ़ा सकता है। यूटीआई का सही और जल्दी इलाज किया जाए तो इससे कई तरह मेडिकल कॉम्प्लिकेशन्स को खत्म किया जा सकता है।
  • शुरुआत में, अगर आपका यूरिन टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो डॉक्टर आपका यूरिन कल्चर टेस्ट करवा सकते हैं। इससे यूरिन में बैक्टीरिया की उपस्थिति की पुष्टि की जाती है और किस प्रकार के एंटीबायोटिक देने है इसका फैसला किया जा सकता है। कई एंटीबायोटिक्स सुरक्षित होते हैं लेकिन कोई भी एंटीबायोटिक दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा होता है।
  • डॉक्टर आमतौर पर शुरुआत में ही बिना लक्षण वाले बैक्टीरियल इंफेक्शन की पहचान करके, उसका इलाज करते हैं।

कीटोन

  • जब शरीर में फैट छोटे- छोटे टुकड़ों में टूटता है तो उसके परिणामस्वरूप कार्बोहाइड्रेट की जगह कीटोन्स एसिडिक बाय प्रोडक्ट्स बनने लगते हैं जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है।
  • अगर आपको डायबिटीज है, तो आपके पेशाब में कीटोन्स की मात्रा ज्यादा होने की संभावना भी अधिक होती है।
  • अगर आपके शरीर में लगातार शुगर लेवल बढ़ा हुआ रहता है, तो यह एक गंभीर कीटोएसिडोसिस नामक बीमारी का संकेत माना जाता है। जो आगे चलकर डायबिटीक कोमा का कारण बन सकता है।
  • अगर आपके शरीर में लगातार हाई कीटोन्स पाए जाते हैं, तो डॉक्टर सबसे पहले आपके खाने और पीने की आदतें अच्छी हैं या नहीं इसकी जांच करेंगे।
  • खाने के बाद अगर कीटोन्स गायब हो जाते हैं तो घबराने की कोई बात नहीं है, लेकिन अगर आप मतली और उल्टी के कारण भोजन या तरल पदार्थ नहीं ले पा रही हैं, तो ऐसे में आपको नसों में इंजेक्शन (इंट्रावेनस) के जरिए पोषक तत्व प्राप्त करने चाहिए।
  • इस तरह की स्थिति का उपचार आमतौर पर अस्पताल में ही होता है।

प्रोटीन

  • पेशाब में प्रोटीन आना, प्रोटीनूरिया, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई), क्रोनिक किडनी डिजीज या किडनी इंफेक्शन का संकेत माना जाता है।
  • शरीर में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होने पर यह स्थिति विकसित होती है तो इसे प्री-एक्लेमप्सिया का शुरुआती संकेत माना जाता है। यह स्थिति गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद हाई बीपी के कारण उत्पन्न हो सकती है।
  • इससे बच्चे और मां को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • अगर आपका ब्लड प्रेशर और प्रोटीनूरिया दोनों सामान्य हों, तो गर्भावस्था के दौरान पेशाब में प्रोटीन आने का कारण क्या हो सकता है, इसको जानने के लिए डॉक्टर यूरिन कल्चर टेस्ट करवाने का फैसला ले सकते हैं।

यूरिन कल्चर टेस्ट क्या होता है?

यूरिन कल्चर टेस्ट पेशाब में मौजूद बैक्टीरिया के प्रकार का पता लगाने का एक तरीका होता है ताकि डॉक्टर आपके इंफेक्शन को दूर करने के लिए आपको सही प्रकार के एंटीबायोटिक्स दे सकें।

गर्भावस्था के दौरान यूरिन कल्चर टेस्ट करवाने की सलाह क्यों दी जाती है?

इन बातों को पता करने के लिए यूरिन कल्चर टेस्ट करवाने के लिए कहा जाता है:

  • बैक्टीरिया, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • गर्भावस्था के दौरान इंफेक्शन का इलाज करने के लिए सही एंटीबायोटिक देने का फैसला करना।
  • कौन सा उपचार यूटीआई को पूरी तरह से साफ करने में मदद करता है।

आमतौर पर यूरिन कल्चर के लिए गर्भवती महिला को अपना यूरिन सैंपल दो बार देना होता है। पहली बार इंफेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया की जांच करने के लिए और दूसरी बार यह देखने के लिए कि क्या बैक्टीरियल इंफेक्शन पूरी तरह से साफ हो गया है ताकि भविष्य में बच्चे या मां को कोई खतरा न रहे।

यूरिन कल्चर टेस्ट कैसे किया जाता है?

  • इसके लिए सबसे पहले आपका यूरिन सैंपल लिया जाता है। यूरिन सैंपल को एक पदार्थ या केमिकल से मिलाया जाता है जो लैब में पेट्री-डिश पर बैक्टीरिया की संख्या की बढ़ाने में मदद करता है। अगर बैक्टीरिया की संख्या में वृद्धि नहीं होती है तो यूरिन कल्चर टेस्ट को नेगेटिव माना जाता है और अगर किसी बैक्टीरिया में बढ़ोतरी दिखाई देती है,तो उस वृद्धि को पॉजिटिव संकेत माना जाता है और टेस्ट रिजल्ट को पॉजिटिव कहा जाता है। इसके अलावा, यह टेस्ट इंफेक्शन पैदा करने वाले सबसे सटीक प्रकार के बैक्टीरिया को पहचानने में मदद करता है।
  • आमतौर पर इस टेस्ट का रिजल्ट एक-दो दिन में आ जाता है।
  • सावधानी के तौर पर आपको प्रेगनेंसी के दौरान यह यूरिन कल्चर टेस्ट कई बार करवाने के लिए भी बोला जा सकता है।
  • बैक्टीरिया के कारण यूरिनरी ट्रेक्ट इंफेक्शन की वजह से समय से पहले ही डिलीवरी भी हो सकती है।

क्या गर्भावस्था में यूरिन टेस्ट करवाने से कोई खतरा होता है?

प्रेगनेंसी में यूरिन टेस्ट करवाने से आपको और आपके बच्चे को कोई खतरा नहीं होता है। यह जांच केवल आप और बच्चे, दोनों के अच्छे स्वास्थ्य को जानने के लिए किया जाता है।

निष्कर्ष

आपके शरीर में बैक्टीरिया, शुगर, कीटोन्स या प्रोटीन की मौजदूगी होने से डॉक्टर को प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की समस्या को जानने में मदद मिलती है। किसी भी प्रकार की बीमारी को रोकने के लिए शुरुआती जांच और उचित उपाय करना सबसे अच्छा होता है। अपने डॉक्टर से सलाह लें और यूरिन टेस्ट या यूरिन कल्चर टेस्ट करवाएं ताकि यह पक्का हो सके कि आप और आपका बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ हैं और आपकी डिलीवरी बिना किसी कॉम्प्लिकेशन के हो सकती है।

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समर नक़वी

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