गर्भधारण

पुरुषों और महिलाओं के लिए बांझपन के उपचार

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आज के समय में, ज्यादातर कपल को परिवार शुरू करने के लिए बांझपन से जुड़े उपचारों का विकल्प चुनना पड़ता है। पति और पत्नी दोनों की तनाव भरी जॉब, बेकार लाइफस्टाइल और बीमारियां न केवल उनकी सेहत को बिगाड़ रही हैं बल्कि उनके फर्टिलिटी लेवल को भी प्रभावित कर रही हैं। हालांकि, मेडिकल फील्ड में फर्टिलिटी के इलाज के तरीकों में महत्वपूर्ण सफलताएं मिली हैं और बांझपन से जूझ रहे जोड़ों के सामने इस परेशानी से निजात पाने के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं।

बांझपन के लिए सबसे अच्छे उपचार

जोड़ों के पास इनफर्टिलिटी का इलाज करने के लिए कई उपचार हैं, उनमें से कुछ के बारे में नीचे बताया गया है:

1. फर्टिलिटी की दवाएं

फर्टिलिटी की दवाएं खाना बांझपन का इलाज करने का सबसे आम और अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है। 

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कैसे काम करती हैं?

फर्टिलिटी ड्रग्स आमतौर पर यह सुनिश्चित करने के दिए जाते हैं ताकि हर एक ओवुलेशन साइकिल में एक या दो अंडों को रिलीज किया जा सके। इन दवाओं में आमतौर पर गोनाडोट्रोपिन या क्लोमीफीन होता है। महिला पर किया जाने वाला बांझपन का ये पहला इलाज होता है और किसी भी अन्य इलाज के बारे में विचार करने से पहले इसे तीन से छह महीने के बीच दिया जाता है।

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सफलता दर

इन दो फर्टिलिटी दवाओं में से, क्लोमीफीन बेहतर काम करती है। क्लोमीफीन लेने वाली लगभग 80% महिलाएं गर्भवती हो जाती हैं। इस संख्या में से 30-40% महिलाएं तीसरी ट्रीटमेंट साइकिल से प्रेग्नेंट होती हैं। जिन फर्टिलिटी दवाओं में गोनाडोट्रोपिन होता है उनका सफलता दर 15% अधिक बढ़ जाता है, जब सही समय में संभोग किया जाए।

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फायदे

यह दवाएं पूरी तरह से गैर आक्रामक है, लेकिन इनके भी कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं। हालांकि, ये दवाएं अस्पताल में भर्ती होने और अन्य महंगे विकल्पों की तुलना में इलाज का सबसे सस्ता तरीका है।

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नुकसान

गर्भधारण करने के लिए फर्टिलिटी ड्रग्स लेने के कुछ साइड इफेक्ट होते हैं। इन दवाओं से जुड़वां बच्चों के गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। क्लोमीफीन से मूड स्विंग, बुखार, पेल्विक में दर्द, ओवरी में सिस्ट, स्तनों में टेंडरनेस आना, सिरदर्द, गाढ़ा और सूखा बलगम, हल्का डिप्रेशन, मतली और धुंधला दिखने जैसी कई परेशानियां पैदा होती है। गोनाडोट्रोपिन के भी कई साइड इफेक्ट होते हैं जैसे अचानक बुखार आना, मूड स्विंग, पेट में सूजन, सिरदर्द, स्तनों में टेंडरनेस, इंजेक्शन की जगह पर दाने या सूजन और ओएचएसएस।

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लागत

ये दवाएं फर्टिलिटी उपचारों की लिस्ट में सबसे सस्ता और कम समय का उपचार देती हैं। हालांकि, यह इलाज लंबे समय तक चल सकता है, जिससे लागत बढ़ सकती है। यह काफी हद तक महिला और उस पर इलाज के असर पर निर्भर करता है।

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2. सर्जरी

अगर पुरुष या महिला दोनों में बांझपन से जुड़ी कोई समस्या है, तो उसे सर्जरी से आसानी से ठीक किया जा सकता है। आपके डॉक्टर आपको सर्जरी करवाने की सलाह देंगे। इस तरह के उपचार से आप पीसीओडी, एंडोमेट्रियोसिस, शारीरिक दोष, ब्लॉक फैलोपियन ट्यूब और फाइब्रॉएड जैसी परेशानियों को दूर कर सकते हैं।

कैसे काम करती है?

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फर्टिलिटी क्षमता बढ़ाने के लिए सबसे आम सर्जरी में लैप्रोस्कोपी और लैपरोटोमी शामिल है। लैप्रोस्कोपी, लैपरोटोमी सर्जरी की तुलना में कम आक्रामक है क्योंकि इसमें एक हल्के कैमरे और पतले उपकरणों का उपयोग करते हुए एक छोटा चीरा लगाया जाता है।

सफलता दर

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इस प्रकार के इलाज की सफलता दर व्यक्ति की समस्या और जरूरी सर्जरी पर निर्भर करती है। हालांकि ये काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप इस इलाज पर कैसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एंडोमेट्रियोसिस के इलाज के लिए लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कराने वाली लगभग 40% महिलाएं आने वाले साल में गर्भवती हो सकती हैं।

फायदे

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सर्जरी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह गर्भावस्था की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद करती है और इसका इस्तेमाल दवाइयों के साथ करने से ये उपचार को और अधिक सफल बनाने में सहायक होती है।

नुकसान

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सर्जरी करवाने का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह इनवेसिव होती है, जबकि कुछ सर्जरी कम आक्रामक हो सकती हैं। लेकिन इसमें स्किन को काटना पड़ता है जिससे नुकसान हो सकता है। कभी-कभी सर्जरी के बाद कॉम्प्लिकेशन बढ़ते हैं, जो कि दर्द या इंफेक्शन का कारण बनते हैं।

लागत

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आमतौर पर सर्जरी की लागत इसकी प्रक्रिया पर निर्भर करती है लेकिन अधिकतर उपचारों के मुकाबले यह काफी महंगा होती है। बीमा एजेंसी भी इस इलाज को कवर नहीं करती है।

3. अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन)

इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन के रूप में जानी जाने वाली एक प्रक्रिया इनफर्टिलिटी का प्राथमिक इलाज मानी जाती है। यह प्रक्रिया तब होती है जब महिला इन्फर्टाइल होती है या यदि पुरुष में स्पर्म काउंट कम होता है।

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कैसे काम करता है?

इस प्रक्रिया में आपके पति का स्पर्म लिया जाता और फिर उसे प्रोसेस करके यूट्रस में सीधा इंजेक्ट किया जाता है। आदर्श परिस्थितियों में, गर्भावस्था की संभावना को बढ़ाने के लिए स्पर्म एक ही जगह में अत्यधिक केंद्रित होते हैं।

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सफलता दर

यह इलाज थोड़ा अप्रत्याशित हो सकता है, अस्पष्टीकृत बांझपन के लिए गर्भावस्था की दर 7% जितनी कम हो सकती है। हालांकि, यह चरम और अस्पष्टीकृत बांझपन के लिए सफलता की उच्च दरों में से एक है।

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फायदे

इसका इलाज आक्रामक नहीं है और आमतौर में इसमें सिर्फ पेट दर्द होता है जो कि सिर्फ एक दिन तक रहता है।

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नुकसान

इस उपचार का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह न केवल महंगा है, बल्कि सफलता की संभावना भी बहुत अधिक नहीं है।

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लागत

इस उपचार की लागत लगभग एक सर्जरी जितनी हो सकती है, इसके बारे में अधिक जानकारी आप अपने इंश्योरेंस प्रोवाइडर से बात करके ले सकते हैं यदि वह इस इलाज को कवर कर रहे हैं। बिना कवर हुए पेशेंट्स के लिए लागत अधिक हो सकती है और यह अस्पताल पर भी निर्भर करता है।

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4. इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ)

इनफर्टिलिटी के इलाज के यह सबसे लोकप्रिय और सफल तरीकों में से एक है, इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन या आईवीएफ को बांझपन के इलाज का सबसे बेहतरीन विकल्प माना जाता है।

कैसे काम करता है?

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इस उपचार में, आपकी ओवरी से अंडे निकाले जाते हैं और एक प्रयोगशाला में उन्हें आपके पति के स्पर्म के साथ फर्टिलाइज किया जाता है। यदि यह प्रक्रिया सफल होती है, तो भ्रूण बनते हैं, इन भ्रूणों को पोषण देने के लिए उन्हें आपके यूट्रस में ट्रांसफर किया जाता है और वह धीरे-धीरे भ्रूण में विकसित होता है।

सफलता दर

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आईवीएफ बांझपन के इलाज का सबसे सफल तरीका माना जाता है। अन्य उपचारों की सफलता दर काफी हद तक व्यक्ति और स्पर्म को लेकर अंडे की प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है। आईवीएफ के लिए उम्र एक मेजर फैक्टर है। 40 साल से कम आयु की महिलाओं के लिए सफलता की औसत दर लगभग 40% है, जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाती है यह और भी कम होती जाती है और 43 की उम्र तक सफलता दर गिरकर लगभग 5% हो जाती है।

फायदे

इस प्रक्रिया की सफलता दर काफी ऊँची है। इसके अलावा, आईवीएफ भी काफी हद तक सर्जिकल जितना आक्रामक नहीं है।

नुकसान

सचाई यही है कि आईवीएफ बहुत अच्छी तरह से काम कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, इलाज से पहले लिए गए गोनाडोट्रोपिन के कारण, इंजेक्शन की जगह के पास रैशेस हो सकते हैं। इसमें एक जोखिम है जिसको ओएचएसएस या ओवेरियन हाइपरस्टिम्यूलेशन सिंड्रोम कहते है।

लागत

आईवीएफ एक लंबा और महंगा इलाज होता है, जिसमें अक्सर कुछ सर्जरी की तुलना में अधिक खर्च होता है। इस इलाज की सही लागत जानने के लिए आप अपने डॉक्टर से सलाह करें। इसकी कीमत 300,000 रुपए से ऊपर तक जा सकती है।

5. इंट्रासाइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई)

यह पुरुषों में बांझपन के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक प्रक्रिया है, इसका प्रयोग सफल गर्भावस्था की संभावना को बढ़ाने के लिए आईवीएफ के साथ किया जाता है।

कैसे काम करता है?

इस प्रक्रिया में, एक आदमी सीधा अपना सीमन सैंपल दे सकता है, जिसे फिर आईवीएफ प्रक्रिया के माध्यम से निकाले गए अंडे में इंजेक्ट किया जाएगा और भ्रूण बनने तक इनक्यूबेट किया जाएगा।

सफलता दर

कम से कम 50% अंडों को फर्टिलाइज करने के साथ यह प्रक्रिया बेहद सफल होती है। गर्भवती होने की संभावना उन कपल के समान होती है जो अंडे को फर्टिलाइज करने के बाद आईसीएसआई के बिना आईवीएफ का उपयोग करते हैं।

फायदे

अंडे को फर्टिलाइज करने के मामले में इस प्रक्रिया की सफलता दर काफी ऊँची है।

नुकसान

इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि अंडे के फर्टिलाइज होने के बाद, एक सफल गर्भावस्था की संभावना उतनी ही रहती है जितना एक कपल के आईसीएसआई के बिना आईवीएफ का उपयोग करने की होती है।

लागत

इसकी लागत भी लगभग आईवीएफ के जितनी ही होती है, बल्कि आईसीएसआई की प्रक्रिया में अतिरिक्त 60,000-100,000 रुपए तक खर्च हो सकते हैं।

6. गेमेट इंट्राफैलोपियन ट्रांसफर

आईसीएसआई और आईवीएफ की खोज के बाद इस प्रक्रिया का उपयोग शायद ही कभी किया जाता है और इसके कॉम्प्लिकेशन के कारण इसे काफी हद तक पुराना माना जाता है।

कैसे काम करता है?

जीआईएफटी मेथड में एक्सट्रेक्ट हुए स्पर्म और अंडे का उपयोग किया जाता है जिन्हें एक लैब में मिलाया जाता है। फिर उन्हें लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए फैलोपियन ट्यूब में डाला जाता है, ताकि शरीर नेचुरल तरीके से प्रेग्नेंट हो सके।

सफलता दर

जीआईएफटी प्रक्रिया की सफलता दर आईवीएफ की तुलना में लगभग एक चौथाई है और अब इसका उपयोग इनफर्टिलिटी के इलाज के लिए बहुत कम किया जाता है।

फायदे

एक से ज्यादा बच्चों की चाहत रखने वाले माता-पिता के लिए ये सबसे ज्यादा फायदेमंद प्रक्रिया है, क्योंकि इस प्रक्रिया में फैलोपियन ट्यूब में डाले गए अंडों की संख्या के कारण जुड़वां या तीन बच्चे होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

नुकसान

आईवीएफ की तुलना में रिकवरी का समय काफी ज्यादा होता है, यह आक्रामक होने के साथ दर्द भी बढ़ाती है और आईवीएफ की तरह ही इस प्रक्रिया से पहले गोनाडोट्रोपिन का सेवन किया जाता है जिससे पेट में दर्द या रेडनेस और चकत्ते हो सकते हैं।

लागत

यह प्रक्रिया ज्यादातर सर्जिकल उपचार की तरह बेहद महंगी होती है और इसका उपयोग अब शायद ही कभी किया जाता है इसलिए सही जानकारी के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

7. जाइगोट इंट्राफैलोपियन ट्रांसफर

जीआईएफटी की तरह ही जेडआईएफटी भी एक पुरानी सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसका उपयोग आईसीएसआई और आईवीएफ के आने के बाद शायद ही कभी किया गया है।

कैसे काम करता है?

इस में भी जीआईएफटी का तरीका इस्तेमाल किया जाता है, डॉक्टर निकले हुए अंडे और स्पर्म को एक साथ मिलाते हैं। इस प्रक्रिया के साथ, यह सुनिश्चित करते हैं कि ‘जाइगोट्स’ को आपकी फैलोपियन ट्यूब में डालने के लिए लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का उपयोग करने से पहले एक फर्टिलाइज अंडा एक सिंगल सेल ऑर्गैनिस्म में विकसित हो।

सफलता दर

इसकी सफलता दर आईवीएफ का लगभग पांचवा हिस्सा है।

फायदे

इसके फायदे भी जीआइएफटी के समान हैं, इस प्रक्रिया का उपयोग शायद ही कभी किया जाता है और ये पुरानी हो चुकी है।

नुकसान

जेडआइएफटी में जीआईएफटी के समान ही नुकसान हैं।

लागत

यह काफी महंगी प्रक्रिया है।

8. डोनर स्पर्म और अंडे

आखिरी उपाय के रूप में, आप डोनर पर विचार कर सकते हैं। यदि आपके पति या फिर आप किसी भी परिस्थिति में एक-दूसरे के साथ बच्चा पैदा करने में असमर्थ हैं, तो इस प्रक्रिया को जरूर अपनाएं। 

कैसे काम करता है?

इस प्रक्रिया में आईवीएफ का उपयोग करके, आपके अंडों को डोनर के स्पर्म के साथ फर्टिलाइज किया जाता है, या डोनर के अंडे को आपके पार्टनर के स्पर्म के साथ फर्टिलाइज किया जाता है। इससे आगे की प्रक्रिया नियमित आईवीएफ की तरह है। हालांकि, आपके शरीर को गर्भावस्था के लिए तैयार करने के लिए डोनर अंडे के साथ एक बदलाव किया जाता है, डॉक्टर आपको नियमित दवा देंगे जो इस प्रक्रिया के दौरान जरूरी है।

सफलता दर

इस प्रक्रिया की सफलता अंडे और भ्रूण की ताजगी पर निर्भर करती है। ताजे डोनर अंडे के साथ, सफलता दर 50% तक हो सकती है, फ्रोजन के साथ सफलता दर 38% तक गिर जाती है।

फायदे

डोनर अंडे के मामले में सफलता दर बहुत ऊँची है।

नुकसान

अंडा या स्पर्म चुनने की प्रक्रिया लंबी और थकावट भरी होती है।

लागत

डोनर के अंडे और स्पर्म महंगे हो सकते हैं, इसलिए अधिक जानकारी के लिए आपको किसी फर्टिलिटी एक्सपर्ट से बात करनी चाहिए।

यदि कोई कपल वास्तव में प्रेग्नेंट होना चाहता है, लेकिन उनमें से किसी एक को बांझपन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो वह निराश हो जाते हैं। यह उनके भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है, लेकिन ऐसे कई फर्टिलिटी उपचार हैं जो मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही, यदि आप बांझपन के उपचार के लिए जा रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से सहायता समूहों और थेरेपिस्ट के बारे में जानकारी लें और उनके सभी निर्देशों का पालन करें।

यह भी पढ़ें:

सेकेंडरी इनफर्टिलिटी
बांझपन (इनफर्टिलिटी) के लिए बेहतरीन आयुर्वेदिक उपचार
पुरुषों और महिलाओं में प्रजनन क्षमता बढ़ाने के प्राकृतिक उपाय

समर नक़वी

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