बड़े बच्चे (5-8 वर्ष)

स्कूल और घर में बच्चों की पढ़ाई में माता-पिता की भूमिका

हर माता-पिता की पहली प्राथमिकता हमेशा से यह होनी चाहिए कि उनके बच्चे को सही समय पर सही रूप में सही शिक्षा मिले। यह तो आप जानती ही होंगी कि आपका बच्चा शिक्षा की शुरुआत प्रीस्कूल से करता है, फिर किंडरगार्टन में जाता है, उसके बाद प्राथमिक और इसी तरह आगे की शिक्षा प्राप्त करता जाता है। लेकिन माता-पिता के रूप में आपका सिर्फ इतना काम नहीं है कि आप बच्चे की फीस भर दें, या उसका टिफिन पैक कर दें और उसे जहां भी जरूरत हो वहां भेज दें। विकास के शुरुआती पड़ाव बच्चे के मन को आकार देते हैं और इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप उसकी पढ़ाई में सही तरीके से शामिल हो।  

बच्चे की पढ़ाई में माता-पिता की भागीदारी का महत्व

बच्चों की पढ़ाई में माता-पिता की भागीदारी का महत्व प्रत्यक्ष रूप से स्पष्ट नहीं हैं। लेकिन उनकी हिस्सेदारी बच्चे के सीखने की प्रक्रिया को जारी रखने और इसे बेहतर बनाने के लिए उसे प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है ताकि बच्चे की जिज्ञासा और नया सीखने की चाह हमेशा बनी रहे।

शिक्षा की सीमाएं दिन प्रतिदिन बढ़ रही हैं और आप इस बात से अवगत हैं। ऐसे में अगर आप उसका साथ दें तो वो आपको बेहतर परिणाम दे सकते हैं। जब बच्चे के माता-पिता उसकी शिक्षा में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं, तो उनके बच्चे हाई स्कोर करते हैं। ऐसे बच्चे हायर एजुकेशन में बहुत रुचि दिखाते हैं, और निर्धारित समय के अंदर कॉलेज के माध्यम से ग्रेजुएट हो जाते हैं और अन्य बच्चों की तरह कॉलेज ड्रॉप आउट नहीं होते। ये सभी चीजें बच्चे के व्यवहार में सकारात्मक प्रतिक्रिया पैदा करती हैं, जो उसे एक महान सामाजिक और लीडरशिप स्किल वाला व्यक्ति बनने में मदद करती हैं, ऐसे बच्चों में बदलते परिवेश के अनुकूल खुद को ढालने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं और साथ ही वे जीवन को सही तरीके से जीने के लिए आवश्यक सिद्धांतों को अपने अंदर विकसित करते हैं।

माता-पिता अपने बच्चे की शिक्षा में कैसे बाधा डालते हैं?

हर बच्चे की शिक्षा पर पेरेंट्स के प्रभाव को कम नहीं समझा जा सकता है और आमतौर पर कई माता-पिता खुद इसके महत्व को कम आंकते हैं। यही वजह है कि कई बार उनका व्यवहार बच्चे की शिक्षा प्रक्रिया को समर्थन देने के बजाय उसमें बाधा डालने का होता है। आसान भाषा में कहें तो आपकी लापरवाही से आपके बच्चे के दिमाग पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आइए नीचे जानते हैं बच्चे की शिक्षा पर किस प्रकार प्रभाव पड़ता है: 

  1. बच्चे के सुधार या अनुशासन के लिए स्कूल द्वारा दी गई किसी भी शिकायत या सुझाव की अनदेखी करना।
  2. एजुकेशन सिस्टम के खराब होने के बारे में स्कूल में खुल कर बोलना या बात करना।
  3. किसी भी चीज के पीछे की सच्चाई को समझने की कोशिश किए बिना बच्चे को लगातार सलाह देना।
  4. उसकी कमियों और असफलताओं के लिए स्कूल या शिक्षकों या किसी और को दोष देकर बच्चे को डांटना।
  5. बिना दूसरे दृष्टिकोण पर चर्चा किए स्कूल के बारे में अपने बच्चे के साथ किसी गलत पहलू पर सहमत हो जाना।
  6. अपने बच्चे को गलत कारणों से स्कूल की छुट्टी की अनुमति देना और ऐसा अक्सर करते रहना।
  7. पढ़ाई को लेकर स्कूल या टीचर किस प्रकार गलत है इस पर ध्यान देना।
  8. बच्चे के सामने पढ़ाई के मेथड की बुराई करना और उसके बारे में गलत बातें बोलना।

घर पर बच्चे की शिक्षा में माता-पिता की भूमिका

हर सिस्टम परफेक्ट नहीं होता। आज हमारे एजुकेशन सिस्टम में अपनी कमियां हैं और इसके चलते कुछ माता-पिता पूरी तरह से होम स्कूलिंग का विकल्प चुनते हैं। हालांकि, यह सभी की जरूरत नहीं है और सबके लिए ऐसा करना संभव भी नहीं है, लेकिन घर पर पढ़ाई शुरू करना एक अच्छा कदम है। इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपने बच्चे को अधिक से अधिक होमवर्क दें, बल्कि आप ऐसे में आप उसे शिक्षा की प्रक्रिया के साथ तालमेल बिठाने में मदद करने के लिए प्रेरित करना सिखाएं।

  • बच्चे से बात करें कि उसका स्कूल कैसा था और उससे जुड़ी अलग-अलग मेमोरीज के बारे में पूछें। उसने स्कूल में अच्छा प्रदर्शन किया या नहीं, इस बारे में उसे लंबे भाषण न दें, बल्कि उसे इसके बारे में इंटरेस्टिंग फैक्ट्स बताएं।
  • शुरुआती चरणों में, बच्चे को स्कूल की विभिन्न एक्टिविटीज में हिस्सा लेने में मदद की जरूरत होती है। याद रखें कि अब सिस्टम आपके जमाने से बहुत बदल गया है, इसलिए यह आपके बच्चे के लिए उतना आसान नहीं होगा जितना आपके लिए था। इसलिए उसकी मदद करें।
  • ऐसे मामले में जहां टीचर या स्कूल ने कोई गलती की है या कोई निर्णय लिया है जो सही नहीं है, तो बच्चे को समझाएं कि शिक्षक को आपके बारे में जानने के लिए समय लगता है। वे भी गलतियां कर सकते हैं और हम उनके साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
  • स्कूल में उसका दिन कैसा रहा, यह जानने के लिए बच्चे के साथ रोज खुलकर एक बार बात जरूर करें। इसे आर्मी रिपोर्टिंग एक्सरसाइज की तरह न समझें, जहां उसे हर मिनट का हिसाब देना हो। जिस समय बच्चा वापस स्कूल से आता है और फ्रेश होकर खाना खाता है, तब आप उसके साथ बैठ सकती हैं और स्कूल में हुई विभिन्न चीजों के बारे में बात कर सकती हैं। यह बातचीत केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि अन्य टॉपिक के बारे में भी होनी चाहिए। उसे दोस्तों के बारे में, कोई समस्या का सामना करना पड़ा हो तो, या कोई भी लॉजिकल बात आदि के बारे में बताने दें।
  • जितनी जल्दी हो सके होमवर्क का शेड्यूल बनाएं। कुछ बच्चे स्कूल से आने के बाद बहुत थक जाते हैं और फिर से पढ़ाई करने से पहले कुछ देर खेलना पसंद करते हैं। वहीं अन्य बच्चे तुरंत होमवर्क करना पसंद करते हैं और फिर अपना समय दूसरी एक्टिविटीज में व्यतीत करते हैं। आप इस बात पर ध्यान दें कि आपके बच्चे के लिए क्या काम करता है और उसे उस शेड्यूल के हिसाब से काम करने दें जब तक वो पूरी तरह से अपने शेड्यूल का पालन न करने लगे।
  • आज के समय में हर तरफ डिस्ट्रैक्शन है, चाहे आप कहीं भी हों। स्कूल एक फोकस्ड माहौल प्रदान करता है जहां हर कोई पढ़ता है और बच्चे की सहायता के लिए टीचर वहां मौजूद होते हैं। अपने घर में भी ऐसा ही माहौल बनाए रखने की कोशिश करें। डिनर टेबल या हॉल में होमवर्क न करने दें, जहां टेलीविजन या कंप्यूटर जैसी ध्यान भटकाने वाली चीजें मौजूद हो वहां से भी बचें। उसे होमवर्क करने के लिए शांत माहौल दें।
  • पढ़ाई के लिए सही माहौल सिर्फ ध्यान भटकने के बारे में नहीं है। यह मानसिक और भावनात्मक शांति प्राप्त करने के बारे में भी है। घर में लगातार वाद-विवाद, लड़ाई-झगड़े और कलह से भरे माहौल में कोई भी बच्चा अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाएगा। भले ही ये चीजें एक अलग कमरे में हो रही हों, आपका बच्चा इसके बारे में सोचता है और ये सभी घटनाएं अनजाने में ही सही लेकिन उसके दिमाग पर हावी हो जाती हैं। ऐसे में तब पढ़ाई शायद ही कभी उसकी प्राथमिकता बन पाए। इस बात का ध्यान रखें कि आप अपने घर के माहौल को सही तरीके से संभालती हैं।

स्कूल में बच्चे की शिक्षा में पेरेंट्स कैसे शामिल हो सकते हैं?

यह जानते हुए कि बच्चे की शिक्षा में माता-पिता रोल कितना महत्वपूर्ण है, ऐसे कुछ तरीके हैं जिनसे आप अपने बच्चे की शिक्षा प्रक्रिया में शामिल हो सकती हैं और सुनिश्चित कर सकती हैं कि उसे इसका सबसे ज्यादा फायदा मिले।

1. सही स्कूल का चयन करें

आप यह समझें कि बच्चे का हित कहां हैं और एक सही स्कूल चुनने का प्रयास करें जो हर मायने में उसे पढ़ाई के साथ-साथ सुविधा प्रदान कर सके। घर से दूरी और आने-जाने का समय जैसे अन्य कई फैक्टर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन चूंकि आपका बच्चा दिन का एक बड़ा हिस्सा स्कूल में बिता रहा है, इसलिए यह सारी चीजों से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

2. रिश्ते बनाना

स्कूल को एक ऐसी संस्था के रूप में न मानें जहां आप बच्चे को सिर्फ भेजती हैं और वह पढ़कर घर वापस आ जाता है। इसे ऐसे समझें जैसे कि यह एक एक्सटेंडेड फ्रेंड्स सर्किल है और स्कूल के अलग-अलग स्टाफ सदस्यों को जानें। अपने बच्चे के क्लास टीचर से नियमित रूप से बात करें और उससे अच्छे रिश्ते बनाएं। अपने बच्चे को भी टीचर के साथ खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करें।

3. स्कूल की घटनाओं के बारे में जागरूक रहना

कई माता-पिता मुश्किल से किसी भी एक्टिविटी से अवगत होते हैं जो स्कूल ने बच्चों के लिए प्लान की होती है। अपने बच्चे के दोस्तों के माता-पिता के साथ बात करने का प्रयास करें और एक दूसरे को लूप में रखने के लिए एक चैट ग्रुप भी बनाएं। किसी भी समस्या या मसले का तुरंत समाधान निकाला जा सकता है। स्कूल द्वारा आयोजित कई कार्यक्रमों में भाग लें, भले ही आपका बच्चा उनमें भाग न ले रहा हो। स्कूल द्वारा दिए जाने वाले किसी भी टूल्स का उपयोग करके अपने बच्चे की प्रगति पर नजर रखें और उसके टीचर या काउंसलर के साथ मीटिंग करें।

अन्य तरीके जिनसे माता-पिता अपने बच्चे की पढ़ाई में शामिल हो सकते हैं

इनके अलावा, माता-पिता कई अन्य तरीकों से भी  बच्चों की शिक्षा में उनकी मदद कर सकते हैं।

1. एक्टिव लर्निंग

अपने बच्चे को यह समझने में मदद करें कि लर्निंग और पढ़ाई केवल स्कूल और होमवर्क तक ही सीमित नहीं है। यह एक ऐसी हैबिट है जो बाद में जीवन भर उसकी मदद करेगी। 

2. खेल-खेल में सीखना

किसी भी चीज को सीखने के लिए केवल किताबों का सहारा न लें। बच्चे को सिखाने के लिए किसी भी विषय को खेल या एक्टिविटीज में बदल दें जहां आपका बच्चा अपनी रचनात्मकता का भी प्रयोग कर सके।

3. सीखने को प्राथमिकता दें

लक्जरी या मजेदार एक्टिविटीज और अपने बच्चे की शिक्षा के बीच को चुनते समय, हमेशा शिक्षा और सीखने को उसके जीवन में सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

4. बच्चे के साथ जुड़ें

यदि आपके बच्चे को कई ध्यान भटकाने वाली चीजों के कारण पढ़ाई करने में परेशानी होती है, तो अपने बच्चे की पढ़ाई के समय के साथ अपने काम को निर्धारित करने का प्रयास करें। इससे सभी के लिए पढ़ाई का माहौल बनेगा।

5. घुमाने ले जाएं

चाहे स्कूल द्वारा या खुद करें, लेकिन बच्चे को साइंस पार्क या म्यूजियम घुमाने जरूर ले जाएं जो शिक्षा में उसकी रुचि को बढ़ाने में मदद करता है।

6. ब्रेक दें

आपके बच्चे की जिंदगी में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं होनी चाहिए। उसे पढ़ाई का दबाव डाले बिना अन्य एक्टिविटीज और खेलों का मजा जरूर लेने दें।

7. अच्छा व्यवहार करने पर इनाम दें

बच्चों को अपनी नैतिक दिशा और व्यवहार को विकसित करने के लिए इस उम्र में बहुत अधिक प्रोत्साहन और मान्यता की आवश्यकता होती है। इस बात का ध्यान रखें कि आप उसे कोई अच्छा काम करने पर कुछ न कुछ इनाम जरूर दें।

आज की आधुनिक जिंदगी में बच्चे की शिक्षा में माता-पिता के रोल में पहले की तुलना में काफी बदलाव आया है। सही मायने में एक प्रजाति के रूप में हमने जो सफलता हासिल की है उसका परिणाम है और यह दिखाता है कि हमारी अगली पीढ़ी हमसे बेहतर होने वाली है। अपने बच्चे का सपोर्ट करके उसे बेहतर इंसान बनने में मदद करें।

यह भी पढ़ें:

बच्चों को पढ़ना कैसे सिखाएं
बच्चों को अक्षर कैसे सिखाएं
बच्चोंं की लिखावट कैसे सुधारें

समर नक़वी

Recent Posts

कबूतर और मधुमक्खी की कहानी | The Story Of The Dove And Bee In Hindi

यह कहानी एक कबूतर और एक मधुमक्खी के बारे में है कि कैसे दोनों ने…

7 days ago

हाथी और बकरी की कहानी | Elephant And Goat Story In Hindi

ये कहानी जंगल में रहने वाले दो पक्के दोस्त हाथी और बकरी की है। दोनों…

7 days ago

चांद पर खरगोश की कहानी | The Hare On The Moon Story In Hindi

इस कहानी में हमें जंगल में रहने वाले चार दोस्तों के बारे में बताया गया…

1 week ago

एक राजा की प्रेम कहानी | A King Love Story In Hindi

ये कहानी शिवनगर के राजा की है। इस राजा की तीन रानियां थीं, वह अपनी…

1 week ago

तेनालीराम की कहानी : कौवों की गिनती | Tenali Rama Stories: Counting Of Crows Story In Hindi

तेनालीराम की कहानियां बच्चों को बहुत सुनाई जाती हैं। ये कहानियां बुद्धिमत्ता और होशियारी का…

2 weeks ago

तीन मछलियों की कहानी | Three Fishes Story In Hindi

ये कहानी तीन मछलियों की है, जो की एक दूसरे की बहुत अच्छी दोस्त थी।…

2 weeks ago