गर्भावस्था के दौरान पेट में दर्द

गर्भावस्था के दौरान पेट में दर्द

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गर्भावस्था के दौरान पेट में उत्पन्न गंभीर दर्द, गर्भावस्था से संबंधित समस्याओं का संकेत हो सकता है और इसे पूर्ण चिकित्सीय जाँच की ज़रूरत है।

यह लेख गर्भवती महिलाओं में तीव्र पेट दर्द के लक्षण और कारण, गर्भवती महिलाओं में गंभीर बीमारियाँ और साथ ही अनुशंसित उपचार पर निर्धारित है।

पेट दर्द क्या है?

अधिकांश गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान किसी न किसी समय अपने पेट में ऐंठन, हल्का दर्द और वेदना महसूस होती है। पेट में दर्द होना सामान्य है क्योंकि गर्भ में पल रहे बढ़ते हुए शिशु के कारण आपकी मांसपेशियों और जोड़ों पर अत्यधिक दबाव पड़ सकता है, जिस कारण आपको पेट में बेचैनी महसूस हो सकती है।

आराम करने से, गर्म पानी से स्नान करने से या दर्द की जगह पर गर्म पानी की बोतल या बैग रखने से, आपका पेट दर्द कम हो सकता है।हालांकि, अगर आपके पेट या उसके आसपास के क्षेत्र में दर्द बना रहता है या अधिक तीव्र है, तो यह गर्भावस्था से संबंधित एक गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है।

गर्भावस्था के दौरान पेट में दर्द

एक गर्भवती माँ अपनी गर्भावस्था के 3 त्रैमासिकों के दौरान विभिन्न प्रकार के पेट दर्द महसूस करती है। नीचे लिखी सूची हर त्रैमासिक के दौरान होने वाले दर्द के बारे में चर्चा करता है ।

1. पहले त्रैमासिक में होने वाला पेट दर्द

आपके पहले त्रैमासिक के दौरान, आप अपने पेट में ऐंठन से होने वाला दर्द महसूस कर सकती हैं, जो आपके बच्चे में होने वाले सामान्य विकास परिवर्तनों के कारण होता है। ऐंठन का मतलब है कि आपको आपके पेट में दोनों तरफ से एक खिचाव महसूस होता है। गर्भाशय का आकार बढ़ने पर ऐंठन महसूस होती है जिससे सहायक स्नायुबंधन और मांसपेशियों में भी खिचाव महसूस होता है। गर्भावस्था में ऐंठन को सामान्य माना जाता है और यह गैस और आफुल्लन, कब्ज या संभोग जैसे अन्य कारणों से भी हो सकता है।

ऐसी महिलाएं जिन्होंने गर्भवती होने के लिए आई.वी.एफ उपचार की सहायता ली है, उन्हें ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम ( .एच.एस.) नाम की बीमारी हो सकती है, जिस कारण भी पेट में दर्द होता है। यह दर्द मुख्य रूप से प्रजनन दवाओं द्वारा अंडाशय में उत्तेजना के कारण होता है। यह आमतौर पर गर्भावस्था के कुछ हफ्तों तक रहता है और यदि यह दर्द उसके बाद भी क़ायम रहता है, तो प्रजनन क्लिनिक में संपर्क करें।

2. दूसरे त्रैमासिक में होने वाला पेट दर्द

गर्भावस्था के दूसरे त्रैमासिक में राउंड लिगामेंट में दर्द काफ़ी सामान्य है, जो 2 बड़े लिगामेंट के कारण होता है जो गर्भाशय को ऊसन्धि (ग्रोइन) से जोड़ता है। राउंड लिगामेंट की मांसपेशी गर्भाशय को सहारा देती है और जब इसपर तनाव आता है, तब पेट के निचले हिस्से में आप एक तीव्र दर्द, या हल्कासा दर्द महसूस करते हैं। कुछ महिलाओं को कूल्हे या रान और इनके आस पास के क्षेत्र में भी इस तरह का दर्द महसूस होता है।

गर्भावस्था के दौरान राउंड लिगामेंट में दर्द को सामान्य माना जाता है और इससे कोई बड़ी समस्या उत्पन्न नहीं होती है।

3. तृतीय त्रैमासिक में होने वाला पेट दर्द

तृतीय त्रैमासिक के दौरान , गर्भवती महिलाओं को पेट, पीठ और कूल्हों सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द महसूस होता है। बच्चे के जन्म की तैयारी के लिए शरीर के संयोजी ऊतक शिथिल हो जाते हैं जिस कारण जन्मनली का लचीलापन भी बढ़ता है। ऐसे में ज़्यादातर गर्भवती महिलाएं अपने कूल्हों या पीठ के निचले हिस्से में दर्द का अनुभव करती हैं , जो संयोजी ऊतकों के शिथिलता और खिचाव का कारण होता है।

तृतीय त्रैमासिक में होने वाले पेट दर्द के कई कारण हैं:

  • गैस और कब्ज

गर्भवती महिलाओं में गैस मुख्य रूप से प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन के बढ़ने से होती है। बढ़ते हुए हॉर्मोन के कारण जठरांत्र संबंधी मार्ग धीमा पड़ जाता है, जो भोजन के प्रवाह को भी धीमा कर देता है। फाइबर युक्त आहार के नियमित सेवन के साथ अधिक पानी पीने और व्यायाम करने से गैस और कब्ज़ जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है। अन्य उपचारों में औषधीय मल सॉफ्टनर (मल को नर्म और कम कठिन बनाता है) या कृत्रिम फाइबर भी शामिल है।

  • ब्रेक्सटनहिक्स संकुचन

ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन, संकुचन का भ्रामक रूप होता है जिसके परिणामस्वरूप आमतौर पर पेट की मांसपेशियों पर खिचाव महसूस होता है। वास्तविक संकुचन, जो अक्सर महसूस होते हैं, अधिक लंबे समय तक रहते हैं और बहुत पीड़ादायक भी हो सकते हैं, ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन उनसे बहुत अलग हैं। ब्रेक्सटन हिक्स ज़्यादातर निर्जलीकरण के कारण होता है इसलिए अधिक मात्रा में पानी पीने से और नियमित आराम करने से इस समस्या को ख़त्म करने में मदद मिल सकती है।

गर्भावस्थासंबंधी पेट दर्द के लक्षण

यदि आप अपनी गर्भावस्था के किसी भी चरण में कोई भी निम्नलिखित लक्षण का अनुभव कर रही हैं, तो यह एक गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है, और ऐसी स्थिति में आपको अपने डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए:

  • पेशाब के समय रक्तस्राव या जलन महसूस होना।
  • आपकी गर्भावस्था के 12 हफ्ते पूर्ण होने से पहले पेट में दर्द महसूस होना।
  • गर्भावस्था के शुरुआती समय में योनि से हल्का रक्तस्राव या अधिक रक्तस्राव होना।
  • एक घंटे के भीतर 4 से अधिक बार संकुचन होना।
  • असहनीय पेट दर्द होना।
  • सर में अत्यधिक दर्द होना।
  • बारबार उल्टी होना या बुखार आना।
  • आपके चेहरे, पैरों या हाथों पर असामान्य सूजन आना।
  • किसी भी तरह का असामान्य योनि से स्राव होना।

कुछ मामलों में यह लक्षण आपकी गर्भावस्था से संबंधित नहीं होते हैं और अन्य बीमारी जैसे कि डिम्बग्रंथि पुटी (ओवेरियन सिस्ट), गुर्दे में समस्या, मूत्रमार्ग संक्रमण या पित्ताशय की समस्याओं के लक्षण हैं।

गर्भवती महिलाओं में पेट दर्द के कारण

सभी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पेट में बेचैनी होती है, जिसे सामान्य माना जाता है।

गर्भवती महिलाओं में पेट या उसके आस पास के क्षेत्र में दर्द का एक प्राथमिक कारण आपके गर्भाशय का बढ़ता आकार है, जो आपके बच्चे की वृद्धि के साथ बड़ा होता जाता है। गर्भाशय में खिचाव के कारण पेट के निचले हिस्से में अक्सर दर्द महसूस होता है। आपके गर्भाशय का बढ़ता वज़न और आकार भी इसके सहायक स्नायु और मांसपेशियों पर काफ़ी दबाव डालता है, जिससे नियमित रूप से ऐंठन महसूस होती है।

क्या गर्भावस्था के दौरान पेट में दर्द होना सामान्य है?

महिलाओं में गर्भावस्था के शुरुआती समय पर पेट के निचले हिस्से में बाएं तरफ दर्द होना सामान्य हैपरंतु पेट में किसी भी तरह का तीव्र या तेज़ दर्द काफ़ी चिंताजनक है।

ऐंठन के साथ पेट के निचले हिस्से में दर्द, जिसे राउंड लिगामेंट दर्द कहा जाता है, इसे गर्भावस्था की पूरी अवधि में सामान्य माना जाता है। गर्भावस्था के दौरान पेट में दर्द होना इस बात का भी संकेत है कि आपके गर्भावस्था के संपूर्ण 9 महीनों के लिए भ्रूण को पालने के लिए आपका गर्भाशय तैयार हो रहा है।

गर्भावस्था के दौरान पेट दर्द से जुड़ी चिंताजनक समस्याएं

नीचे लिखी हुई सूचि ऐसी कुछ गंभीर समस्याओं के बारे में है जो संभवत: गर्भावस्था के दौरान होने वाले तीव्र पेट दर्द के कारण उत्पन्न होती हैं।

1. अस्थानिक गर्भावस्था

अस्थानिक गर्भावस्था तब होती है जब अंडा गर्भाशय के अलावा कहीं और प्रत्यारोपित होता है। ज़्यादातर मामलों में, अंडा फैलोपियन टियूब में ही प्रत्यारोपित किया जाता है, चिकित्सा रिकॉर्ड के अनुसार, प्रत्येक 50 गर्भावस्थाओं में अस्थानिक गर्भावस्था एक बार होती है। इस स्थिति में, महिलाओं को आमतौर पर पेट में दर्द और गर्भावस्था के छठें और दसवें सप्ताह के बीच रक्तस्राव होता है। ज़्यादातर अस्थानिक गर्भावस्था का निदान केवल इसके चौथे और आठवें सप्ताह के बीच ही होता है।

अस्थानिक गर्भावस्था और साधारण गर्भावस्था में भेद कर पाना बेहद मुश्किल है, ख़ासकर गर्भावस्था के शुरुआती समय में। ऐसे कुछ लक्षण हैं जो अस्थानिक गर्भावस्था का संकेत दे सकते हैं:

  • पेट के निचले हिस्से में दर्द का एहसास, जिसके बाद पेट के एक तरफ तेज़ दर्द महसूस होता है, जो बाद में पूरे पेट में फैल जाता है।
  • ऐसा दर्द जो गर्भवती महिला की हर गतिविधि के साथ बिगड़ता जाता है।
  • योनि से हल्का या अधिक रक्तस्राव होता है।
  • उल्टीचक्कर या बेहोशी जैसा महसूस होना ।
  • लगातार पेशाब जाने की आवश्यकता महसूस होना और पेशाब के समय जलन होना ।

वे महिलाएं जो निम्नलिखित चीज़ों से गुज़र चुकी हैं, उन्हें अस्थानिक गर्भधारण होने का ख़तरा ज़्यादा हैं:

  • अतीत में अस्थानिक गर्भावस्था
  • अन्तर्गर्भाशयअस्थानता
  • डिंबप्रणालीय बांधना
  • गर्भधारण करते समय अंतर्गर्भाशयी डिवाइस (आईयूडी)

एक अस्थानिक गर्भावस्था को तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है और इसे गर्भावस्था की पूर्ण अवधि तक रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है । आपकीस्त्रीरोग विशेषज्ञ या डॉक्टर अल्ट्रासोनोग्राफी टेस्ट के मदद से इस बात की आसानी से पुष्टि कर सकते है कि अंडा गर्भाशय में प्रत्यारोपित हुआ है या नहीं।

अस्थानिक गर्भावस्था

2. गर्भपात

गर्भावस्था के पहले त्रैमासिक में गंभीर पेट दर्द महसूस करने वाली महिलाओं के लिए यह एक बड़ी समस्या है। गर्भपात, या स्वतः गर्भपात, आमतौर पर गर्भावस्था के पहले 13हफ़्तों में होता है और यह लगभग 15-20% तक सारी गर्भावस्था पर गहरा असर डालता है।

संभावित गर्भपात के प्रमुख लक्षण नीचे दिए गए हैं:

  • पीठ में अत्यधिक दर्द
  • हर 5 – 20 मिनट में होने वाले संकुचन
  • ऐंठन या बिना ऐंठन के रक्तस्राव
  • योनि से हल्के रक्तस्राव या अधिक रक्तस्राव के साथ कम या ज़्यादा ऐंठन
  • योनि से ऊतक या गुठ्ठल जैसे पदार्थ निकलना
  • गर्भावस्था के अन्य लक्षण अचानक कम होना

3. समय से पहले प्रसव पीड़ा

ऐसी गर्भवती महिलाएं, जो लगातार पीठ दर्द के साथ, गर्भावस्था के 37 हफ़्तों से पहले ही नियमित रूप से संकुचन महसूस कर रहीं हैं, उन्हें समय से पहले प्रसव पीड़ा होने की संभावना है। समय से पहले की प्रसव पीड़ा गर्भावस्था के 24 वें और 37 वें सप्ताह के बीच कभी भी हो सकती हैं। इन हफ्तों के दौरान, आप अपने पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस कर सकती हैं, जो संकुचन के कारण होता है। संकुचन के बाद योनि स्त्राव या रक्तस्त्राव होता है।

अनुभवी डॉक्टर या स्त्रीरोग विशेषज्ञ, गर्भवती महिलाओं को इन हफ्तों के दौरान संकुचन होने पर तुरंत जाँच करवाने की सलाह देते हैं।

4. प्लासेंटल अब्रप्शन (गर्भनाल का एकाएक टूट जाना)

गर्भावस्था की अवधि पूरी होने से पहले गर्भाशय से गर्भनाल (जो शिशु तक ऑक्सीजन और पोषण पहुँचाता है) के अलग होने के कारण शिशुओं के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है। प्रत्येक 200 शिशु के जन्मों में एक बार प्लासेंटल अब्रप्शन होता है और यह आमतौर पर तृतीय त्रैमासिक के दौरान होता है। ऐसी गर्भवती महिलाएं, जिनका पिछले गर्भधारण के दौरान प्लासेंटल अब्रप्शन हुआ है, उन्हें इस समस्या से ज़्यादा खतरे के साथ अन्य समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे उच्च रक्तदाब, प्रीक्लेम्पसिया (प्रसवाक्षेप रोग) और पेट को क्षति।

प्लासेंटल अब्रप्शन के प्रमुख लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • लगातार पेट दर्द जो बदतर होते जाता है।
  • लंबे समय तक गर्भाशय का बहुत सख़्त होना।
  • तरल पदार्थ के साथ खून निकलना या समय से पहले अमनियोटिक सैक की झिल्ली टूट जाना।
  • द्रव के साथ खून निकलना।
  • पेट का कोमल हो जाना।

अधिकांश महिलाओं को प्लेसेंटा के अलग होने पर तुरंत प्रसव पीड़ा शुरू हो जाती है और वे आपातकालीन सीज़ेरियन ऑपरेशन से अपने बच्चे को जन्म देती हैं। हल्के अब्रप्शन में, डॉक्टर या तो गर्भावस्था को जारी रखने की अनुमति दे सकते हैं, या प्रसव पीड़ा को प्रेरित कर सकते हैं या सामान्य प्रसव का मार्ग चुनते हैं।

5. प्रीक्लेम्पसिया (प्रसवाक्षेप रोग)

प्रीक्लेम्पसिया एक हाइपरइंटेंसिव विकार है जो लगभग 5 -7% गर्भवती महिलाओं को होता है । यह गर्भावस्था के 20 हफ्तों के बाद होता है और इसके लक्षण उच्च रक्तदाब और पेशाब में प्रोटीन निकलना होता है। प्रीक्लेम्पसिया शिशु के विकास को धीमा कर सकता है, क्योंकि उच्च रक्तदाब के कारण गर्भाशय की रक्तवाहिकाओं पर दबाव आ सकता है, जिससे गर्भाशय में जाने वाले ऑक्सीजन और पोषक तत्वों का प्रवाह कम हो सकता है। प्रीक्लेम्पसिया से प्लासेंटल अब्रप्शन का ख़तरा भी बढ़ जाता है।

गंभीर प्रीक्लेम्पसिया के सामान्य लक्षण नीचे दिए गए हैं:

  • पेट के दाहिने हिस्से में तीव्र दर्द
  • पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, आमतौर पर दाहिनी तरफ़ पसलियों के नीचे
  • मतली
  • सरदर्द
  • सूजन
  • दिखने में दिक़्क़त

गर्भावस्था के 20 हफ्तों के बाद, अधिकांश डॉक्टर और स्त्रीरोग विशेषज्ञ किसी भी असामान्यता का पता लगाने के लिए, नियमित रूप से गर्भवती महिलाओं के रक्तदाब की जाँच करते हैं।

6. मूत्रमार्ग संक्रमण

चिकित्सा अनुमानों के अनुसार, लगभग 10% गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान मूत्रमार्ग संक्रमण होता है। हालांकि यदि मूत्रमार्ग संक्रमण का निदान जल्दी हो जाए तो इसका इलाज एंटीबायोटिक दवाइयों से हो सकता है, लेकिन इस समस्या को नज़रअंदाज़ करने से महिलाओं के गुर्दे में गंभीर संक्रमण भी हो सकता हैं जो समय से पहले ही प्रसव पीड़ा की संभावना को बढ़ाता है।

मूत्रमार्ग संक्रमण से जुड़े सामान्य लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पेट के निचले हिस्से में दर्द होना
  • पेशाब के दौरान पीड़ा या जलन होना
  • लगातार पेशाब करने की अत्यधिक आवश्यकता महसूस होना
  • धुंधला और बदबूदार पेशाब होना
  • गुप्तांग में जलन होना
  • लगातार हल्का बुखार लगना, पसीना आना और ठंड लगना
  • पीठ के निचले हिस्से, पसली के पंजर के नीचे, या श्रोणि की हड्डी के ऊपर दर्द महसूस होना । ऐसी स्थिति में मूत्रमार्ग संक्रमण गुर्दे तक फैलने की संभावना है।

अधिकांश डॉक्टर और स्त्रीरोग विशेषज्ञ जीवाणुओं की उपस्थिति का परीक्षण करने के लिए नियमित रूप से पेशाब की जाँच करते हैं जो मूत्रमार्ग संक्रमण का कारण बन सकते हैं।यदि मूत्रमार्ग संक्रमण का निदान जल्दी हो जाए, तो इसका इलाज एंटीबायोटिक दवाइयों द्वारा आसानी से हो सकता है।

7. पथरी

गर्भवती महिलाओं में होने वाले अपेंडिसाइटिस का निदान करना मुश्किल हो सकता है, जिसके कारण विलंब भी हो सकता है और परिणामस्वरूप महिलाओं को ज़्यादा ख़तरा हो सकता है । इसका मुख्य कारण यह है कि जैसेजैस गर्भाशय बढ़ता है, अपेंडिक्स ऊपर खींच लिया जाता है और नाभि या लीवर के पास स्थित होता है।

गर्भवती महिलाओं में अपेंडिसाइटिस के सामान्य लक्षण नीचे दिए गए हैं:

  • पेट के ऊपरी हिस्से में दाहिनी तरफ़ दर्द होना
  • भूख की कमी
  • मतली
  • उल्टी

पथरी

8. पित्ताशय की पथरी

गर्भवती महिलाओं के पित्ताशय में पाए जाने वाले पथरी को पित्ताशय की पथरी कहते हैं। यह पेट के ऊपरी हिस्से में दाहिनी तरफ़ स्थित होते है। इस समस्या के कारण कभी कभी पीठ और दाहिने कंधे के नीचे दर्द महसूस हो सकता है।

आम तौर पर उन महिलाओं को पित्त पथरी की समस्या होती है, जो:

  • जिनका वज़न अधिक होता है
  • 35 साल से ज़्यादा उम्र है
  • अतीत में इस समस्या का सामना कर चुकी हैं

गर्भावस्था में पेट दर्द के अन्य कारण

उपर्युक्त बिमारियों के अलावा, ऐसे और अनेक कारण हैं जिनसे गर्भावस्था में पेट दर्द होता है, जैसे कि:

  • पेट में विषाणु और खाद्य विषाक्तता
  • खाने के प्रति संवेदनशीलता
  • गर्भाशय का बढ़ना
  • गुर्दे में पथरी
  • हैपेटाइटिस
  • पित्ताशय रोग और अग्नाशयकोप, दोनों आमतौर पर पित्त पथरी की उपस्थिति के परिणामस्वरूप होते हैं।
  • गर्भाशय में फाइब्रॉएड, जो गर्भावस्था के दौरान बढ़ते हैं और इनसे पीड़ा भी होती है।
  • आंत्र रुकावट, जो आमतौर पर तृतीय त्रैमासिक में होता है। यह आंतों के ऊतक पर बढ़ते गर्भाशय के बढ़ते दबाव के कारण होता है।

गर्भावस्था के शुरुआती समय में पेट में ऐंठन

अधिकांश गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में पेट में ऐंठन भी होती हैं। अन्य मामलों की तरह, पेट में हल्की ऐंठन महसूस होना सामान्य है और बिलकुल भी चिंताजनक नहीं है। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में पेट में ऐंठन के कुछ सामान्य कारण नीचे दिए गए हैं:

  • संभोग के दौरान होने वाले कामोत्तेजना के पश्चात, महिलाओं को ऐंठन महसूस हो सकती हैं।

  • जब गर्भाशय की दीवारों पर भ्रूण रोपण होता है तब ऐंठन के साथ थोड़ा सा रक्तस्राव भी होता है। ऐंठन तब भी महसूस हो सकती है जब भ्रूण बच्चे के लिए उपयुक्त बनने हेतु अपना आकार बदलता है।

  • 12 हफ़्तों के बाद, गर्भवती महिलाओं को रान के दोनों तरफ तेज़ दर्द महसूस हो सकता है, ख़ासकर जब वे खड़ी होती हैं, अंगड़ाई लेती हैं या अपने शरीर को मोड़ती हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि गर्भ को सहारा देने वाले स्नायुओं पर खिचाव आता है।

गर्भावस्था के शुरुआती समय में होने वाले ज़्यादातर पेट में ऐंठन, छाती में जलन या मासिक धर्म में होने वाले दर्द जैसा महसूस होता है। यदि आप गर्भावस्था के दौरान पेट में ऐंठन महसूस कर रही हैं, तो अक्सर स्त्री रोग विशेषज्ञ या प्रसाविका से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।

गर्भावस्था के दौरान होने वाले पेट दर्द के उपचार

यदि आपको ऐसे कोई भी लक्षण नज़र आते हैं जिनसे कोई गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है, तो आप अपने डॉक्टर या स्त्रीरोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेना ही बेहतर है। हालांकि, यदि गर्भवती महिलाओं को पेट में हल्का दर्द महसूस होता है, तो वे नीचे दिए गए कोई भी उपचार घर पर ही आज़मा सकती हैं:

  • कुछ समय के लिए आराम करने या लेटने से दर्द से तुरंत राहत मिल सकती है, विशेष रूप से ऐसा दर्द जो ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन के कारण होता है।

  • हल्के गर्म या गुनगुने पानी से स्नान करने से पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द और ऐंठन से राहत मिल सकती है।

  • दर्द की जगह पर गर्म पानी की बोतल (कपड़े में लपेटकर) या बैग रखने से, आपका दर्द कम हो सकता है।

इसके अतिरिक्त, पेट दर्द की समस्या को कम करने के लिए आप नीचे दिए गए उपाय आज़मा सकती हैं:

  • स्ट्रेचिंग और योगासन जैसे हल्के व्यायाम ख़ासकर पहले त्रैमासिक में, गैस की समस्याओं के लिए मददगार साबित हो सकते हैं। आप प्रसाविका या किसी अन्य विशेषज्ञ से उन प्रसवपूर्व व्यायामों के बारे में मार्गदर्शन ले सकती हैं जो आपके लिए अनुकूल हैं।

  • ऐसी गतिविधियाँ न करें जिनमें आपको कमर से एकदम मुड़ने की ज़रूरत पड़ती हो।

  • निर्जलीकरण की समस्या से मुक्ति पाने के लिए, दिनभर में बहुत सारा पानी पिएं। निर्जलीकरण ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन के मुख्य कारणों में से एक है।

  • खाने का मात्रा कम रखें लेकिन दिन में बहुत बार खाएं। ऐसा आहार चुनें जो फाइबर युक्त हो, जैसे फल और सब्जियाँ।

  • समयसमय पर पेशाब करें और अपने मूत्राशय को नियमित रूप से खाली करें।

  • तेज़ गतिविधियाँ न करें, धीरेधीरे खड़े होने या बैठने की आदत बनाएं, यह आपकी ऐंठन कम करने में मदद करेगा।

हालांकि पेट में ऐंठन चिंता का विषय नहीं है, फिर भी यदि आप बेचैन हैं और ऐंठन की तीव्रता अधिक है तो डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।