गर्भधारण

प्राथमिक बांझपन – कारण और उपचार

यदि आप और आपके पति पिछले एक साल से बिना कोई सफलता हासिल किए हुए गर्भधारण करने की कोशिश कर रहे हैं, तो ऐसे में आपमें से कोई एक इन्फर्टाइल यानी बांझ हो सकता है। आज की भागती दौड़ती और तनाव से भरी जिंदगी के कारण, कई कपल इनफर्टिलिटी से पीड़ित होते जा रहे हैं या उन्हें बच्चे को गर्भ में धारण करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। प्राइमरी इनफर्टिलिटी के बारे में अधिक जानने के लिए इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि हो सकता है कि यह जानकारी आपके लिए सहायक साबित हो सके।

प्राइमरी इनफर्टिलिटी (प्राथमिक बांझपन) क्या है?

बता दें कि जब कोई कपल 12 महीने या उससे अधिक समय तक असुरक्षित यौन संबंध बनाता है, लेकिन उसके बावजूद गर्भधारण करने में असमर्थ होता है तो इसे प्राइमरी इनफर्टिलिटी कहा जाता है।

प्राथमिक बांझपन और गर्भधारण

प्राइमरी इनफर्टिलिटी की स्थिति तब होती है जब किसी जोड़े ने पहले कभी गर्भधारण नहीं किया हो और बच्चा पैदा करने में असफल रहे हों। यदि कोई जोड़ा पहले प्रेग्नेंट हो चुका है लेकिन वर्तमान में दोबारा गर्भधारण करने में असमर्थ है, तो इसे सेकेंडरी इनफर्टिलिटी कहा जाता है।

प्राइमरी इनफर्टिलिटी के मुख्य कारण

एक कपल में इनफर्टिलिटी के कारणों को इस तरह से वर्गीकृत किया जाता है:

1. पुरुषों में

पुरुषों में प्राइमरी इनफर्टिलिटी नीचे दिए गए कारणों से जुड़ी हो सकती है:

  • स्पर्म काउंट कम होना
  • स्पर्म की गतिशीलता में समस्या होना
  • शुक्राणु का असामान्य तरीके से काम करना
  • अधिक शराब का सेवन करना
  • चेन स्मोकिंग करना
  • उम्र के कारण
  • अंडकोष में इंफेक्शन होना

2. महिलाओं में

महिला में प्राइमरी इनफर्टिलिटी इन निम्न कारणों से हो सकती है:

  • ओव्यूलेशन की कमी या उसमें समस्या आना
  • हार्मोन बैलेंस बिगड़ना
  • पीसीओएस या ओवरी में सिस्ट होना
  • अत्यधिक शराब पीना
  • मैच्योर अंडे का उत्पादन करने में असमर्थ होना
  • उम्र
  • परिपक्व अंडे का गर्भाशय की परत से जुड़ने में विफल होना।

प्राइमरी इनफर्टिलिटी का उपचार

प्राइमरी इनफर्टिलिटी का इलाज अलग-अलग मामले के आधार पर किया जाता है। कई ऐसे फैक्टर्स हैं जो प्राइमरी इनफर्टिलिटी के लिए उपयोग किए जाने वाले उपचार को प्रभावित करते हैं जैसे कि दोनों पार्टनर्स की उम्र, प्राइमरी इनफर्टिलिटी टेस्ट, इनफर्टिलिटी का सही कारण और कपल कितने समय से गर्भधारण करने की कोशिश कर रहा है। इस ट्रीटमेंट शामिल हैं:

1. असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी)

एआरटी को इस उपचार के एक विकल्प के रूप में माना जाता है इस विकल्प को तब चुना जाता है जब एक महिला स्वाभाविक रूप से और फर्टिलिटी दवाओं की मदद से गर्भवती होने में असमर्थ होती है। एआरटी इन निम्नलिखित तरीके की मदद से महिलाओं में आर्टिफिशियल इंप्लांटेशन करता है:

  • इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ): आईवीएफ एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक महिला के अंडे को पुरुष के स्पर्म के साथ बाहर फर्टिलाइज किया जाता है और फिर फर्टिलाइजेशन के 3-5 दिनों के अंदर भ्रूण को महिला के गर्भ में इम्प्लांट कर दिया जाता है।
  • वाइब्रेटर स्टिम्युलेशन या इलेक्ट्रिक इजैक्युलेशन: वाइब्रेटर स्टिम्युलेशन एक दर्द रहित और नॉन अडाप्टिव प्रक्रिया है जिससे रीढ़ की हड्डी की समस्या वाले पुरुषों के शुक्राणुओं को इकट्ठा किया जाता है, जो पुरुष प्राकृतिक तरीके से इजैक्युलेशन नहीं कर सकते हैं। इलेक्ट्रिक इजैक्युलेशन का उपयोग उन पुरुषों के लिए किया जाता है जो वाइब्रेटर स्टिम्युलेशन प्रक्रिया करने में असफल होते हैं। इसके बात कलेक्ट किए गए स्पर्म को फर्टिलाइजेशन के लिए महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
  • असिस्टेड हैचिंग: असिस्टेड हैचिंग एक ऐसी नई टेक्नोलॉजी है जिन्हें फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट द्वारा उन जोड़ों के लिए अपनाया जाता है, जो एक या दो बार आईवीएफ साइकिल में विफल रहे हैं और साथ ही उनके भ्रूण की क्वालिटी भी खराब होती है। यह प्रक्रिया भ्रूण की ऊपरी परत में छेद करके गर्भाशय की बाहरी परत से जुड़ने के लिए भ्रूण को सहायता देता है।
  • इंट्रासाइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई): इस प्रक्रिया में फर्टिलाइजेशन के लिए पुरुष पार्टनर के सिर्फ सिंगल शुक्राणु को महिला के अंडों में सीधे इंजेक्ट किया जाता है। आईवीएफ प्रक्रिया की तरह, आईसीएसआई में भी दोनों पार्टनर्स से शुक्राणु और अंडे कलेक्ट किए जाते हैं। बस केवल एक ही अंतर है फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया। क्योंकि आईवीएफ में शुक्राणु और अंडों को प्राकृतिक तरीके से मिक्स किया जाता है और आईसीएसआई में स्पर्म को सुई का उपयोग करके अंडे में इंजेक्ट किया जाता है।

एआरटी प्रक्रिया की सफलता दर दोनों पार्टनर की उम्र और मेडिकल हेल्थ जैसे अहम फैक्टर्स पर निर्भर करता है। 35 साल से कम उम्र की महिलाओं में एआरटी के माध्यम से 35 साल से अधिक उम्र की महिलाओं की तुलना में सफलता की संभावना अधिक होती है।

2. फर्टिलिटी दवाएं

फर्टिलिटी दवाएं ओवुलेशन की समस्याओं वाली महिलाओं को अच्छे क्वालिटी वाले अंडे का उत्पादन करने के लिए अंडाशय को उत्तेजित करने में मदद करती हैं। बांझपन के इलाज के लिए सबसे ज्यादा इन दवाओं का उपयोग किया जाता है:

  • क्लोमीफीन सिट्रेट: आमतौर पर क्लोमिड के नाम से जानी जाने वाली इस दवा का उपयोग उन महिलाओं में ओव्युलेशन को प्रेरित करने के लिए किया जाता है जो पीसीओएस जैसी मेडिकल समस्या के कारण ओव्यूलेट नहीं कर पाती हैं।
  • मेटफॉर्मिन हाइड्रोक्लोराइड: पीसीओएस और इंसुलिन प्रतिरोध वाली महिलाओं में ओव्यूलेशन को बढ़ावा देने के लिए यह टैबलेट आमतौर पर क्लोमिड के साथ दी जाती है।
  • फॉलिस्टिम: इस दवा का उपयोग ओवरीज को अधिक फॉलिकल्स उत्पन्न करने के लिए और इसे स्टिम्युलेट करने के लिए किया जाता है जिसके कारण अंडे का अधिक उत्पादन होता है। यह गोनल, ब्रेवेल, प्योरगॉन आदि ब्रांड के तहत भी उपलब्ध है।

प्राइमरी इनफर्टिलिटी उपचार के साइड इफेक्ट्स

प्राइमरी इनफर्टिलिटी उपचार के कारण होने वाले प्रमुख दुष्प्रभावों में शामिल हैं:

1. तनाव और मानसिक थकान

इनफर्टिलिटी का इलाज वास्तव में हमारे दिमागी स्वास्थ्य पर भारी असर डालता है और बहुत अधिक स्ट्रेस, मूड स्विंग, सिरदर्द, बेचैनी और डिप्रेशन का कारण बनता है। यह हार्मोन असंतुलन या इसमें इस्तेमाल होने वाली दवा के कारण होता है।

2. एक से अधिक बच्चों का जन्म

फर्टिलिटी उपचार में अक्सर एक से अधिक बच्चे पैदा होने का जोखिम शामिल होता है, यानी कि जुड़वां या अन्य मामलों में ट्रिपल बच्चे पैदा होने का जोखिम।

3. जन्म दोष

बांझपन के इलाज के कारण आपको समय से पहले प्रसव हो सकता है, साथ ही अन्य बच्चे को अन्य जोखिम जैसे सेरेब्रल पाल्सी, नर्वस डिसऑर्डर या हार्ट या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल से जुड़े प्रभाव वाले जन्म दोष हो सकते हैं।

4. ओवेरियन हाइपर स्टिमुलेशन सिंड्रोम

आईवीएफ जैसे इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट महिलाओं में ओएचएसएस का कारण बनते हैं जिसके कारण ओवरीज बढ़ जाती हैं। ओएचएसएस के कारण सूजन, पेल्विक डिस्कम्फर्ट, डिहाइड्रेशन, पेशाब करने में कठिनाई आदि समस्याएं होती हैं।

5. जन्म के समय वजन कम होना

कई बार इलाज की वजह से बच्चे का समय से पहले जन्म हो जाता है और ऐसे में बच्चे का वजन बहुत कम होता है

अपने डॉक्टर से खुलकर बात करना क्यों जरूरी है?

बांझपन से जुड़ा हर एक मामला एक-दूसरे से अलग होता है। इसलिए यह बेहत जरूरी है कि अपने सभी लक्षणों और समस्याओं के बारे में अपने डॉक्टर को ईमानदारी से बताएं। आपके डॉक्टर को आपके फर्टिलिटी स्वास्थ्य के बारे में सभी जानकारी प्राप्त करना जरूरी है, जिसमें पहले मिसकैरेज या एबॉर्शन आदि हुआ हो। इससे आपको सही निदान और इनफर्टिलिटी के लिए एक सही इलाज लेने में मदद मिलती है।

एक कपल होने के नाते, आपको धैर्य रखने और एक दूसरे को सपोर्ट करने की जरूरत होती है। ऐसे में स्ट्रेस और डिप्रेशन से मामला और बिगड़ जाएगा। इनफर्टिलिटी से जूझने के साथ-साथ आपको तनाव से निपटने के लिए बेहतरीन उपाय जैसे मेडिटेशन, योगा और सांस लेने वाले व्यायाम करने होंगे। ये आपके मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक होगा।

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समर नक़वी

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