गर्भावस्था

12 प्रकार के मिसकैरेज जिनकी जानकारी आपको होनी चाहिए

मिसकैरेज दुर्भाग्यपूर्ण घटना होती है, जिसमें गर्भ में पल रहे शिशु को मेडिकल या जेनेटिक कारणों से निकाल दिया जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है। अगर आप गर्भवती हैं या गर्भधारण की प्लानिंग कर रही हैं, तो इस मुद्दे पर जानकारी होना आपके लिए जरूरी है। इससे आकस्मिक मिसकैरेज की स्थिति में आप खुद को संभाल पाएंगी और यह समझ पाएंगी कि इसके लिए समाधान उपलब्ध हैं। 

मिसकैरेज क्या होता है?

गर्भावस्था के शुरुआती चरण के दौरान गर्भ में पल रहे बेबी की मृत्यु को मिसकैरेज कहा जाता है। मिसकैरेज को मेडिकल भाषा में स्पॉन्टेनियस अबॉर्शन कहा जाता है और आमतौर पर यह गर्भावस्था के 20वें सप्ताह (पहली तिमाही में) से पहले होता है। पब्लिश होने वाले अध्ययनों और रिपोर्ट के अनुसार लगभग 15 से 25% गर्भावस्थाओं में मिसकैरेज हो जाता है। लेकिन मिसकैरेज काफी पहले भी हो सकता है, यानी कि महिला को अपने प्रेगनेंसी का पता चलने से भी पहले या उसके पीरियड मिस होने से भी पहले। 

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मिसकैरेज के निम्नलिखित लक्षण होते हैं और नीचे दिए गए लक्षणों में से किसी का भी अनुभव होने पर अपने गाइनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करने की सलाह दी जाती है:

  • पेट में तेज दर्द
  • क्रैम्प
  • धीरे-धीरे बढ़ती हुई वेजाइनल ब्लीडिंग (हल्के रक्त स्राव से तेज रक्त स्राव)
  • क्लॉट्स के साथ टिशू का डिस्चार्ज
  • बुखार
  • पीठ और कमर का दर्द
  • अत्यधिक कमजोरी

अधिकतर मामलों में, जब गर्भस्थ शिशु में जेनेटिक समस्याएं होती हैं, तब मिसकैरेज होते हैं। अन्य कारणों में मां में डायबिटीज या थायराइड डिसऑर्डर जैसी मेडिकल समस्याएं, हार्मोनल समस्याएं, यूटरिन असामान्यताएं या इंफेक्शन शामिल हैं। इसके अलावा, कुछ रिस्क फैक्टर भी आपके मिसकैरेज के खतरे को बढ़ा सकते हैं। इनमें धूम्रपान, अत्यधिक कैफीन का सेवन, शराब का सेवन और वजन का कम या जरूरत से ज्यादा होना शामिल है। कभी-कभी जो पति-पत्नी गर्भावस्था के शुरुआती सप्ताहों के दौरान यौन संबंध बनाते हैं, उसमें भी मिसकैरेज हो सकता है। 

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विभिन्न प्रकार के मिसकैरेज

आपके डॉक्टर आपकी प्रेगनेंसी स्टेज और मिसकैरेज के कारण पर विचार करने के बाद आप की स्थिति का वर्गीकरण करेंगे। मिसकैरेज के विभिन्न प्रकार यहां पर दिए गए हैं:

1. थ्रेटेंड मिसकैरेज

जब प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के दौरान वेजाइनल ब्लीडिंग होने लगती है, लेकिन सर्विक्स बंद रहता है, तब इसे थ्रेटेंड मिसकैरेज का नाम दिया जाता है। वेजाइनल ब्लीडिंग के अलावा, पेट में गंभीर दर्द और कमर का दर्द इसके मुख्य लक्षण हैं। अगर आपकी ब्लीडिंग का कारण नहीं पता चल रहा है, तो डॉक्टर आपकी विस्तृत जांच करेंगे। कृपया ध्यान रखें, कि मिसकैरेज के साथ आपकी गर्भावस्था का खत्म होना निश्चित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, इस खतरे का सामना करने वाली आधी से अधिक महिलाओं की प्रेगनेंसी स्वस्थ रूप से आगे जारी रहती है। 

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2. इनएविटेबल मिसकैरेज

गर्भावस्था के शुरुआती समय के दौरान, अगर बहुत भारी बिल्डिंग हो और पेट में गंभीर दर्द हो, तो इसे इनएविटेबल मिसकैरेज कहा जाता है। लेकिन थ्रेटेंड मिसकैरेज के विपरीत, इस प्रकार के मिसकैरेज के दौरान सर्वाइकल कैनल फैल जाता है। इसका मतलब है, कि शरीर गर्भ को बाहर निकालने के लिए तैयार हो रहा है। 

3. पूरा मिसकैरेज

जिस मिसकैरेज में सभी प्रेगनेंसी टिशू गर्भाशय से बाहर आ जाते हैं, उसे कंप्लीट मिसकैरेज कहा जाता है। इसे कंप्लीट अबॉर्शन के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रकार के मिसकैरेज में पेट में अत्यधिक दर्द, भारी बिल्डिंग और पूरी तरह से प्रेगनेंसी टिशू का बाहर आ जाना शामिल है। इस प्रकार के मिसकैरेज के साथ ब्लीडिंग और दर्द तुरंत खत्म हो जाते हैं। हालांकि कंप्लीट मिसकैरेज की पुष्टि करने के लिए अल्ट्रासाउंड टेस्ट की सलाह दी जाती है। 

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4. अधूरा मिसकैरेज

कंप्लीट मिसकैरेज की तरह ही इसमें भी भारी बिल्डिंग और गंभीर दर्द होता है। इनकंप्लीट मिसकैरेज में भी सर्विक्स खुल जाता है, लेकिन प्रेगनेंसी टिशू पूरी तरह से बाहर नहीं आते हैं, जिसका पता अल्ट्रासाउंड के द्वारा लगाया जा सकता है। 

5. मिस्ड मिसकैरेज

जब प्रेगनेंसी के दौरान काफी जल्दी ही गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो जाती है और टिशू मां के गर्भ में बने रहते हैं, तो इसे मिस्ड मिसकैरेज कहा जाता है। अगर प्लेसेंटा जरूरी हार्मोन रिलीज करता रहे, तो महिला को प्रेगनेंसी के सभी लक्षण महसूस होते हैं। लेकिन समय के साथ प्रेगनेंसी के लक्षण धीरे धीरे कम होते जाते हैं। मिसकैरेज के आम लक्षण कुछ महिलाओं में नहीं दिखते हैं, लेकिन कुछ महिलाओं को वेजाइनल डिस्चार्ज और मरोड़ की समस्या होती है। 

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6. बार-बार मिसकैरेज

3 या उससे अधिक बार मिसकैरेज होने को रिकरेंट मिसकैरेज कहा जाता है। महिलाओं की एक बहुत ही कम संख्या (रिपोर्ट के अनुसार 1 से 2%) में बार-बार मिसकैरेजे देखे जाते हैं और ऐसे मामलों में डॉक्टर से इस समस्या पर बात करना या जरूरी कदम उठाने के लिए विशेषज्ञ से बात करना सबसे अच्छा होता है। 

7. ब्लाइटेड ओवम

इस प्रकार के मिसकैरेज में एक फर्टिलाइज्ड अंडा गर्भाशय की दीवार से जुड़ जाता है, लेकिन एक एंब्रियो के रूप में उसका विकास नहीं हो पाता है। इसे एंब्रीयॉनिक प्रेगनेंसी के नाम से भी जानते हैं और यह गर्भावस्था की शुरुआत में देखा जाता है। ब्लाइटेड ओवम के दौरान जेस्टेशनल सैक खाली रहता है और डायलेशन और क्यूरेटेज प्रोसीजर (क्यूरेट नामक एक उपकरण के इस्तेमाल से होने वाली सर्जिकल प्रक्रिया) के द्वारा गर्भाशय को साफ करना पड़ता है। 

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8. केमिकल मिसकैरेज

हालांकि यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन यह बहुत ही शुरुआती मिसकैरेज होता है, जो कि आमतौर पर गर्भावस्था के चौथे या पांचवें सप्ताह में देखा जाता है और यह अल्ट्रासाउंड स्कैन द्वारा पहचानने से पहले ही हो जाता है। स्पर्म अंडे को फर्टिलाइज तो कर देता है, लेकिन अंडा आगे जीवित नहीं रह पाता है। 

9. पहली तिमाही का मिसकैरेज

पहली तिमाही (शुरुआती 12 सप्ताह) के दौरान होने वाले गर्भपात को पहली तिमाही का मिसकैरेज कहते हैं। अध्ययन दर्शाते हैं, कि लगभग 80% मिसकैरेज पहली तिमाही के दौरान होते हैं और इन्हें वेजाइनल ब्लीडिंग, कमर के दर्द और प्रेगनेंसी लक्षणों की कमी के द्वारा पहचाना जा सकता है। 

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10. दूसरी तिमाही का मिसकैरेज

आपकी प्रेगनेंसी दूसरी तिमाही 12वें सप्ताह से शुरू होती है और 20वें सप्ताह में खत्म होती है। इस समय के दौरान होने वाले मिसकैरेज को दूसरी तिमाही का मिसकैरेज कहा जाता है, लेकिन यह अक्सर अप्रत्याशित होता है और काफी दुर्लभ होता है। 

11. एक्टोपिक मिसकैरेज

जब एंब्रियो गर्भाशय के बाहर इम्प्लांट हो जाता है, तब इसे एक्टोपिक गर्भावस्था कहा जाता है। आमतौर पर यहां पर फीटस जीवित नहीं रह पाता है। एक्टोपिक मिसकैरेज में ब्लीडिंग और उल्टियां होती हैं। ऐसे में जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। 

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12. मोलर प्रेगनेंसी

जब प्रेगनेंसी टिशू फीटस में बढ़ने के बजाय, गर्भाशय में असामान्य रूप से बढ़ने लगते हैं, तब इसे मोलर गर्भावस्था कहा जाता है। इसमें तुरंत ध्यान देने की जरूरत होती है और सर्जिकल प्रक्रिया से टिशू को बाहर निकाला जाता है।

ऊपर उल्लेख किए गए विभिन्न प्रकार के मिसकैरेज प्रेगनेंसी के विभिन्न पड़ाव में हो सकते हैं और इनमें एक्सपर्ट देखभाल और इलाज की जरूरत पड़ सकती है। इनसे निपटने के लिए व्यक्ति को भावनात्मक रूप से मजबूत होना जरूरी है और परिवार और दोस्तों से सहयोग के साथ इस कठिन समय से निकला जा सकता है। अपने डॉक्टर से बात करें और यह समझने की कोशिश करें, कि कौन सी स्वास्थ्य समस्याओं में मिसकैरेज की संभावना हो सकती है और साथ ही दोबारा गर्भवती होने के बारे में गाइडेंस भी प्राप्त करें। 

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यह भी पढ़ें: 

मिसकैरेज से कैसे बचें?
शुरुआती मिसकैरेज: कारण और लक्षण
लेट मिसकैरेज – कारण, लक्षण और इलाज

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पूजा ठाकुर

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