4 से 6 महीने के बच्चे की नींद

4 से 6 महीने के बच्चे की नींद

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एक बच्चे के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि सभी महत्वपूर्ण अंगों और शारीरिक कार्यों को विकसित करने के लिए अच्छी मात्रा में विश्राम की आवश्यकता होती है। मातापिता के रूप में, यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने बच्चे के सोने के तरीकों को देखते हुए यह सुनिश्चित करें कि उसे अच्छी नींद मिल रही है और यह भी सुनिश्चित करें कि उनकी नियमित दिनचर्या में खलल न पड़े।

ऐसे तरीके हैं जिनसे एक मातापिता बच्चे को अच्छी नींद की आदत डाल सकते हैं और आपके बच्चे में इन तरीकों की पहचान करने के लिए आपकी ओर से कुछ प्रयास करने की आवश्यकता होगी।

मेरे बच्चे का सोने का तरीका क्या है?

हर बच्चा अलग होता है और आपको अपने बच्चे की जरूरतों और तरीकों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए ताकि आप दोनों को वह आराम मिल सके जिसके आप हकदार हैं। अच्छी बात यह है, आप अपने बच्चे को नींद का एक उचित तरीका अपनाने की कोशिश कर सकते हैं और सिखा सकते हैं, जो पूरे दिन के लिए आपके बच्चे की नींद की संपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करेगा और आपको बेहद जरूरी आराम भी देगा।

एक 4 महीने के बच्चे के सोने का तरीका 10-11 महीने के बच्चे से भिन्न हो सकता है,जानने के लिए आगे पढ़े।

मेरे बच्चे का सोने का तरीका क्या है?

लगभग 4-6 महीने का होने तक आपके बच्चे को नियमित नींद के तरीके की आदत पड़ने लगेगी। ऐसा भी होता हैं जहाँ कुछ शिशुओं को रात में स्तनपान करने की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन बाद में ऐसा होना कम हो जाता है।

4-6 महीने के बच्चे को कितना सोना चाहिए?

इस चरण और उम्र में शिशु, आम तौर पर दिन में बारह से सोलह घंटे सोते हैं। इसमें रात की लंबी नींद और दिन में दो बार थोड़ीथोड़ी देर के लिए सोना शामिल है।

दिन के समय:

औसतन, दिन में नींद लगभग तीन से चार घंटे तक की होती है, जो पूरे दिन के लिए होती है। दिन के दौरान थोड़ी देर सोने की आवश्यकता धीरेधीरे कम होती जाती है जैसेजैसे आपका शिशु बड़ा होता जाता है और उसकी नींद नियमित हो जाती है।

रात के दौरान:

रात में, बच्चे आमतौर पर लगभग 10 घंटे की नींद लेते हैं। जब शिशु 6 महीने के हो जाते हैं, तब उनमें से अधिकांश शिशु रात को 9 घंटे तक सोते हैं, या शायद इससे भी लंबे समय तक।

शिशुओं में सोने की अच्छी आदतें कैसे डालें

आप सोने की कोई भी योजना शुरू कर सकते हैं जो आपके बच्चे को सुलाने में काम आए । कुछ आराम देने वाली गतिविधियाँ और क्रियाएं जिनसे शिशु ऊंघने लगे, हमेशा काम करती हैं। आप अपने बच्चे को गर्म पानी से स्नान करवा सकती हैं जिसके बाद कुछ लोरियां या कहानियां सुनाकर आप उन्हें सुला सकती हैं। इन गतिविधियों का बच्चे के बड़े होने तक भी पालन किया जा सकता है।

शिशुओं में सोने की अच्छी आदतें कैसे डालें

समय के साथ आप चाहेंगे कि आपका बच्चा खुद सो जाए। ऊंघते बच्चे को पालने में सुलाने से पहले यह जरूरी है कि आप उनकी दिनचर्या के सभी कार्य पूरे कर ले। बच्चे के रोने पर बेहतर यही है की आप कुछ देर के लिए दूर चले जाएं और उन्हें अपने आप ही संभलने व सोने दें। यदि आप चाहते हैं कि वह अपने आप सोना सीखें तो उसे बार बार पुचकारने की इच्छा से खुद को रोके यदि उसका रोना जारी रहता है तो आप बच्चे को थोड़ी देर तक गोद में ले सकते हैं।

क्या इस उम्र में नींद संबंधी कोई समस्या हो सकती है?

कुछ 4 से 6 महीने के बच्चों की नींद की समस्याएं होती हैं, अगर वे बारबार हो, तो उनकी तरफ ध्यान देने की आवश्यकता होती है, लेकिन अभ्यास और समय के साथ, आपका बच्चा अपने आप सोने की आदत डालने लगेगा।

कभीकभी जुदाई की चिंता से शिशु पीड़ित हो सकते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप उन लक्षणों पर ध्यान दें।

बच्चे की नींद और विकास

पर्याप्त नींद लेना एक बच्चे को हर समय चिड़चिड़ा होने से बचाने के लिए आवश्यक है और यह उन्हें स्वस्थ रखता है और बीमारियों से मुक्त भी रखता है। क्योंकि उनका शरीर अभी भी विकसित हो रहा है, पर्याप्त नींद लेने से शिशुओं को पर्याप्त आराम मिलता है, और सुनिश्चित होता है कि शरीर के सभी कार्य सही तरीके से हों। मस्तिष्क के विकास के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली का विकास विशेष रूप से ऊर्जा इस्तेमाल करने वाली उपलब्धि है। दोनों के लिए बच्चे को अच्छी तरह से खिलाने और अच्छी तरह से आराम करने की आवश्यकता होती है।

4 से 6 महीने के बच्चे के लिए नींद के उपाय

वास्तव में सोना शिशु के विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू है। इसका किसी बीमारी या पोषण संबंधी समस्याओं आदि से निपटने की तुलना में प्रबंधन करना अपेक्षाकृत आसान भी है।

निम्नलिखित कुछ सरल सुझाव हैं, जिनका पालन करके आपके बच्चे को अच्छी नींद मिल सकती है।

  • यदि आपका 4 महीने का बच्चा अपनी पीठ के बल सोता है, तो इस आदत को बदलें। सुनिश्चित करें कि वे करवट ले कर सोए या अपने पेट के बल सोए।
  • उन्हें ऐसी सतह पर सुलाएं जो ठोस रहे और गद्दे पर ऐसी चादर डालें जो आराम दें।
  • पालना के अंदर अन्य सामान न रखें जैसे तकिए, सॉफ्ट टॉएज़ आदि। यदि आवश्यक हो, तो एक बेबी मॉनिटर रखें। इसका उपयोग शिशुओं के लिए एक प्रभावी नींद के उपाय के रूप में किया जा सकता है, क्योंकि इससे आपको पता चल जाएगा कब आपका शिशु रात में जागता है, जब आप और आपका बच्चा एक ही कमरे में नहीं होते हैं। कमरे को बहुत अधिक गर्म न करें और न ही अपने बच्चे को बहुत ज्यादा गर्म कपड़ों में रखें। सुनिश्चित करें कि बच्चा हमेशा आरामदायक तापमान में रहे और (लेकिन ठंडा नहीं) चैन से चारों तरफ के तापमान में सो सके। बच्चे को ढेर सारे कपड़ों या कपड़ों में लपेट कर न सुलाएं।
  • सोते समय उन्हें चूसने के लिए चुसनी देने की कोशिश करें। यदि बच्चा इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, तो इसके लिए जोर न दें।

डोरियों, तारों, या टाई जैसे किसी भी खतरे से बचाव करने का ध्यान रखें जो बच्चे को प्रभावित कर सकते हैं। सुनिश्चित करें कि उनके सोने का वातावरण सुरक्षित और स्वस्थ हो।

क्या होगा, अगर बच्चा रात में जागता है? चिंता न करें। यह हो सकता है, क्योंकि वे विचलित हो सकते हैं या सोने से पहले उन्हें शांत करने की आवश्यकता हो सकती है। सुनिश्चित करें कि वे पूरी तरह से सो रहे हैं, जब आप उन्हें पालना में वापस रखें।

सोते हुए बच्चे के लक्षण

बच्चे के आगमन के कुछ महीनों बाद आपको शिशु के सोने के तरीके और संकेत समझ आने लगेंगे। एक 5 महीने का बच्चा अगर बहुत सो रहा है, यह एक अच्छा संकेत है, क्योंकि उसे आराम की बहुत आवश्यकता है। मातापिता होने के नाते, आपको बस यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि वे सामान्य घंटे से अधिक नहीं सो रहे हों।

सोते हुए बच्चे के लक्षण

अक्सर नई माताओं को ऊंघने के लक्षणों को पहचानने में परेशानी हो सकती है। यहाँ एक सोते हुए बच्चे के कुछ संकेत दिए गए हैं:

  • उनके चेहरे के भाव शिथिल होने से लेकर मुंह बनाने तक हो सकते हैं।
  • वे आपकी ओर न देख कर दूसरी दिशा में आकाश की ओऱ घूर सकते हैं।
  • वे अपनी आँखें और कान रगड़ते हैं।
  • बहुत जम्हाई लेना।
  • मुट्ठियाँ कसना।

जब सोने की बात आती है, तो कुछ शिशुओं के अतरंगी लक्षण होते हैं, इसलिए जितनी जल्दी आप उनकी पहचान कर सकें, उतना अच्छा होगा।

हमेशा सुनिश्चित करें कि आपके बच्चों को अच्छी नींद मिले और एक शांत बचपन मिले। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके पहले कुछ वर्षों में उन्हें मिलने वाले पोषण और आराम की मात्रा बाद में उनके विकास में प्रमुख भूमिका निभाती है।