बड़े बच्चे (5-8 वर्ष)

बच्चों में सांस की समस्या

बच्चों को सांस लेने में समस्या कई तरह से हो सकती है और शुरुआत में हो सकता है कि यह तुरंत स्पष्ट न हो। बच्चे की सांस फूलती हुई महसूस हो सकती है और हो सकता है, कि बहुत अधिक खेलने या अधिक थकावट को इसका कारण मान लिया जाए। बच्चे में सांस लेने में कठिनाई एंग्जायटी या फिर किसी गंभीर रेस्पिरेटरी समस्या के कारण भी हो सकती है। किसी भी मामले में सांस लेने में कठिनाई के पीछे के कारण और इसके उपाय के तरीकों को समझना सबसे अच्छा होता है। 

बच्चों में सांस लेने में समस्या के कारण

बच्चों में सांस लेने में कठिनाई कई तरह के कारणों से हो सकती है, जिनमें से ज्यादातर इस प्रकार हैं-

  • ऊंची जगह पर ऑक्सीजन के स्तर में गिरावट
  • जुकाम या अन्य इंफेक्शन के कारण नाक बंद होने की समस्या
  • एयरवेज या फेफड़ों में इंफेक्शन या कोई बाहरी वस्तु होना
  • धूल या अन्य पार्टिकल्स के प्रति एलर्जिक रिएक्शन
  • एंग्जायटी या मोटापा
  • बुखार या सिगरेट के धुएं से संपर्क होना
  • किसी खाद्य पदार्थ या अन्य वस्तु के कारण चोक होना
  • खून में हीमोग्लोबिन के स्तर में गिरावट
  • हृदय की जन्मजात बीमारियां
  • डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
  • शारीरिक कमजोरी या पर्याप्त पोषण की कमी के कारण हाइपोग्लाइसीमिया

बच्चों में सांस में समस्या के संकेत और लक्षण

  • बच्चे की त्वचा, होंठ या नाखून नीले पड़ना
  • आवाज का कर्कश हो जाना
  • नाक या छाती में जमाव
  • तेज और घरघराहट युक्त छोटी सांसे
  • नथुनों का फैलाव
  • आवाज में घरघराहट
  • सांस लेने के दौरान पसलियों के दिखने की स्पष्टता बढ़ जाना
  • खांसने के दौरान घरघराहट की आवाज
  • तेज बुखार
  • एक्सरसाइज न कर पाना या आम गतिविधियों का कम हो जाना

बच्चों में सांस की समस्या के लिए उपचार

  • आराम या गतिविधियों में कमी आने से सांस लेने में कठिनाई कम हो जाती है।
  • अगर बच्चा फॉलो कर सकता है, तो उसे छोटी और ऊपरी सांस लेने को कहें।
  • बच्चे को ढेर सारी ऑक्सीजन युक्त ताजी हवा में लेकर जाएं।
  • शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाएं और कम मात्रा में, ज्यादा से ज्यादा बार, जितना हो सके पानी पिलाएं।
  • कसे हुए कपड़े उतार दें। बच्चे को बिठाएं या करवट से लिटा दें। उसके पैर पेट की ओर मुड़े हुए होने चाहिए।
  • अगर उपलब्ध हो तो बच्चे को भाप या नेबुलाइजेशन या कफ सिरप दें, ताकि म्यूकस नम हो जाए और आसानी से बाहर आ सके।
  • म्यूकस-सकर उपलब्ध हो तो, नाक या मुंह में जमे म्यूकस को साफ करें।
  • तेज बुखार की स्थिति में बुखार कम करने के लिए पेरासिटामोल या आइबुप्रोफेन दें।
  • धूल या धुएँ जैसे किसी भी प्रकार के हवा के प्रदूषण को बच्चे से दूर रखें।
  • बच्चे को यह आश्वासन दें, कि वह बिल्कुल ठीक है और उसे शांत और आरामदायक स्थिति में रखें।
  • अगर यह स्थिति गंभीर हो जाती है, तो जितनी जल्दी हो सके उसे डॉक्टर के पास ले कर जाएं।

आप अपने बच्चे को सांस की समस्याओं से कैसे सुरक्षित रख सकते हैं?

  • अगर आपका बच्चा मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार की एलर्जी के कारण सांस लेने की समस्याओं से ग्रस्त है, तो इस बात का ध्यान रखें, कि उसके आसपास का वातावरण उन एलर्जेन से मुक्त हो, जिससे यह ट्रिगर हो सकती है। इनमें रोएं वाले पालतू जानवरों को दूर रखना, धूल से मुक्त वातावरण तैयार करना, या अगर आप बच्चे में फूड एलर्जी के बारे में निश्चित नहीं हैं, तो नए खाद्य पदार्थों से बचना भी शामिल है और साथ ही, जहां भी जाएं मास्क का इस्तेमाल करें।
  • अगर डॉक्टर ने आपके बच्चे को एपिनेफ्रीन या इनहेलेशन दवाएं प्रिसक्राइब की हैं, तो इस बात का खयाल रखें, कि बच्चा उन दवाओं को समय पर ले और किसी भी इमरजेंसी दवा को अपने साथ रखे। इमरजेंसी की स्थिति में एपिनेफ्रीन लेने की पद्धति को खुद भी सीखें और बच्चे को भी सिखाएं।
  • सांस की समस्याओं को भरपूर आराम के साथ मैनेज किया जा सकता है। बच्चे के कपड़े ऐसे होने चाहिए जिनसे हवा आर-पार जाती हो और वे अधिक कसे हुए या चिपके हुए नहीं होने चाहिए, क्योंकि इनसे भी सांस लेने में दिक्कत आ सकती है।
  • बच्चे के पीडियाट्रीशियन को एनीमिया या दिल की जन्मजात बीमारियों का इलाज करना चाहिए।
  • नियमित रूप से खाना और ढेर सारे तरल पदार्थ दें और लंबे समय तक भूखे रहने से या डिहाइड्रेशन से बचाएं।

डॉक्टर से परामर्श कब लें?

अगर बच्चे में निम्नलिखित में से कोई भी संकेत या लक्षण नजर आते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए: 

  • त्वचा, नाखून, जीभ या होठों का रंग नीला पड़ जाना।
  • छाती में तेज दर्द और इसके साथ ही खांसते समय खून आना।
  • बेहोश हो जाना या बहुत अधिक लार बहना।
  • चेहरे, जीभ और कंठ में सूजन।
  • तेज घरघराहट होना और बोलने में सक्षम ना होना।
  • शरीर पर हाइव्स (पित्ती) की मौजूदगी।
  • मतली और उल्टी
  • अनियमित हार्ट बीट के साथ पसीना आना।

बच्चों में रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस

जब बच्चे सांस के गंभीर संकट से जूझते हैं, तब इसका मुख्य कारण पुरानी बीमारी होती है, जिसका जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर के द्वारा जांच किया जाना बहुत जरूरी है। 

कारण

इसके कुछ संभावित कारण नीचे दिए गए हैं:

  • एक्यूट अस्थमा से ग्रस्त होना
  • हृदय की जन्मजात समस्याएं होना
  • बेहद गंभीर एलर्जिक रिएक्शन
  • फेफड़े की कुछ खास मेडिकल समस्याएं
  • बच्चे के निचले या ऊपरी रेस्पिरेटरी सिस्टम में गंभीर इन्फेक्शन

संकेत और लक्षण

रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस के सही संकेतों को पहचानना समस्या को सुलझाने का पहला कदम होता है: 

  • सांस बहुत तेज हो जाती है
  • हार्ट-रेट सामान्य से अधिक बढ़ जाता है
  • एक्सरसाइज करने की या खेलने की क्षमता घट जाती है
  • त्वचा, होंठ और नाखूनों का रंग नीला पड़ जाता है
  • उंगलियों के पोरों में सूजन आ सकती है
  • त्वचा का टेक्सचर फीका और सिलेटी हो जाता है
  • बच्चा हर बार सांस छोड़ते समय घरघराता है
  • जब बच्चा सांस भरता है, तो उसके नथुने अधिक हवा लेने के लिए फैल जाते हैं
  • हर सांस के साथ बच्चे की छाती ब्रेस्टबोन के अंदर धंस जाती है
  • हर बार बच्चे के सांस लेने पर घरघराहट की आवाज आती है

उपचार

बच्चे की सांस संबंधी समस्या का इलाज इस बात पर निर्भर करता है, कि वह किस समस्या से ग्रस्त है। इसके कुछ आम इलाज इस प्रकार हैं: 

1. सर्फेक्टेंट बदलना

आमतौर पर फेफड़ों की बीमारी के लिए इलाज के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली यह थेरेपी बच्चे के फेफड़ों में सर्फेक्टेंट को रिप्लेस करने में मदद करती है। सर्फेक्टेंट एक तरल पदार्थ होता है, जो फेफड़ों के अंदर एक परत बनाता है। इससे इन्हें खुले रहने में और सामान्य रूप से सांस लेने में मदद मिलती है। डॉक्टर बच्चे के फेफड़ों को तब तक सर्फेक्टेंट उपलब्ध कराते रहते हैं, जब तक यह इसका उत्पादन खुद शुरू न कर दे। 

2. सहायक श्वसन तंत्र

अगर आपका बच्चा अन्य इलाज के बावजूद अच्छी तरह से सांस नहीं ले पाता है, तब डॉक्टर उसे ब्रीदिंग सपोर्ट पर रखने की सलाह दे सकते हैं। हाई प्रेशर एयर ऑक्सीजन मिक्सचर युक्त एक ट्यूब बच्चे की नाक में जोड़कर उसके सांस लेने की मेहनत को कम कर देती है या एक ब्रीदिंग ट्यूब इंस्टॉल की जा सकती है, जो सीधे बच्चे के फेफड़ों से जुड़ी हो और उसे ठीक तरह से सांस लेने में मदद कर सके। यह कंबाइंड थेरेपी तेज गति से रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस से निपटने में मदद करती है और बच्चे के श्वसन को सामान्य स्तर पर लाती है। 

3. विभिन्न दवाओं के इस्तेमाल से थेरेपी

आपके बच्चे के श्वसन को सामान्य स्तर पर लाने में मदद के लिए कई तरह की दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें नेजल स्प्रे से लेकर एसिटामिनोफेन तक, बच्चे में खांसी जुकाम को कम करने वाली दवाएं, पेनिसिलिन, डीकन्जेस्टेंट, फेफड़ों को अच्छी तरह से सांस लेने में मदद के लिए जिंक, कॉर्टिकोस्टेरॉइड, रिसेप्टर ब्लॉकर्स, ल्यूकोटरीन, एलर्जिक रिएक्शन ट्रिगर होने से बचाव के लिए एंटीहिस्टामाइन और ऑप्थल्मिक दवाइयां तक शामिल हैं। 

4. ऑक्सीजन के इस्तेमाल से थेरेपी

जब सांसे छोटी और अपर्याप्त हों, तब आपके बच्चे को ऑक्सीजन थेरेपी दी जा सकती है। यह शरीर पर तनाव के बिना ऑक्सीजन की जरूरी मात्रा उपलब्ध कराने में मदद करती है, ताकि फेफड़े अपने समय पर विकसित हो सकें और शरीर को जरूरी ऑक्सीजन मिलती रहे। 

5. एलर्जेंस की मौजूदगी से बचाव

जिन बच्चों को पहले एलर्जी हो चुकी होती है, उनमें एलर्जेन की मौजूदगी के कारण ज्यादातर रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस ट्रिगर हो जाते हैं। इसके लिए इलाज के दौरान ऐसे किसी भी एलर्जेन के संपर्क में आने से बचना जरूरी है। आपके बच्चे को किसी भी घरेलू पालतू जानवर से दूर रहना, आस-पास मौजूद धूल कणों से दूर रहना, बाहर हवा में तैर रहे पोलेन या स्मोक या एरोसोल जैसे किसी अन्य पोल्यूटेंट से दूर रहना जरूरी है। 

बचाव

बच्चे को सांस की किसी समस्या से बचाने की शुरुआत आपकी गर्भावस्था से ही हो जाती है और यह उसके विकास तक जारी रहती है। गर्भावस्था के शुरुआती चरण में डॉक्टर से नियमित रूप से मिलना और किसी संभावित समस्या की मौजूदगी की जांच करते रहना सबसे अच्छा होता है। अच्छा खानपान और स्वस्थ गर्भावस्था मेंटेन करने से बच्चे में किसी बायोलॉजिकल स्थिति या समस्या के विकास से बचाव होता है, जो कि डिलीवरी के पहले या डिलीवरी के दौरान सांस लेने में रुकावट बन सकती है। प्रेगनेंसी के दौरान शराब और सिगरेट का सेवन हमेशा से ही हानिकारक रहा है। 

जब आपका बच्चा बढ़ रहा होता है, तब आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए, कि वह एक उचित आहार ले और नियमित रूप से खाना खाए। अगर बच्चे में कुछ खास एलर्जिक स्थितियों का संदेह है, तो ट्रिगर युक्त खास जगहों से उसे दूर रखें। किसी इमरजेंसी की स्थिति में उसे मास्क का इस्तेमाल करने और आपको बुलाने का निर्देश दें। इस बात का ध्यान रखें, कि बच्चा डस्ट माइट्स और बाहरी पोल्यूटेंट से दूर रहे, ताकि जितना ज्यादा संभव हो सके श्वसन के संकट के ट्रिगर होने की संभावना कम हो सके। 

बच्चे को सांस की समस्याओं से ग्रस्त देखना आपके लिए बेहद तकलीफदेह हो सकता है, लेकिन आपको तनाव और चिंता में देखकर बच्चा भी चिंता और घबराहट का शिकार हो सकता है, जिससे उसकी स्थिति और भी बिगड़ सकती है। ऐसे में सबसे अच्छा यही होगा, कि आप तुरंत किए जा सकने वाले उपायों के बारे में जानकारी रखें और अपने बच्चे को यह आश्वासन दें, कि वह बहुत जल्द ही ठीक हो जाएगा। 

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पूजा ठाकुर

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