शिशु

छोटे बच्चे आई कॉन्टैक्ट कब बनाते हैं और पेरेंट्स उन्हें कैसे प्रोत्साहित कर सकते हैं?

अपने घर में और अपनी दुनिया में बच्चे को लाने के सबसे बेहतरीन पहलुओं में से एक है – कि आप उसकी आंखों में देखकर एक इंस्टेंट कनेक्शन महसूस कर सकते हैं। लेकिन अगर आपका नन्हा बेबी आई कॉन्टैक्ट नहीं बनाता है, तो आपका दिल छोटा होना और चिंतित होना वाजिब है। बच्चे की आंखों का विकास बहुत जरूरी है, बल्कि यह विकास का एक जरूरी माइलस्टोन है, जो माता-पिता और बच्चे के बीच के संबंध को मजबूत बनाता है। अगर आप एक न्यूबॉर्न के पेरेंट्स हैं, तो आप यह जरूर सोचते होंगे, कि आपका नन्हा बच्चा आपसे आई कॉन्टैक्ट कब बनाएगा और आप उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए क्या कर सकते हैं। 

छोटे बच्चे आई कॉन्टैक्ट बनाना कब शुरू करते हैं?

हमें पता है, कि आप यह जानने के लिए काफी उत्सुक हैं, कि आपका बच्चा आई कॉन्टैक्ट कब बनाएगा। इसलिए यह रहा इसका जवाब – अधिकतर बच्चे अपने शुरुआती 6 से 8 सप्ताह की आयु के दौरान, पहला आई कॉन्टैक्ट बनाते हैं। 

आई कॉन्टैक्ट जरूरी क्यों है?

जब एक बच्चा आई कॉन्टैक्ट बनाता है, तो माता-पिता इस बात को लेकर निश्चिंत हो जाते हैं, कि उनका बच्चा उन्हें पहचानता है। इसके अलावा बच्चों के भावनात्मक और बौद्धिक विकास में यह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कहने की कोई जरूरत नहीं है, कि जब बच्चे आई कॉन्टैक्ट बनाना शुरू करते हैं, तो शुरुआती बॉन्डिंग और लगाव और भी ज्यादा मजबूत हो जाता है। आई कॉन्टैक्ट बनाने से, जानकारी को इकट्ठा करने और उसका विश्लेषण करने में भी मदद मिलती है। जब बच्चा अपने माता-पिता को देखता है, तो वह व्यक्ति और उनकी आवाजों के बीच संबंध स्थापित करने लगता है, मुस्कुराहट का मतलब समझने लगता है और वह प्यार किए जाने का अर्थ भी समझने लगता है। 

छोटे बच्चों में आंखों की स्थिरता का विकास

छोटे बच्चों में आंखों की स्थिरता का विकास इस प्रकार होता है: 

  • आमतौर पर दुनिया में कदम रखने के बाद शुरुआती 7 घंटों के अंदर ही एक बच्चा अपनी मां के चेहरे में काफी रुचि लेने लगता है। इसके अलावा वह अपनी मां या देखभाल करने वाले व्यक्ति के चेहरे के हाव-भाव की नकल भी करने लगता है।
  • जन्म के बाद के शुरुआती 6 से 8 सप्ताह के दौरान, एक बच्चा अपनी मां या केयर गिवर की ओर अपनी आंखें टिकाने लगता है।
  • लगभग 3 महीने की आयु होने पर बच्चे की आंखें अपनी मां या केयर गिवर का पीछा करने के काबिल हो जाती हैं।
  • 9 से 11 महीने की उम्र होने पर उसकी आंखों की स्थिरता एक वयस्क के जैसी हो जाती है। इस पड़ाव तक बच्चे समझने लगते हैं, कि आंखें किस लिए होती हैं, यानी देखने के लिए। कुछ बच्चों में इस विकास में थोड़ा अधिक समय लग सकता है। इसलिए अगर आपके बेबी को इसमें अधिक समय लग रहा है, तो चिंता न करें।

पेरेंट्स अपने बच्चे को आई कॉन्टैक्ट बनाने में मदद कैसे कर सकते हैं?

एक बच्चे और उसके माता-पिता के बीच आई कॉन्टैक्ट एक प्राकृतिक और अनोखा पल होता है। लेकिन हर बच्चा अपनी गति से बढ़ता है। आपके बच्चे को आई कॉन्टैक्ट बनाने में कम या अधिक समय लग सकता है। लेकिन एक पैरेंट होने के नाते आप आई कॉन्टैक्ट बनाने में उसकी काफी मदद कर सकते हैं। 

  • अपने बच्चे को आई कॉन्टैक्ट बनाने के लिए, प्रोत्साहन देते समय सौम्यता बरतें। जब उसे भूख लगी हो या उसका मूड खराब हो, तब वह आई कॉन्टैक्ट नहीं बनाएगा, क्योंकि वह ऐसे समय में फोकस नहीं कर पाएगा। इसलिए जब वह शांत हो और अच्छे मूड में हो, तब इसकी कोशिश करें।
  • आई कॉन्टैक्ट बनाने के लिए उसे प्रोत्साहन देने का एक दूसरा तरीका होता है, उसे अपने चेहरे से 10-20 इंच की दूरी पर पकड़ना।
  • अगर आपका बच्चा अपनी इच्छा से आपको देख रहा है, तो ऐसे मौके का फायदा उठाएं। ऐसी स्थिति में आप गाना गा सकते हैं, चेहरे पर अलग-अलग हावभाव ला सकते हैं या उससे बात भी कर सकते हैं। शुरुआत में आपको यह अजीब लग सकता है, पर ये सब कुछ आपके बच्चे के दिमाग में स्टोर हो जाता है, जो कि उसके विकास पर रचनात्मक रूप से असर डालता है।
  • बच्चे के अपने केयर गिवर की ओर देखने के लिए इंतजार करने और फिर इंटरेक्शन की शुरुआत करने की सलाह दी जाती है। इस बात का ध्यान रखें, कि जब तक वह अपनी नजर न हटाए, तब तक आप भी न हटाएं।
  • अगर एक म्यूच्यूअल आई कॉन्टैक्ट के साथ स्पर्श या आवाज भी शामिल हो, तो पेरेंट्स और बच्चे के बीच मधुर संबंध स्थापित करने में मदद मिलती है।
  • एक वस्तु या खिलौने की ओर इशारा करना और उसका नाम लेना भी काफी मददगार होगा, जो कि बच्चे की भाषा के विकास में भी मदद करेगा।
  • अगर बच्चा आपके चेहरे से दूर देख रहा हो, तो उदास ना हों। इसका कारण यह हो सकता है, कि वह लंबे समय तक आपको देख कर थक गया हो। इसलिए उसके मूड को समझें और उसे थोड़ा स्पेस दें।
  • आपके बच्चे का विकास अभी भी जारी है और उसकी नजरों की स्थिरता थोड़ी देर के लिए भी हो सकती है। इसलिए लंबे समय तक और तेज नजर की उम्मीद ना रखें।

एक्टिविटीज जो छोटे बच्चों को आई कॉन्टैक्ट बनाने में मदद कर सकती हैं

बच्चे को बेहतर आई कॉन्टैक्ट का विकास करने में मदद करने के लिए, उसे एक ऑप्टोमेट्रिस्ट के पास ले जाने की सलाह दी जाती है। 6 से 12 महीने की उम्र के बीच बच्चे का पहला आई एग्जामिनेशन करवा लेना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित हो जाता है, कि बच्चे की आंखों में कोई समस्या नहीं है, जैसे – दूरदर्शिता, निकटदर्शिता, धुंधलापन आदि। अगर कोई समस्या सामने आती है, (जो कि काफी दुर्लभ है) तो बच्चे को कम से कम 3 साल की उम्र तक डॉक्टर के पास ले जाकर नियमित आई-चेक-अप करना पड़ेगा। 

बच्चे के आई मूवमेंट के विकास में मदद और उसके आई कॉन्टैक्ट को बढ़ावा देने के लिए, माता-पिता छोटी-छोटी एक्टिविटीज कर सकते हैं।

  1. शुरुआती 4 महीनों में बच्चे को उसकी आंखों से घूमती हुई चीजों को फॉलो करने दें और जो चीजें बच्चे को आकर्षित करती हैं, उन्हें देखने दें। इससे बच्चे में सॉलिड आई-हैंड-को-आर्डिनेशन स्थापित होगा।
  2. नियमित रूप से बच्चे के क्रिब की पोजीशन को बदलने से और उसमें बच्चे की पोजीशन को बदलने से भी, उसके आई कॉन्टैक्ट के विकास को बढ़ावा मिलता है। आप क्रिब के ऊपर और बाहर कोई वस्तु लटका सकते हैं, ताकि बच्चा उसके मूवमेंट को फॉलो कर सके।
  3. आप बच्चे के आसपास थोड़े खिलौने भी रख सकते हैं, जो कि बच्चे की नजर से लगभग 8 से 12 इंच की दूरी पर हों।
  4. बच्चे को फीड कराते समय, साइड्स को बदलते रहें। साथ ही, जब आप कमरे में हों, तो बच्चे से बातें करते रहें। आवाजें बच्चे के आई कॉन्टैक्ट के प्रयासों के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम कर सकती हैं।

बच्चे आई कॉन्टैक्ट से क्यों बचते हैं?

  1. यह याद रखना जरूरी है, कि उनके शुरुआती महीनों में बच्चे केवल 30 सेंटीमीटर की दूरी तक ही फोकस कर सकते हैं। यह वही दूरी है, जो कि दूध पीते समय या गोद में होने के दौरान बच्चे की आंखों और माता-पिता के चेहरे के बीच होती है। वे केवल इतने ही क्षेत्र तक देख सकते हैं।
  2. अगर एक विजुअल स्टिमुलेटर के द्वारा बच्चा ओवर स्टिम्युलेटेड हो जाता है, तो वह आई कॉन्टैक्ट नहीं बनाता है और एक साथ देखने से मना करता है। ऐसे मामलों में, यह जानना जरूरी है, कि छोटे बच्चों के लिए कितना आई कॉन्टैक्ट सामान्य है। उनकी आंखों को आराम करने दें, उन्हें सोने दें और आई कॉन्टैक्ट बनाने के लिए दबाव न डालें।
  3. हो सकता है, कि बच्चा एक ही जगह पर काफी देर से देख रहा हो और फिर अधिक देर तक देखने के बाद शर्मिंदा हो, ऐसे बच्चे थोड़ी देर के लिए आई कॉन्टैक्ट बनाने से मना भी कर देते हैं।
  4. कुछ बच्चे कुछ विशेष अवधि के लिए स्विच ऑफ भी कर देते हैं – समय की यह अवधि कुछ महीनों या कुछ सप्ताह की भी हो सकती है। हालांकि यह सामान्य है, क्योंकि बच्चे आसानी से उत्साहित भी हो जाते हैं और आसानी से थक भी जाते हैं। वे धीरे-धीरे आई कॉन्टैक्ट को मेंटेन करना सीख जाएंगे।
  5. आई कॉन्टैक्ट के विकास और उसे मेंटेन करने की इच्छा न होना, आमतौर पर ऑटिज्म का एक शुरुआती संकेत है। अगर 6 महीनों के बाद भी बच्चे में आई कॉन्टैक्ट का विकास नहीं होता है, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  6. अन्य कुछ जटिलताओं के कारण भी, बच्चा आई कॉन्टैक्ट नहीं बना पाता है। अगर यह समस्या बनी रहती है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें और जरूरी कदम उठाएं।

जब बच्चा आई कॉन्टैक्ट को मेंटेन नहीं कर पाता है, तो उसे वास्तव में कोई समस्या है या नहीं, इस बात का पता लगाना अक्सर मुश्किल हो जाता है। लेकिन, परेशान होने के बजाय, धैर्य से इससे निपटने की सलाह दी जाती है। धीरे-धीरे आप अपने बच्चे को समझने लगेंगे और उसके साथ अच्छा संबंध बना सकेंगे। 

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पूजा ठाकुर

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