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शिशुओं में फॉर्मूला एलर्जी – कारण, लक्षण और विकल्प

बच्चों में फूड एलर्जी होना बहुत कॉमन है। एलर्जी पैदा करने वाली खानपान की कुछ कॉमन चीजों में दूध, सोया, नट्स, ग्लूटेन, मूंगफली इत्यादि शामिल हैं। बच्चे में एलर्जी के संकेतों को पहचानना जरूरी है, ताकि उसका जल्द से जल्द निदान और उपचार किया जा सके। कभी-कभी, गाय के दूध और फॉर्मूला मिल्क से भी बच्चे में एलर्जी पैदा हो सकती है। यह लेख आपको बच्चों में फॉर्मूला एलर्जी के कारणों और लक्षणों को समझने और यह जानने में मदद करेगा कि जिन बच्चों को दूध से एलर्जी है उन्हें इसके बदले क्या दिया जाना चाहिए ।

क्या छोटे बच्चों में फॉर्मूला मिल्क से एलर्जी होना कॉमन है?

जब बच्चे को दूध से एलर्जी होती है, तो इसका यही मतलब है कि उसका इम्यून सिस्टम दूध में मौजूद किसी विशेष प्रोटीन या प्रोटीनों के प्रतिकूल प्रभाव दे रहा है। इसलिए, गाय का दूध और उससे संबंधित प्रोडक्ट एलर्जिक रिएक्शन को ट्रिगर कर सकते हैं। अगर माँ गाय के दूध से बने प्रोडक्ट का अधिक सेवन करती है, तो ब्रेस्ट फीडिंग के जरिए यह बच्चे में एलर्जिक रिएक्शन का कारण बन सकता है। इसी तरह, गाय के दूध से बना प्रोटीन बेस्ड फॉर्मूला मिल्क का सेवन भी एलर्जी को ट्रिगर कर सकता है। एक साल से कम आयु के बच्चों में लगभग दो से आठ प्रतिशत की औसत पर गाय के दूध का सेवन किए जाने पर उनमें एलर्जी के लक्षण दिखाई देते हैं। आमतौर पर बच्चे में तीन साल की उम्र तक एलर्जी बनी रहने का खतरा रहता है। लेकिन कुछ मामलों में, यह सात से आठ साल की उम्र तक बनी रह सकती है।

बच्चों में फॉर्मूला एलर्जी होने का क्या कारण है?

क्या बच्चों को फॉर्मूला दूध से एलर्जी हो सकती है? हाँ, बच्चों के लिए फॉर्मूला दूध से एलर्जी होना संभव है, क्योंकि इम्यून सिस्टम दूध में पाए जाने वाले कुछ कंटेंट के प्रति अटैक करना शुरू कर देते हैं। इस एलर्जी के कुछ संभावित कारण हैं। उनमें से एक जेनेटिक है। यदि परिवार में किसी को उनके बचपन में फॉर्मूला मिल्क से एलर्जी रही होगी तो इस बात की पचास से अस्सी फीसदी संभावना है कि आपके बच्चे को एलर्जी हो सकती है। जो बच्चे ब्रेस्टफीडिंग करते हैं उनमें फॉर्मूला दूध पीने वाले बच्चों की तुलना में एलर्जी डेवलप होने की कम संभावना होती है। यह खासतौर पर इसलिए भी होता है, क्योंकि ज्यादातर बेबी फॉर्मूला मिल्क गाय के दूध से बनाया जाता है। इस प्रकार, यदि आप अपने बच्चे को गाय के दूध का प्रोटीन बेस्ड फॉर्मूला देती हैं, तो इससे एलर्जी के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, यदि उसे गाय के दूध से एलर्जी हो तो। हालांकि, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि कुछ बच्चों को दूध से एलर्जी क्यों होती है जबकि अन्य बच्चों को नहीं होती हैं।

छोटे बच्चों में फॉर्मूला मिल्क एलर्जी के संकेत और लक्षण

कुछ बच्चों में गाय के दूध से होने वाली एलर्जी के संकेत और लक्षण इसका सेवन करने के कुछ ही सेकंड या मिनटों में दिखाई दे सकते हैं, जबकि कुछ बच्चों में, इसके लक्षण प्रकट होने में कई घंटे या दिन लग सकते हैं। यदि आपके बच्चे को दिए गए फॉर्मूला दूध में उपस्थित गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन से एलर्जी है, तो आपको नीचे दिए गए कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

1. गैस

शिशु का पेट फूला हुआ नजर आ सकता है, जो कि गैस की समस्या होने का संकेत देता है। वह अपने पैरों को ऊपर की ओर भी खींच सकता है और बहुत ज्यादा गैस छोड़ सकता है।

2. रिफ्लक्स

बच्चों के लिए एसिड रिफ्लक्स का अनुभव करना आम है, जिसमें भोजन एसोफेगस (खाने की नली) के जरिए मुँह में वापस पलटने लगता है। यही कारण है कि बच्चे इतना ज्यादा दूध निकालते हैं। एक्सट्रीम केस में, आपका बच्चा उल्टी कर सकता है। यहाँ तक ​​कि उसे दूध निगलने में भी कठिनाई का अनुभव हो सकता है और वह फीडिंग के दौरान नेगेटिव रिएक्ट कर सकता है व नर्सिंग के दौरान परेशान कर सकता है।

3. डायरिया

ब्रेस्टफीडिंग करने वाले बच्चे का मल पतला होता है, जबकि फॉर्मूला फीडिंग वाले बच्चों का मल टाइट होता है। यदि आपके बेबी को कम से कम एक सप्ताह के लिए दिन में 3-4 बार ज्यादा पतली या पानीदार पॉटी होती है या यदि आप उसके मल में रक्त देखती हैं, तो उसे डायरिया हो सकता है। डायरिया फॉर्मूला मिल्क से होने वाली एलर्जी का संकेत है, जिसमें मल पानीदार, पतला होता है, साथ ही बदबू भी होती है। बार-बार दस्त लगने से बच्चे को सीरियस डिहाइड्रेशन हो सकता है, इसलिए उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।

4. रैश

यदि आपके बच्चे में रैश जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे कि उसकी त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ना, तो यह एलर्जिक रिएक्शन के कारण हो सकता है। जिन बच्चों को फॉर्मूला मिल्क से से एलर्जी होती है उन्हें भी रैशेज हो जाते हैं। इन रैशेज में खुजली हो सकती है, रिसाव भी हो सकता है। फॉर्मूला मिल्क से होने वाली एलर्जी का एक अन्य कॉमन लक्षण त्वचा पर पित्ती आना है।

5. साँस लेने में तकलीफ होना

हालांकि बच्चों में जुकाम और फ्लू होना एक आम बात है, लेकिन लगातार बहती नाक, साँस लेने में कठिनाई होना, गले में कफ और पुरानी खांसी आदि की समस्या फॉर्मूला मिल्क से हुई एलर्जी के कारण हो सकती है।

6. कोलिक

यदि कोई बच्चा भूख या नींद न आने पर भी लगातार रोता है, तो यह पेट का दर्द का संकेत हो सकता है। कोलिक के लिए रूल ऑफ थ्री लागू होता है – यदि आपका बच्चा हर दिन तीन घंटे या उससे अधिक रोता है, जो सप्ताह में कम से कम तीन दिन, तीन सप्ताह तक जारी रहता है, तो उसे कोलिक की समस्या हो सकती है। कोलिक की समस्या जन्म के पहले छह महीनों के बाद बेहतर हो जाती है।

7. कब्ज

कभी-कभी, फॉर्मूला मिल्क से होने वाली वाली एलर्जी के कारण बच्चों में कब्ज की समस्या पैदा हो सकती है। यदि आपके बेबी को कब्ज है, तो उसकी पॉटी टाइट रहेगी। साथ ही आप उसके मल में खून भी नोटिस कर सकती हैं।

बच्चों में फॉर्मूला एलर्जी का निदान कैसे करें

आदर्श रूप से, आपको अपने डॉक्टर को सभी चीजें विस्तार से बतानी चाहिए, जो आपने नोटिस की हैं, इसके आधार पर ही डॉक्टर बच्चे का निदान और उपचार करते हैं। आपको उन्हें परिवार की एलर्जिक हिस्ट्री के बारे में भी बताना चाहिए। शिशुओं में दूध या फॉर्मूला एलर्जी का निदान करने के लिए कोई स्पेसिफिक टेस्ट नहीं किया जाता है। हालांकि, लक्षण बताने के बाद डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट कराने का सुझाव दे सकते हैं। इन परीक्षणों में एलर्जी टेस्ट, ब्लड टेस्ट और स्टूल (मल) टेस्ट शामिल हैं।

फॉर्मूला से बच्चों को एलर्जी हो जाने पर क्या करें

यदि डॉक्टर यह निष्कर्ष निकालते हैं कि बच्चे को फॉर्मूला से एलर्जी है, तो सबसे पहले आपको यह करना चाहिए कि उसके आहार से सभी डेयरी प्रोडक्ट हटा दें। इसका मतलब है कि आप भी ब्रेस्टफीडिंग के साथ डेयरी प्रोडक्ट का सेवन न करें, क्योंकि प्रोडक्ट के जरिए प्रोटीन आपके ब्रेस्ट मिल्क में जाता है और बच्चे तक पहुँचता है। मिल्क एलर्जी कॉम्पलिकेटेड है, क्योंकि डेयरी प्रोडक्ट से एलर्जी वाले आधे से ज्यादा बच्चों में सोया मिल्क से एलर्जी होने की भी संभावना है। गाय के दूध से होने वाली एलर्जी से बचने के लिए आप बेबी को फॉर्मूला मिल्क का कोई दूसरा ऑप्शन देने की कोशिश करें, जिससे उसमें कुछ दिनों के भीतर एलर्जी रिएक्शन कम होने लगें।

ऐसे बच्चों के लिए कुछ ऑप्शन मौजूद हैं जिन्हें दूध और सोया-बेस्ड फॉर्मूला से एलर्जी है। हाइपोएलर्जेनिक फॉर्मूला, जो साइंटिफिक रूप से डेयरी प्रोडक्ट से एलर्जेन को बाहर करने में मदद करता है और इसे दूध में मिल्क प्रोटीन को ब्रेक डाउन करने के लिए एंजाइम का उपयोग करके इसे तैयार किया जाता है। इसे दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है – हाइड्रोलाइज्ड फॉर्मूला और एमिनो एसिड-बेस्ड फॉर्मूला। यह उन बच्चों के लिए अच्छा है जो हाइड्रोलाइज्ड फॉर्मूला को लेने में सक्षम नहीं हैं। इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि जितना अधिक फॉर्मूला हाइड्रोलाइज किया जाता है, उतना ही कम ये बच्चे के लिए टेस्टी होता है।

ब्रेस्ट मिल्क बच्चे को पोषण प्रदान करने के लिए सबसे अच्छा स्रोत होता है। अगर आपके बच्चे को दूध या गाय के दूध से एलर्जी है, तो आप जितने लंबे समय तक ब्रेस्टफीडिंग कराना जारी रख सकती हैं तब तक रखें। 

क्या फॉर्मूला एलर्जी का इलाज किया जा सकता है?

वर्तमान में, फॉर्मूला एलर्जी से पूरी तरह से बचने के लिए कोई उपचार नहीं है। बस आप यही कर सकती हैं ऐसे प्रोडक्ट का सेवन करने से खुद भी बचें और बच्चे को भी बचाएं जिसमें एलर्जेन पाए जाते हैं।

अगर आपके बच्चे को दूध से एलर्जी है तो क्या कॉम्प्लिकेशन पैदा हो सकते हैं?

यदि आपके बच्चे को दूध से एलर्जी है, तो उसमें हे फीवर जैसे हेल्थ कॉम्प्लिकेशन डेवलप होने की संभावना होती है, जो धूल के कण, पॉलेन और पालतू जानवरों के रोंए आदि एलर्जेन के प्रति एलर्जिक रिपॉन्स के रूप में दिखाई दे सकते हैं। उसे अन्य खाद्य पदार्थ जैसे अंडे, मूंगफली, सोया आदि से भी एलर्जी हो सकती है।

मिल्क एलर्जी और मिल्क इन्टॉलरेंस के बीच अंतर क्या है?

कई पेरेंट्स मिल्क एलर्जी को मिल्क इन्टॉलरेंस समझने की गलती करते हैं। हालांकि, ये दोनों चीजें एक समान नहीं हैं। मिल्क एलर्जी तब होती है जब एक बच्चे का इम्यून सिस्टम गाय के दूध या गाय के दूध से तैयार किए गए प्रोटीन बेस्ड फॉर्मूला में मौजूद प्रोटीन के खिलाफ नेगेटिव रिएक्शन देता है। लेकिन मिल्क इन्टॉलरेंस का इम्यून सिस्टम से कोई लेना-देना नहीं होता है। यह तब होता है, जब बच्चे का डाइजेस्टिव सिस्टम दूध या डेयरी प्रोडक्ट में मौजूद शुगर लैक्टोज को सहन करने में असमर्थ होता है। इसे लैक्टोज इन्टॉलरेंस भी कहा जाता है। यह समस्या शिशुओं में दुर्लभ होती है और बड़े बच्चों और वयस्कों में डेवलप हो सकती है।

ऐसे बच्चे की देखभाल करना मुश्किल है, जो बहुत रोता है या उधम मचाता है, और इससे भी ज्यादा ये आपके लिए तब परेशानी का कारण बनता है कि जब आप उसके हेल्थ कॉम्प्लिकेशन और मूड के कारण उसके व्यवहार के बारे में कुछ नहीं कह सकती हैं। बेहतर यही है कि अगर आपको लगता है कि उसकी डाइट में किसी चीज से एलर्जी होने का खतरा है तो डॉक्टर से परामर्श करें। हालांकि, याद रखें कि बच्चे अक्सर सर्दी और फ्लू जैसी बीमारियों का सामना करते हैं, क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम अभी तक पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता है। इन बीमारियों में मिल्क एलर्जी के समान कुछ लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इलाज के बाद यह ठीक हो जाता है। बच्चे को फॉर्मूला मिल्क दिए जाने पर अगर आप इस लेख में बताए गए लक्षणों को नोटिस करती हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से परामर्श करना सबसे अच्छा होगा।

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समर नक़वी

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