छोटे बच्चों को चूसना बहुत पसंद है। कुछ बच्चे गर्भ में रहने के दौरान ही अपना अंगूठा चूसना शुरू कर देते हैं और कुछ जन्म के बाद से ही करने लगते हैं। यदि आपका बेबी अपने मुंह में कोई भी चीज डालकर चूसता है तो यह बहुत नॉर्मल है क्योंकि शिशु दूध पीने के लिए ऐसा ही करते हैं।
जन्म के बाद से ही अंगूठा, निप्पल या पैसिफायर चूसना आम है और बच्चा यह प्रीस्कूल तक भी कर सकता है। यदि पेट भरने के बाद भी बच्चा चूसना चाहता है तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। ऐसी नॉन न्यूट्रिटिव सकिंग से बच्चे को शांत व रिलैक्स करने में मदद मिलती है। थकने, बोर होने या एंग्जायटी होने पर भी बच्चा ऐसा कर सकता है।
यदि बच्चा चिड़चिड़ा रहा है और बहुत ज्यादा शोर मचाता है तो आप निम्नलिखित आसान तरीकों से उसे शांत कर सकती हैं, आइए जानें;
यदि बच्चा चिड़चिड़ा होता है तो आप उसके मुंह में आराम से पैसिफायर डाल दें। जब तक वह मुंह से पैसिफायर न पकड़ कर चूसने लगे तब आप उसे पकड़कर रखें। इस बात का ध्यान रखें कि आप बच्चे के मुंह में जल्दबाजी में पैसिफायर न डालें। विभिन्न प्रकार के पैसिफायर कई आकर्षक रंगों में आते हैं और इसके कुछ विकल्प आप यहाँ चेक कर सकती हैं।
यदि बच्चा बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो रहा है तो आप उसे उसकी मुट्ठी या अंगूठा चूसने दें ताकि उसका ध्यान अपने हाथ को चूसने पर जा सके और वह शांत हो जाए। शुरुआत में बच्चे को यह समझ नहीं आएगा कि कौन सी चीज कहाँ है पर बहुत जल्दी ही उसे 24 घंटे अंगूठा चूसने में मजा आने लगेगा।
बच्चे का पेट भरा होने के बाद भी आप उसे शांत करने के लिए ब्रेस्टफीडिंग करा सकती हैं। इससे बच्चे को रिलैक्स होने में आसानी होगी और चूंकि उसका पेट भरा हुआ है तो इसलिए ज्यादा प्रेशर भी नहीं डालना पड़ेगा। ब्रेस्ट मिल्क में रेगुलेटरी सिस्टम पहले से ही होता है जिससे दूध में कम कैलोरी उत्पन्न होती है और इसकी वजह से बच्चा भूखे रहने पर ही नहीं बल्कि शांत होने के लिए भी ब्रेस्टफीडिंग कर सकता है।
बच्चा आपकी उंगली चूस सकता है। वो इसे रिजेक्ट करेगा या फिर अपने मुंह में आपकी उंगली भर लेगा। हालांकि आपके लिए साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना जरूरी है इसलिए अपने नाखूनों को छोटा रखें और हाथ साफ रखें।
ऐसा कहा जाता है कि आप शिशु को तब तक पैसिफायर का उपयोग करने दें जब तक उसे और आपको ब्रेस्टफीडिंग की अच्छी तरह आदत न पड़ जाएं। उसे पैसिफायर देते समय इस बात कर खयाल रखें कि पैसिफायर साफ होना चाहिए और उसे कंपनी के इंस्ट्रक्शन के अनुसार बदलते रहना चाहिए। बाद में बढ़ते बच्चे के लिए चूसने की आदतों को छुड़ाना जरूरी है ताकि उसके दांतों की बनावट ठीक रहे। तब तक बच्चा अपने अनुसार किसी भी चीज को चूस सकता है।
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