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पीरियड साइकिल के तीन चरण होते हैं, जिनका नाम है ओवुलेटरी, ल्यूटल और फॉलिक्युलर है। पीरियड साइकिल के हर चरण का अपना अलग महत्व है, जैसे कि ओवम को फर्टिलाइज करना और गर्भवती होने में मदद करना। अगर आप गर्भवती नहीं हैं, तो उस समय उपयोग में न आने वाली एंडोमेट्रियल लाइनिंग पीरियड साइकिल के समाप्त होने पर बाहर निकल जाती है। इस आर्टिकल में ल्यूटल के चरण और इसका गर्भावस्था से क्या संबंध है इसके बारे में विस्तार में बताया गया है।
ओवुलेशन और अगले पीरियड की शुरुआत के बीच के समय को ल्यूटल फेज कहा जाता है। इस फेज के दौरान फॉलिकल, कॉर्पस ल्यूटियम में परिवर्तित होता है। कॉर्पस ल्यूटियम एक ऐसा सेल स्ट्रक्चर है जो अधिक मात्रा में प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन का उत्पादन करता है। ये ल्यूटल फेज हार्मोन प्रेगनेंसी में अहम भूमिका निभाते हैं।
यदि आपका 25 से 28 दिनों की नॉर्मल पीरियड साइकिल है, तो ऐसे में ल्यूटल फेज लगभग 12 से 14 दिनों तक चलेगा। लेकिन अगर आपकी पीरियड साइकिल 25 दिनों से कम है, तो ल्यूटल चरण छोटा होता है।
क्या आप ल्यूटल चरण के दौरान गर्भवती हो सकती हैं? हाँ, बिलकुल हो सकती हैं। चूंकि ल्यूटल फेज ओवुलेशन के बाद होता है, इसलिए आपके गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाती है।
ल्यूटल चरण आपके ओवुलेशन और पीरियड साइकिल के बीच का समय होता है। इसलिए ल्यूटल फेज की अवस्था और वह कितने समय तक रहता है, उससे आपकी फर्टिलिटी क्षमता के बारे में बेहतर रूप से जानकारी मिलती है।
यदि आपके ल्यूटल फेज की अवधि दस दिनों से कम है, तो आपको गर्भवती होने में कठिनाई हो सकती है। ऐसा माना जाता है कि यदि आपका कॉर्पस ल्यूटियम 9 दिनों में कमजोर हो जाता है, जिससे ल्यूटल फेज हार्मोन का उत्पादन बंद होने लगता है, तो ऐसे में यूट्रस तुरंत अपनी लाइनिंग को बाहर करना शुरू कर देता है, जिसकी वजह से फर्टिलाइज ओवम को फैलोपियन ट्यूब से ओवरी तक जाने का समय नहीं मिलता है और वह ओवरी की लेयर पर ही इम्प्लांट हो जाता है।
यदि आपका ल्यूटल चरण छोटा है, तो ओवम के फर्टिलाइज होने पर भी आप गर्भवती नहीं हो सकेंगी, क्योंकि भ्रूण के यूट्रस लाइनिंग के जुड़ने से पहले ही आपको पीरियड हो जाएंगे।
कभी-कभी आपके ल्यूटल चरण की अवधि सामान्य होती है, लेकिन फिर भी इसके दौरान आपका शरीर प्रोजेस्टेरोन का उत्पादन कम मात्रा में करता है, जो एक समस्या बन जाता है। यूट्रस लाइनिंग को अच्छी और मोटी रखने के लिए प्रोजेस्टेरोन की मात्रा अधिक चाहिए होती है। प्रोजेस्टेरोन की मात्रा कम पड़ने से यूट्रस लाइनिंग गर्भावस्था बनाए रखने में असफल हो जाती है।
इसलिए ल्यूटल चरण का नॉर्मल और हेल्दी होना बहुत महत्वपूर्ण है।
आपके ल्यूटल चरण की अवधि को कैलकुलेट करने कुछ तरीके यहां दिए गए हैं:
अगर मान लें कि 29 दिनों तक चलने वाले पीरियड साइकिल के लिए, ल्यूटल फेज 15 दिनों तक रहता है। तो आइए इसे फार्मूला के जरिए समझते हैं:
इसका मतलब है कि पीरियड साइकिल के 14वें दिन से आपका ओवुलेशन होता है।
ओवुलेशन के दिन को जानने के लिए प्रिडिक्शन किट या कैलकुलेटर का उपयोग किया जाता है साथ ही इससे ल्यूटल फेज का भी पता लगता है।
ल्यूटल चरण के दौरान, शरीर में प्रोजेस्टेरोन की मात्रा बढ़ने से कई तरह के परिवर्तन हो सकते हैं:
इस दौरान शरीर में इस तरह के बदलाव होना आम है, लेकिन इनकी वजह से आपके गर्भधारण की संभावना में में कोई कमी नहीं होगी।
जब आपका शरीर पर्याप्त प्रोजेस्टेरोन का उत्पादन नहीं करता है, तो आपका ल्यूटल फेज जल्दी खत्म हो जाता है। पर्याप्त प्रोजेस्टेरोन का उत्पादन नहीं करने के कई कारण हैं जिनमे से कुछ के बारे में नीचे बताया गया है:
आप अपने पीरियड साइकिल ट्रैक करके जान सकती हैं कि आपका ल्यूटल फेज छोटा है। ओवुलेशन और अगले पीरियड की शुरुआत के बीच के दिनों को कैलकुलेट करें, और इससे आपको अपने ल्यूटल फेज की अवधि का अंदाजा हो जाएगा।
यदि आपका ल्यूटल फेज 12 या अधिक दिनों तक रहता है, तो यह सामान्य है। लेकिन, यदि ये 10 दिनों से भी कम समय तक रहता है, तो आपके शरीर में प्रोजेस्टेरोन की मात्रा कम है। इसका मतलब आपका ल्यूटल फेज छोटा है।
ल्यूटल चरण में प्रोजेस्टेरोन का लेवल आमतौर पर बाकी पीरियड साइकिल चरण की तुलना में अधिक होता है। आपके प्रोजेस्टेरोन के स्तर का परीक्षण तब किया जाना चाहिए जब वह सबसे ज्यादा हो, यानी कि ल्यूटल फेज के बीच में, जो कि सामान्य 28 दिन के पीरियड साइकिल के 21वें दिन होता है।
बेशक, ये जरूरी नहीं है कि सभी महिलाओं का पीरियड साइकिल 28 दिनों का ही हो। यदि आपका पीरियड साइकिल 34 दिनों का है, जिसमें ओवुलेशन 22वें दिन के आसपास होता है, तो आप 21वें दिन अपने प्रोजेस्टेरोन के स्तर का टेस्ट नहीं कर सकती हैं, क्योंकि रिजल्ट में हार्मोन का लेवल बेहद ही कम दिखेगा। लेकिन, अगर आप 28वें दिन इसका परीक्षण करती हैं, तो आपका प्रोजेस्टेरोन स्तर सामान्य हो सकता है।
इसलिए अगर आप जानना चाहती हैं कि आप कब ओवुलेट करती हैं और आपके ल्यूटल चरण की अवधि क्या है, तो ऐसे में आप प्रोजेस्टेरोन के स्तर का परीक्षण करने के लिए अपने डॉक्टर को सही समय के बारे में बताएं।
नीचे बताए गए सप्लीमेंट्स लेने से आपके ल्यूटल फेज को बढ़ाने में मदद मिल सकती है:
यह कुछ मामलों में फर्टिलिटी क्षमता को बढ़ाता है जहां महिलाओं के ल्यूटल चरण छोटे होते हैं।
प्रोजेस्टेरोन क्रीम आपके प्रोजेस्टेरोन के स्तर को बढ़ा सकती है, लेकिन कृपया इसे इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
ल्यूटल फेज डिफेक्ट या ल्यूटल का पर्याप्त न होना ये दर्शाता है कि पूरे ल्यूटल चरण में प्रोजेस्टेरोन की कमी है। प्रोजेस्टेरोन की कमी से गर्भाशय की लाइनिंग मोटी नहीं होगी, जिसके कारण फीटस गलत तरीके से इम्प्लांट हो सकता है। इसका असर सीधा आपकी गर्भावस्था पर पड़ता है। हालांकि, यह अभी तक साबित नहीं हुआ है कि ल्यूटल फेज डिफेक्ट बांझपन का कारण है।
ल्यूटल फेज डिफेक्ट कई समस्याओं को जन्म देता है:
कई कारणों से ल्यूटल फेज डिफेक्ट हो सकता है:
ल्यूटल फेज डिफेक्ट के लक्षण इस प्रकार हैं:
कई टेस्ट करवाकर ल्यूटल फेज डिफेक्ट का निदान किया जा सकता है:
ये टेस्ट कई तरह के लेवल की जांच करते हैं, जैसे कि:
यह टेस्ट यूट्रस की लाइनिंग की मोटाई का पता लगाने में मदद करता है। अल्ट्रासाउंड स्कैन से प्रजनन अंगों के सही से काम करने के पता चलता है जैसे कि यूट्रस, ओवरी, गर्भाशय, सर्विक्स और फैलोपियन ट्यूब।
आपके एंडोमेट्रियल लाइनिंग का एक छोटा सैंपल लिया जाता है और इसकी लाइनिंग की मोटाई की माइक्रोस्कोप द्वारा जांच की जाती है। यह आपके पीरियड्स शुरू होने से कम से कम एक या दो दिन पहले किया जाना चाहिए।
ल्यूटल फेज डिफेक्ट का उपचार निचे दिए गए कारणों पर निर्भर करता है।
लगभग 14 दिनों तक चलने वाला ल्यूटल चरण वह समय होता है जब महिला का शरीर गर्भ को फर्टिलाइज ओवम के लिए तैयार करता है। गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए आपके पास ल्यूटल फेज का पर्याप्त समय और स्वास्थ्य दोनों होना चाहिए। सब कुछ सामान्य है या नहीं, इसकी जांच के लिए आप मिड-ल्यूटल फेज प्रोजेस्टेरोन टेस्ट के लिए डॉक्टर से सलाह कर सकती हैं।
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