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पीरियड्स मिस होने के बाद पिछले महीने से जोड़ा जाए, तो गर्भावस्था 38 से 40 सप्ताह तक चलती है। इन दिनों ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट के द्वारा आसानी से प्रेगनेंसी का पता लगाया जा सकता है। लेकिन फीटस की उपस्थिति का पहला शारीरिक संकेत फीटल पोल नामक एक ढांचे के रूप में दिखता है। इस समय तक एंब्रियो बड़ी मुश्किल से एक छोटे से कॉमा के आकार का दिखता है। कभी-कभी अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग के द्वारा फीटल पोल नजर नहीं आता है, पर इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं होती है।
फीटल पोल गर्भावस्था के पांचवे सप्ताह में फीटल योक सैक की मार्जिन के आसपास 3 से 5 मिलीमीटर की मोटाई के साथ दिखता है, जो कि बढ़ते हुए एंब्रियो को पोषण देता है। यही स्ट्रक्चर फीटस बन जाता है। इसकी आकृति थोड़ी घुमावदार होती है, जिसके एक छोर पर सिर होता है और दूसरे छोर पर पूंछ जैसी बनावट होती है। सिर से पैर तक की दूरी जिसे क्राउन-टू-रंप लेंथ कहते हैं, उसे मापा जाता है। फीटल पोल हर दिन एक मिलीमीटर की दर से लगातार बढ़ता रहता है। इस प्रकार फीटस की लंबाई से उसकी उम्र का हनुमान लगाया जा सकता है। मिलीमीटर में फीटस की लंबाई में 6 सप्ताह को जोड़कर उसकी उम्र को मापा जा सकता है। उदाहरण के लिए, अगर फीटल पोल 6 मिलीमीटर लंबा है, तो उसकी उम्र होगी 6 सप्ताह और 6 दिन। हालांकि यह उम्र का केवल एक अनुमान है।
गर्भावस्था के दूसरे सप्ताह के दौरान आपके डॉक्टर आपको एक ट्रांस एब्डोमिनल या ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासोनोग्राफी प्रक्रिया की सलाह दे सकते हैं। इससे विकास में आने वाले बदलावों को पहचानने में मदद मिल सकती है, जैसे फीटल पोल का बनना और फीटल हार्टबीट की पहचान।
कभी-कभी अल्ट्रासाउंड में फीटल पोल क्यों नहीं दिखता है? एक स्वस्थ फीटस की पहचान में कई तत्व शामिल होते हैं, जैसे जेस्टेशनल सैक का आकार, माहवारी की साइकिल की गणना में गलतियां आदि। यहां पर फीटल पोल की अनुपस्थिति के कुछ अर्थ दिए गए हैं:
चूंकि फीटल पोल के दिखने की समय अवधि 6 सप्ताह से 9 सप्ताह के बीच हो सकती है, ऐसे में केवल कुछ दिनों से भी गर्भधारण का गलत समय बताने से अल्ट्रासाउंड की रीडिंग गलत हो सकती है। उदाहरण के लिए, आपके पिछले पीरियड की गलत तारीख याद होने से दिनों की गिनती गलत हो सकती है। साथ ही अनियमित साइकिल जिसमें पीरियड के 2 सप्ताह के बाद ओवुलेशन ना हो, तो भी इसका अर्थ हो सकता है, कि आपके गर्भ की उम्र उतनी नहीं है जितना आप सोच रही हैं।
दुर्भाग्य से फीटल पोल की अनुपस्थिति का अक्सर यह मतलब होता है, कि गर्भधारण नहीं हुआ है या फिर मिसकैरेज हो गया है। कुछ कठिन मामलों में मिसकैरेज होने के बावजूद यूटरिन सैक बन सकता है और विकसित हो सकता है, जिसके कई सप्ताहों के बाद मिसकैरेज की पहचान हो पाती है। अगर जेस्टेशनल सैक 25 मिलीमीटर से बड़ा हो और उसमें कोई फीटल पोल ना हो, तो यह भी मिसकैरेज की मौजूदगी की एक अन्य संभावना होती है।
जब फीटस लगभग 7 सप्ताह का होता है, तब इसकी हार्टबीट को पहचाना जा सकता है। सामान्य हृदय गति 100 से 160 बीट्स प्रति मिनट होती है। लेकिन अगर हृदय गति 90 बीट प्रति मिनट से कम हो, तो इस प्रेगनेंसी को व्यवहार्य नहीं माना जाता है। इसके अलावा फीटल पोल दिख रहा हो, लेकिन दिल की धड़कन मौजूद न हो तो ये सभी मिसकैरेज या एक्टोपिक प्रेगनेंसी (अस्थानिक गर्भावस्था) का संकेत देते हैं।
चूंकि यह एक आम स्थिति है, ऐसे में आपके डॉक्टर आपको अगले 2 सप्ताहों में दोबारा अल्ट्रासाउंड के लिए बुला सकते हैं, ताकि गर्भ को विकसित होने के लिए थोड़ा समय मिल सके। अगर भविष्य में भी ऐसे ही नतीजे मिलें, तो डॉक्टर इसे मिसकैरेज घोषित कर देते हैं। बच्चे का विकास एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया होती है। जहां पेरेंट्स को हमेशा अच्छे नतीजों की कामना करनी चाहिए, वहीं ऐसी स्थितियां कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार रहने में मदद करती हैं, ताकि ऐसी स्थितियां उत्पन्न होने पर आप सही कदम उठा सकें। किसी भी स्थिति में यह याद रखना जरूरी है, कि आपके पास सपोर्ट के लिए परिवार और रिश्तेदार मौजूद हैं और याद रखें, आप हमेशा दोबारा प्रयास कर सकती हैं।
स्रोत: VeryWellFamily
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