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साल में ऐसा कई बार ऐसा होता है कि अचानक मौसम बदलने से बच्चे बीमार पड़ते हैं। चूंकि बड़ों के मुकाबले बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है इसलिए वे ज्यादातर जल्दी बीमार पड़ते हैं। बीमार बच्चे की देखभाल करना उतना आसान नहीं है जितना लगता है और इस कठिन समय में उसे बहुत ज्यादा प्यार व अटेंशन की जरूरत होती है।
बीमारी बच्चों को बहुत ज्यादा कमजोर व परेशान कर देती है। यदि आपका बच्चा बहुत छोटा है तो संभव है कि उसे समझ नहीं आएगा कि उसके साथ क्या हो रहा है, वह कमजोर महसूस क्यों कर रहा है और वह इस बारे में आपको बता भी नहीं पाएगा। लगातार दर्द व तकलीफ होने से वह चिड़चिड़ा हो सकता है। पर चिंता न करें बीमार बच्चे की देखभाल करने के कुछ तरीके यहाँ बताए गए हैं।
यदि बच्चा बीमार है तो उसे कम्फर्टेबल व सुरक्षित महसूस कराने के लिए यह पहला कदम है, आइए जानें;
मौसम के कारण बाहरी वातावरण व कमरे के भीतर का तापमान भी ठंडा हो सकता है। आप इसे बैलेंस करने के लिए हीटर का उपयोग करें या बच्चे को ब्लैंकेट उढ़ाएं या उसे कोजी महसूस कराने के लिए स्वेटर पहनाएं। यदि बच्चे को इससे गर्मी लगती है तो आप उसे रिलैक्स करने के लिए धीमी स्पीड में पंखा चला दें।
यदि बच्चा बीमार है और वह आंतरिक शांति चाहता है तो ऐसे में बाहर की अशांति या डिस्ट्रैक्शन उसे परेशान कर सकती है। आप बच्चे को वीडियो गेम और टीवी की आवाजों से दूर रखें और शांति में आराम करने दें। यदि बाहर की आवाजें बहुत तेज आ रही हैं तो खिड़कियां बंद कर दें।
किसी भी मेडिकल ट्रीटमेंट का उपयोग करने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे को पता होना चाहिए कि आप उसके लिए हैं। बच्चे के साथ समय बिताएं और उसे डिस्ट्रैक्ट करने के लिए फेवरेट गाना गाएं। यदि बच्चा बड़ा है तो उससे बात करें, उसके लिए कहानी पढ़ें या उसे गले से लगाकर सिर्फ सो जाएं।
इस समय ज्यादातर बीमारियों में गला खराब हो जाता है, स्किन अनहेल्दी रहती है और हवा में गंदगी फैलती है। बच्चे के कमरे में ह्यूमिडिफायर होने से हवा में वॉटर वेपर का लेवल पर्याप्त रहता है, बच्चे की खांसी व गले की इरिटेशन कम हो जाती है।
यदि बच्चे को सर्दी व जुकाम है तो बिस्तर पर लेटने से उसे सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। आप कुछ तकियों की मदद से बच्चे का सिर ऊंचा करें और उसके शरीर के ऊपरी हिस्से को आराम दें। इससे बच्चा आराम से लेट सकेगा और यदि उसे अच्छा लगे तो आप पढ़ने के लिए किताबें भी रखें।
बच्चे की सामान्य या बीमारी के दौरान देखभाल की बात हो तो ऐसे में इन्फेक्शन के प्रभाव को कम करने के लिए शरीर में एनर्जी बढ़ना जरूरी है। यह सिर्फ उचित डायट से ही हो सकता है ताकि बच्चे को पर्याप्त एनर्जी मिल सके।
यदि बच्चा बीमार है तो उसे भूख नहीं लगेगी और वह ठीक से खाना नहीं खाएगा। यह बीमारी की वजह से हो सकता है या सिर्फ मूड न होने की वजह से भी हो सकता है। बच्चे को खाना निगलने में दिक्कत होगी। इसलिए इस समय ट्रेडिशनल खाना पकाने के बजाय आप कुछ ऐसे आइटम्स चुनें जिससे बच्चा आसानी से खा व पचा सके। मैश किए हुए आलू, सीरियल, टोस्ट, बिस्कुट और साधारण खाने से बच्चे का पाचन ठीक रहता है और उसे न्यूट्रिशन भी मिलता है।
बीमार होने पर सूप लेने की सलाह क्यों दी जाती है इसका भी कारण है। चाहे वेज सूप हो या चिकन सूप, इसकी गर्माहट से सर्दी-खांसी में बहुत आराम मिलता है। इससे मुँह का स्वाद भी अच्छा हो जाता है।
बीमार होने पर बहुत ज्यादा पानी व अन्य तरल पदार्थ भी पीने चाहिए। डिहाइड्रेशन से समस्याएं बढ़ने लगती हैं और इससे बच्चे को कठिनाई होगी। यदि आपका बच्चा कमजोर महसूस कर रहा है तो उसे रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाने के साथ-साथ जूस, जिंजर ऐले और यहाँ तक की इलेक्ट्रोलाइट्स भी पिलाएं।
एक बार भावनात्मक रूप से देखभाल होने लगती है और पूरी एनर्जी मिलती है तो समस्याएं जड़ से खत्म होने का समय शुरू हो जाता है। यदि बच्चे की हालत गंभीर है तो आप निम्नलिखित तरीकों से इसे घर में ही ठीक कर सकती हैं, आइए जानें;
इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे के कमरे में हवा का आदान-प्रदान होता रहना चाहिए। कमरे में हवा लगातार जानी चाहिए और आप उसका ब्लैंकेट व चादर भी बदलती रहें ताकि जर्म्स और माइक्रोब्स कमरे में ज्यादा देर तक न रहें। कमरे में सफाई रहने से बच्चा जल्दी रिकवर करेगा।
यदि बच्चा बीमार है तो घर की डस्टिंग व सफाई का काम कम करें। आप फ्लोर को गीले कपड़े से साफ करें ताकि हवा में धूल न उड़े। घर में स्मोकिंग करने से बचें। बहुत तेज गंध वाले एयर फ्रेशनर या परफ्यूम का उपयोग न करें।
यदि बच्चे को खांसी और जुकाम है तो उसे गुनगुने पानी से गरारा कराएं। गुनगुने पानी में नमक मिलाकर गरारा करने से गला साफ हो जाता है और नेजल कैविटी खुल जाती है। यदि जरूरत हो तो आप नेजल स्प्रे का उपयोग भी कर सकती हैं।
यदि बच्चे को बुखार या इन्फेक्शन है तो ऐसी दवा का उपयोग करें जिसके बारे में पूरी जानकारी हो। पर इसकी डोज को दो बार चेक करें या जरूरत हो तो डॉक्टर से भी सलाह लें। बच्चों को एस्पिरिन बिलकुल भी नहीं देनी चाहिए। 4 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप पिलाने की सलाह भी नहीं दी जाती है। 25 सप्ताह से कम के बच्चे को आइबूप्रोफेन भी न दें।
बीमार होने पर आराम करने से मदद मिलती है। इससे शरीर अच्छी तरह से ठीक होता है और इन्फेक्शन से लड़ने के लिए एनर्जी मिलती है।
बच्चे इंजेक्शन के डर और अन्य कई कारणों से डॉक्टर के पास जाना नहीं चाहते हैं। पर यदि उसे लगातार दर्द हो रहा है, पसीने के साथ बुखार आ रहा है या तकलीफ हो रही है तो यह एक इन्फेक्शन होने का संकेत है और इसमें आपको मेडिकल अटेंशन की जरूरत है। फ्लू होने से सिर में दर्द, बुखार, नाक बहना, खांसी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं और ये समस्याएं गंभीर होने से पहले डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। कुछ विशेष लक्षण जैसे तेज बुखार, सांस लेने में समस्या होना, ब्लीडिंग, लगातार रोना, उल्टी और बहुत ज्यादा दर्द होने पर भी तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसलिए यदि आपको बच्चे में ये कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
यदि आपका बच्चा बीमार है तो तुरंत कुछ करें। बच्चे को सुविधाजनक महसूस कराने के लिए ऊपर बताए हुए टिप्स को फॉलो जरूर करें। आपके क्विक एक्शन और मेडिकल मदद देने से बच्चे को ठीक होने में मदद मिलती है।
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