गर्भधारण

डायबिटीज और गर्भधारण – जोखिम व बचाव

डायबिटिक महिलाएं जब फैमिली प्लानिंग करने के बारे में सोचती हैं तो ऐसे में गर्भवती कैसे हों, यह सबसे बड़ी चिंता बन जाती है। फिलहाल डायबिटीज किसी भी उम्र में किसी भी व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन प्रेगनेंसी के साथ-साथ इसे संभालने में जोखिम थोड़े बढ़ जाते हैं क्योंकि इसमें एक बच्चे का विकास भी शामिल होता है। आज मेडिकल साइंस में प्रगति के साथ, ये जोखिम काफी हद तक कम हो गए हैं। हालांकि डायबिटीज के साथ गर्भधारण में कॉम्प्लिकेशन होने की संभावना हमेशा होती है, लेकिन इससे आपको गर्भवती होने की कोशिश करने से नहीं बचना चाहिए। 

क्या आप डायबिटीज के साथ गर्भवती हो सकती हैं?

डायबिटीज और गर्भावस्था एक दूसरे के साथ नहीं जुड़े हैं। इसलिए डायबिटीज की उपस्थिति किसी भी तरह से गर्भावस्था को प्रभावित नहीं करती है। हालांकि, बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी उपाय करने की जरूरत पड़ती है। शुगर लेवल को नियंत्रण में रखना सबसे जरूरी उपाय है। आपके डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट और जांच नियमित रूप से करवाने के लिए कहेंगे ताकि आपकी गर्भावस्था से जुड़ी कई बातों पर उचित निगरानी रखी जा सके।

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डायबिटीज गर्भावस्था को कैसे प्रभावित करता है?

टाइप 2 डायबिटीज के साथ यदि आप गर्भवती होती हैं, तो इसके कई जोखिम और कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं, जिससे गर्भावस्था के दौरान माँ और बच्चे दोनों के लिए मुश्किल पैदा होती है। चूंकि डायबिटीज शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करता है, इसलिए इसका पता नहीं चलने और अनियंत्रित होने पर इसका अधिक खतरा होता है। और इसके बाद इसका यह परिणाम हो सकता है:

हालांकि ये जोखिम मुख्य रूप से माँ को प्रभावित करते हैं, लेकिन बच्चा भी इसके प्रभावों से बचा नहीं रहता है और उसे कई स्थितियों का सामना करना पड़ता है। बच्चे को जीवन में बाद में मोटापे का अधिक खतरा रहता है और साथ ही डायबिटीज होने की भी संभावना होती है। न्यूबॉर्न बेबी को आसानी से पीलिया होने के साथ उसका इम्युनिटी सिस्टम भी प्रभावित होता है। बच्चे का शुगर लेवल भी कम हो सकता है, जिसके लिए उसे तुरंत ग्लूकोज दिया जाता है, या यहां तक कि शुगर लेवल हाई भी हो सकता है, जिसके कारण आमतौर पर बच्चे के कंधों और धड़ में बहुत अधिक फैट जमा हो जाता है।

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गर्भावस्था के दौरान कॉम्प्लिकेशन और जोखिम से बचने के तरीके

डायबिटीज टाइप 1 या यहां तक ​​कि टाइप 2 के साथ प्रेग्नेंट होने में कई जोखिम शामिल हैं, इन संभावनाओं को कम करने के कुछ तरीके नीचे बताए गए हैं:

1. फोलिक एसिड सप्लीमेंट के साथ डाइट

किसी महिला को डायबिटीज हो या न हो, उसकी डाइट में फोलिक एसिड को शामिल करना सबसे पहली प्राथमिकता है जिससे समझौता नहीं किया जा सकता है। ज्यादातर मामलों में, डॉक्टर फोलिक एसिड के सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं क्योंकि विकास के शुरुआती फेज में गर्भ में पल रहे बच्चे की आवश्यकता काफी अधिक होती है। हालांकि सामान्य आवश्यकता लगभग 400 माइक्रोग्राम है, एक डायबिटिक महिला के मामले में, यह एक बार में 5 मिलीग्राम तक बढ़ जाती है। इसलिए, गर्भावस्था के पहले 3 महीनों के लिए सप्लीमेंट के साथ फोलिक एसिड की इस मांग का जरूर ध्यान रखें ताकि बच्चा किसी भी प्रभाव के साथ पैदा न हो।

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2. सही दवाएं लें

दवा और गर्भावस्था शायद ही कभी साथ-साथ चलती है। गर्भावस्था के दौरान कई दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि यह माँ और बच्चे पर काफी प्रभाव डाल सकती हैं। डायबिटीज होने की वजह से दवा लेना जरूरी हो सकता है, हालांकि उन्हें कभी भी खुद से नहीं लेना चाहिए। ध्यान रखें कि आप अपने द्वारा ली जाने वाली किसी भी दवा के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें और डोज की मात्रा से कभी भी परेशान न हों।

3. एक अच्छा एक्सरसाइज शेड्यूल बनाएं

एक डायबिटिक महिला के वजन बढ़ने से कई कठिनाइयां सामने आती हैं या यह यहां तक ​​कि मोटापे की शुरुआत होने का कारण बन सकती है, जिसकी वजह से अधिक कॉम्प्लिकेशन बढ़ जाते हैं। हालांकि वजन बढ़ाना भी एक जरूरत है, लेकिन साधारण व्यायामों को चुनकर इसे लिमिट के अंदर रखना भी संभव है। अपनी एक्सरसाइज की लिस्ट अपने डॉक्टर को जरूर दिखाएं और जानें कि गर्भवती होने पर वे आपके लिए सुरक्षित हैं या नहीं। चहलकदमी या हल्की स्विमिंग जैसी मूवमेंट को शामिल करना आपके लिए अच्छे विकल्प हैं।

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4. स्वस्थ आहार लें

डायबिटीज से पीड़ित एक गर्भवती महिला की डाइट से जुड़ी आवश्यकताएं एक सामान्य महिला से थोड़ी अलग होती हैं क्योंकि उसे संतुलित पोषण के साथ-साथ अपने खून में शुगर लेवल को भी कंट्रोल में रखना होता है। एक डायटीशियन इसमें आपकी मदद कर सकता है और आपके स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए सही खाने को शामिल करने और खराब को बाहर करने के लिए चार्ट तैयार करता है।

5. ब्लड शुगर लेवल पर नजर रखें

डायबिटीज से पीड़ित गर्भवती महिला के लिए, डायबिटीज की डिग्री के आधार पर इंसुलिन का सेवन जरूरी होता है। इसके परिणामस्वरूप ब्लड शुगर के लेवल में अचानक से उतार-चढ़ाव होता है, जो बहुत अधिक या बहुत कम हो जाता है। लो शुगर अटैक होने की स्थिति में अपने साथ एक स्नैक या कोई मीठी चीज रखना जरूरी है ताकि आप जल्दी से अपने शुगर लेवल को सामान्य कर सकें।

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6. नियमित रूप से जांच कराएं

हर गर्भवती महिला को एक सामान्य शेड्यूल दिया जाता है जिसका उसे पालन करना होता है, जिसमें चेकअप भी शामिल होते हैं जो बच्चे के विकास, माँ की स्थिति और कई बायो केमिकल तत्वों पर ध्यान देता है। एक डायबिटिक माँ के लिए, ये पहलू काफी बदल जाते हैं जिससे चेकअप की फ्रीक्वेंसी ज्यादा हो जाती है। इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी कॉम्प्लिकेशन को बढ़ने से पहले ही सही कर दिया जाए।

7. पहले से तैयार रहें

यदि आप अपने डायबिटीज के बारे में जानती हैं, तो गर्भवती होने का निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। डॉक्टर आपको यह समझने में मदद करेंगे कि क्या आप एक बच्चे को जन्म देने और इसे पूर्ण गर्भावस्था में ले जाने के लिए सही हेल्थ में हैं। इसके अलावा, यह आपको बाकी की जर्नी की योजना बनाने, एक हेल्दी डाइट रखने और गर्भावस्था के दौरान बढ़े हुए वजन को कंट्रोल करने के लिए मौका देने का एक अच्छा समय देता है।

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हालांकि पहले से मौजूद डायबिटीज और गर्भधारण एक अच्छा कॉम्बिनेशन नहीं है, लेकिन इसकी वजह से प्रेग्नेंट नहीं होना भी सही कारण नहीं है। यह जानना आवश्यक है कि डायबिटीज की स्थिति आपके बच्चे की डिलीवरी को प्रभावित कर सकती है या नहीं। पहले, डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं के बच्चे समय से पहले पैदा हो जाते थे, जिससे नवजात शिशु के लिए सावधानी बरतनी पड़ती थी। आजकल, सही परिस्थितियों और दवाओं के साथ कोई भी महिला आसानी से फुल टर्म गर्भावस्था प्राप्त कर सकती है। डिलीवरी के बाद, माँ सामान्य होने के लिए इंसुलिन के लेवल को भी एडजस्ट कर सकती है।

इसके अलावा बच्चे को स्तनपान कराते समय, ज्यादातर डॉक्टर मुंह से खाने वाली गोलियों के बजाय इंसुलिन शॉट लेने की सलाह देते हैं। क्योंकि खाने वाली दवाई के स्तन के दूध में प्रवेश करने की अधिक संभावना होती है और इसलिए ये बच्चे तक पहुंच सकती है। इंसुलिन शॉट्स महिला के डायबिटीज को नियंत्रण में रखने में मदद करते हैं जिससे उसे ब्रेस्टफीडिंग जारी रखने में मदद मिलती है, और वह अपने मातृत्व का आनंद ले सकती है। 

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यह भी पढ़ें:

गर्भावस्था में डायबिटीज से बचने के प्रभावी तरीके
गर्भावस्था में हाइपोग्लाइसीमिया: ब्लड शुगर लेवल कम होना
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समर नक़वी

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